दिल्ली/रायपुर : छत्तीसगढ़ के 3500 करोड़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के रुख़ से जहाँ,राज्य की एक बड़ी आबादी हतप्रभ है,वही सुप्रीम कोर्ट भी ED और राज्य सरकार की ओर से चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने को लेकर दायर याचिका के तथ्यों को लेकर हैरान-परेशान नजर आया|

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत अभियुक्तों के जमानत के अधिकार से जोड़कर देखी जा रही है,तो दूसरी ओर ED और राज्य सरकार की ओर से दाखिल जमानत के विरोध के “तथ्य” भी काफी कमजोर और ”नूरा-कुश्ती” के दायरे में फलते-फूलते आंके जा रहे है|

दरअसल,सुप्रीम कोर्ट ने ईडी और राज्य सरकार की उन दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया,जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के पुत्र चैतन्य की जमानत का विरोध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद,देश के तमाम हाई कोर्ट की ज़मानत प्रदान करने की शक्तियों को लेकर जहाँ बहस छिड़ गई है, वही हाई कोर्ट के फैसले से नाखुश याचिकार्ताओं के सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाने को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है|

सवाल उठ रहा है,कि हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा आरोपियों की जमानत रद्द कराने को लेकर याचिकाओं पर क्या अब रोक लगने के आसार है ? क्योंकि,ऐसे मामलों में जिस तर्ज़ पर सुप्रीम कोर्ट की तल्खी सामने आई है,उसने उन सैंकड़ो याचिकर्ताओं के अरमानों पर सवालियां निशान लगा दिया है, जिनकी याचिकाएं कई महीनों से सुको में लंबित बताई जाती है|ऐसी याचिकाएं हाई कोर्ट के फैसलों के खिलाफ आरोपियों की जमानत रद्द करने से जुड़ी बताई जाती है|आरोपी चैतन्य बघेल V/S ED और छत्तीसगढ़ शासन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा फैसले ने विधि जगत में खलबली मचा दी है |

माना जा रहा है,कि कई घोटालो में संलिप्तता दर्ज होने के बावजूद सुको के फैसले से पूर्व मुख्यमंत्री के आरोपी पुत्र की, न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर लगा खतरा टल गया है, बल्कि जांच एजेंसियों के उस रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां जमानत के फैसलों को अदालत में चुनौती देने के लिए कमजोर तथ्य और दलीले पेश की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा फैसले के बाद सवाल यह भी उठ रहा है,कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान 3500 करोड़ के शराब घोटाले को अंजाम दिए जाने के बावजूद राज्य की बीजेपी सरकार आख़िर क्यों मामले की CBI जाँच से परहेज़ कर रही है ? जबकि,झारखंड में भी पूर्व मुख्यमंत्री बघेल गिरोह द्वारा शराब घोटाले को अंजाम दिए जाने से इस राज्य में CBI जांच जारी बताई जाती है,इन दोनों ही राज्यों में ”पब्लिक मनी” के दुरुपयोग और शराब घोटाले की जांच को लेकर ED भी मैदान में है|

सुप्रीम कोर्ट में ED और छत्तीसगढ़ सरकार की ख़ारिज दोनों ही याचिका सुर्ख़ियों में है,आरोपी चैतन्य बघेल की जमानतीय राहत बरकरार रहने का मामला अब कानूनी-दांव पेंचो के नजरिए से सामने आया है |छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले की CBI जांच की मांग वाले पहलूओं पर जहाँ,प्रशासनिक सन्नाटा पसरा है|वही,अभियोजन की ख़ारिज याचिकाओ के कमजोर तथ्यों को लेकर राजनैतिक गलियारों में ”नूरा-कुश्ती” की दास्ताँ भी सामने आई है|

कई राजनेताओं का दावा है,कि याचिकाओं की नींव ही आरोपी चैतन्य बघेल को उपकृत करने की मंशा से रखी गई थी ? अब मामले को लेकर वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है,मुद्दा हवा में उछल रहा है,कि शराब घोटाले की CBI जांच से डर किसे है ? छत्तीसगढ़ सरकार आखिर क्यों CBI जांच से परहेज कर रही है ? यह सवाल अब सिर्फ कांग्रेस ही नहीं,बल्कि सत्ताधारी बीजेपी के गलियारों में नेताओं की जुबान पर है |

दरअसल,PM मोदी समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान जनता से वादा किया था,कि प्रदेश के तमाम घोटालेबाज़ों को उल्टा कर सीधा लटकाया जाएगा| यही नहीं,संसद तक में PM मोदी ने साफ़ किया था,कि “जो सरकारी धन लूटा है,उसकी पाई-पाई वसूली जाएगी”|लेकिन,राज्य में बीजेपी के ढाई साल के कार्यकाल गुजर जाने के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री “भू-PAY” बघेल के गुनाहों का हिसाब-किताब इंसाफ की बांट जोह रहा है,अलबत्ता जमानत का भरपूर लाभ,जाँच एजेंसियों की नाकामी और कमजोर दलीलों के कारण भ्रष्टाचार के कई मामलों में लिप्त पूर्व मुख्यमंत्री के आरोपी पुत्र चैतन्य बघेल को मिल रहा है|ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल पर जाँच एजेंसियां अपना शिकंजा कस पाएगी ? राज्य की बीजेपी सरकार की कमजोर कड़ी के रूप में देखा जा रहा है |

सुप्रीम कोर्ट में शराब घोटाला की सुनवाई के दौरान ED और छत्तीसगढ़ सरकार की दलीले चंद मिनट भी नहीं चली,इस मामले में जारी जांच पर अब सवाल उठने लगे है| छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े घोटाले में से एक शराब घोटाले की जाँच को लेकर एजेंसियों के रवैये पर प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई ) सूर्यकांत,न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सख्त टिप्पणी की है| जानकारी के मुताबिक,इस प्रकरण में सुनवाई के दौरान जमानत रद्द कराने की बढ़ती प्रवृत्ति परसुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है।उसने साफ कहा कि महज कानूनी खामी के आधार पर किसी आरोपित की आजादी छीनना कितना सही है ? इस पर विचार की जरूरत है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा दिया है।
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अदालत में छत्तीसगढ़ सरकार और ईओडब्ल्यू ने दावा किया था,कि चैतन्य बघेल शराब घोटाले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक हैं, जबकि,बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी, कि दो साल लंबी जांच के बाद हाईकोर्ट ने हर पहलू पर विचार करके ही चैतन्य बघेल की जमानत पर न्यायपूर्ण फैसला सुनाया था। इससे पहले,इसी साल दो जनवरी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने आरोपी चैतन्य बघेल को ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों मामलों में जमानत दे दी थी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था, कि इस मामले के कथित मुख्य साजिशकर्ता – जैसे अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अरविंद सिंह – को सुप्रीम कोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी है,ऐसे में चैतन्य बघेल को हिरासत में रखना समानता के स्थापित सिद्धांत का उल्लंघन होगा। एकल पीठ ने यह भी माना कि अधिकांश सबूत दस्तावेजी हैं,आरोपित लंबे समय से जेल में था और प्रीवेंशन आफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत बयानों का मूल्यांकन ट्रायल के दौरान ही हो सकता है।लिहाज़ा,हाई कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट अभियोजन पक्ष ने आरोपी की जमानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था|

गौरतलब है, कि ईडी ने चैतन्य बघेल को 25 जुलाई 2025 और ईओडब्ल्यू ने लगभग डेढ़ माह बाद इसी वर्ष सितंबर माह में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। दायर याचिका में एजेंसियों का आरोप है कि 2019 से 2022 के दौरान हुए इस कथित घोटाले से राज्य को भारी राजस्व घाटा हुआ और उसने लगभग 3,500 करोड़ के भ्रष्टाचार को लेकर अपने तथ्य भी पेश किए,इसमें पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र चैतन्य पर भी करोड़ों रुपये हासिल करने का आरोप लगाया गया था।

फ़िलहाल,सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मामले की उच्च स्तरीय जाँच के लिए CBI को उपयुक्त और निष्पक्ष एजेंसी के रूप में गिना जा रहा है|राज्य की एक बड़ी आबादी मांग कर रही है,कि दिल्ली से बड़े छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की CBI से जाँच जरुरी है,ताकि राजनैतिक रूप से प्रभावशील पूर्व मुख्यमंत्री की काली करतूतों पर कानूनी मुहर लग सके|
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