
रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ में राम से बड़ा ”अडानी” का नाम जैसे हालात बनने से राम वन गमन पथ पर संकट मंडराने लगा है | भारत सरकार ने राम वन गमन पथ को विकसित करने के लिए करोडो रुपए फूंक दिए| इस मार्ग पर पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने की मुहीम छेड़ी गई| इस कड़ी में भगवान राम के पद चिन्हों को यादगार बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने ठोस कदम उठाते हुए,मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई और विकास के कार्यों को नई गति प्रदान की| लेकिन,बीजेपी के सत्ता में आते ही,राम वन गमन पथ के अस्तित्व को लेकर नई खींचतान सामने आई है |

हसदेव-अरण्य के पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक इन दिनों “अडानी का डंका” बज रहा है|कोयला निकालने की होड़ में राम वन गमन मार्ग अब जंग का मैदान बन गया है| एक ओर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार की हथियारबंद पुलिस है,तो दूसरी ओर इलाके की निहत्थी आदिम जनजातियां,ये समुदाय अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है| हसदेव में नए कोल ब्लॉक की अनुमति की खबर से पूरे पहाड़ी इलाके में हड़कंप है| खबर है,कि एक सरकारी अनुमति ने हज़ारों साल पुरानी भगवान राम और माता सीता की निशानियों को खतरे में डाल दिया है।

जानकारी के मुताबिक,राज्य की बीजेपी सरकार की अनुमति वाली केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग और पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना पर केंद्र सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है| इस खबर के सामने आने के बाद राम गमन मार्ग पर कोहराम मच गया है | यह भी बताया जा रहा है,कि वर्ष 2023 में तत्कालीन बघेल सरकार के सत्ता से हटते ही हसदेव-अरण्य की पहाड़ी पर पेड़ो की ‘अंधाधुन’ कटाई शुरू हो गई थी| जबकि,राज्य में ना तो बीजेपी सरकार का गठन हुआ था और ना ही विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी| अभी,राज्य की बीजेपी सरकार को सत्ता में काबिज हुए ढाई बरस भी पूरा नहीं हो पाया है,कि इस ऐतिहासिक पहाड़ी को कोयले की खदान में तब्दील करने की योजना परवान चढ़ने लगी है|

जानकारी के मुतबिक,कोल खदान के हितों के मद्देनजर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार ने 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने की सिफारिशों से केंद्र को अवगत कराया था| बताया जाता है,कि राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान कर दी है,हरी झंडी मिलते ही 7 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का रास्ता अब साफ हो गया है। नतीजतन,कई इलाकों में इस परियोजना के विरोध में लोगों का गुस्सा एक बार फिर उबलने लगा है |

वर्ष अक्टूबर 2024 में ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीख़ी झड़प हुई थी| इस दौरान ना केवल,कानून व्यवस्था के हालात बने थे,बल्कि दोनों पक्षों के सैंकड़ों लोगों को घायल अवस्था में अस्पतालों में भर्ती कराया गया था| पुलिस पर पथराव और सरकारी संपत्ति के नुकसान को लेकर दर्जनों ग्रामीणों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी| सरगुजा की पहाड़ियों में हसदेव-अरण्य और तमनार का महत्त्वपूर्ण स्थान है | इन इलाको में नई कोयला खदानों का जमीनी स्तर पर विरोध हो रहा है| सूरजपुर जिले के उदयपुर क्षेत्र के ग्राम साल्ही सहित आस-पास के कई इलाकों में “अडानी” की परसा कोल खदान को लेकर आज भी तनाव की स्थिति निर्मित बताई जाती है|

यही हाल तमनार का है,इन इलाकों में पुलिसकर्मियों ने कई मौकों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर प्रदर्शनों को हिंसक होने से रोका है | पेड़ों की कटाई के विरोध में हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति और सरकारी नुमाइंदो के बीच झड़पे आम है|रायगढ़ जिले में 27 दिसंबर 2025 एक ऑन-ड्यूटी महिला पुलिस कांस्टेबल के कपड़े फाड़ने और बदसलूकी करने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई थी | तमनार ब्लॉक के लिब्रा गांव में घटित मामले का सोशल मीडिया पर वीडियो भी काफी वायरल हुआ था |

हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित कोल खदान को लेकर विवाद लंबे समय से ही चल रहा है. सरकार को बिजली बनाने के लिए कोयला चाहिए, इसलिए राजस्थान सरकार को सरगुजा के हसदेव क्षेत्र से कोल उत्खनन कीअनुमति दी गई थी. राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड को छत्तीसगढ़ से कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित होती है| सरगुजा के स्थानीय ग्रामीण अपने जंगल को काटने नहीं देना चाहते. वर्षों से यह विवाद चला आ रहा है।

छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य (Hasdeo Aranya) के जंगलों की कटाई से मुख्य रूप से उत्तरी छत्तीसगढ़ के कोरबा, सूरजपुर और सरगुजा जिले बुरी तरह से प्रभावित हो रहे है|हसदेव का जंगल, हसदेव नदी का कैचमेंट (जलग्रहण) क्षेत्र है | इसके विनाश से हसदेव नदी और मिनी माता बांगो बांध में पानी की आवक के कम पड़ने एवं प्रभावित होने के आसार बढ़ गए है|

जांजगीर-चांपा, बिलासपुर और कोरबा जिलों के लाखों हेक्टेयर खेतों की सिंचाई और पीने के पानी की आपूर्ति इसी जलाशयों से होती है| इन पहाड़ियों के घने जंगल हाथियों का प्रमुख रहवास और कॉरिडोर (प्रवासी रास्ता) है | जंगल कटने से वन्यजीव अभी से विस्थापित होने लगे है| पहाड़ी के आसपास के रिहायशी इलाकों (गाँवों) में मानव-हाथी संघर्ष जोरों पर है,इन इलाकों में कभी इंसान तो कभी हाथी बेमौत मारे जा रहे है |

मध्यभारत का फेफड़ा कहे जाने वाले इस जंगल को काटने के निर्णय से लोग न केवल चिंतित हैं, बल्कि आक्रोशित भी हैं.बताया जाता है,कि कोयला खनन के लिए हसदेव अरण्य के करीब 4.50 लाख पेड़ों को काटा जाना है.विशेषज्ञों के मुताबिक,सरकार के इस निर्णय का पर्यावरण पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ेगा. हसदेव के जंगल कटने से पेड़ों की167 प्रजतियां खत्म होने का अंदेशा बढ़ गया है,वहीं हाथी, भालू, तेंदुआ, भेड़िया, धारीदार लकड़बग्धा जैसे दर्जनभर से अधिक वन्य जीवों का नैसर्गिक रहवास खतरे में है| यही नहीं, विलुप्तप्राय चिड़ियों, तितलियों और सरीसृपों की दर्जनों प्रजातियों पर भी खतरा मंडराने लगा है|
वीडियो देखे :डॉ. रमन सिंह ने निभाई सनातन परंपरा,रामभक्तों के चरण धोकर किया अभिनंदन…

छत्तीसगढ़ में औद्योगीकरण की कड़ी में कोयला खदानों को हथियाने की मची होड़ ने जल-जंगल और ज़मीन से जुड़े आंदोलनों को हवा दे दी है|न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ संवाददाता ने सूरजपुर और रायगढ़ के उन इलाकों का जायजा लिया,जहाँ “अडानी” ही नहीं बल्कि अन्य उद्योगपतियों द्वारा कोयला खनन योजनाओं को “अमली जामा” पहनाया जा रहा है| इन इलाकों में ग्रामीणों का पक्ष तो लोगों की जुबान पर है,सार्वजानिक मंचों से उसकी घोषणा भी हो रही है| लेकिन,”अडानी” समूह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है|जबकि,राज्य की बीजेपी सरकार की ओर से अडानी समूह को मिली अनुमति को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है| फिलहाल, कोल खदानों के विस्तार की ओर ”अडानी” समूह के बढ़ते कदम पर्यावरण ही नहीं,बल्कि राम गमन मार्ग के लिए नई चुनौती बन गए है|
विपक्षी खेमे में मेल-मिलाप की तस्वीर, सोनिया-ममता लगे गले,खरगे बोले- हमें एकजुटता दिखानी होगी..





