
चमोली : – उत्तराखंड के सीएम धामी ने चमोली में बचाव अभियान का निरीक्षण कर राहत और बचाव के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए है। उन्होंने पीड़ित मजदूरों और उनके परिजनों से मुलाकात कर ढाँढस बंधाया है। धामी ने पीड़ितों के लिए मुआवजे का ऐलान भी किया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिपलकोटी, चमोली में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे श्रमिकों के बचाव अभियान का मौके पर निरीक्षण किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चमोली के पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी टनल के भीतर मलबा और पानी आने की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं। मौके से बरामद शवों को मर्चुरी भेजा गया है। यहाँ से उनके परिजनों को समुचित सहायता उपलब्ध कराइ जा रही है, ताकि सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार सुनिश्चित किया जा सके। चमोली में अभी भी भारी बारिश का दौर जारी है।

पिछली रात मायापुर स्थित टीएचडीसी सुरंग में पानी और मलबा घुस गया था। मुख्यमंत्री प्रशासन, पुलिस, SDRF, NDRF व अन्य एजेंसियों से प्रगति की जानकारी लेकर निर्देश दे रहे हैं। उन्होंने मौंके से बचाए गए घायल श्रमिकों से भी मुलाकात की है। घायल छत्तीसगढ़ निवासी सुशील दीवान ने तस्दीक करते हुए बताया कि घटना के वक्त डेढ़ दर्जन से ज्यादा ( 18 -19 ) मजदुर टनल में कार्य कर रहे थे। उसमे ओडिशा और झारखण्ड के श्रमिक भी शामिल थे। ओडिशा निवासी जगेश्वर ने बताया कि वह टनल से निकलने वाले पानी को पंप के जरिये बाहर भेजने का काम करता है। शाम करीब 6:10 बजे अचानक तेज आवाज सुनाई दी, जो बेहद भयावह थी। इसी दौरान टनल की बिजली भी गुल हो गई। हादसे के समय वह घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर था। टनल में तेज आवाज सुनी तो किसी अनहोनी की आशंका हुई। अन्य लोगों को इसकी जानकारी दी।

हादसे में घायल छत्तीसगढ़ निवासी सुनील दीवान ने जिला अस्पताल में बताया कि वे टनल के अंदर सरिया से सेटरिंग बना रहे थे। एक साथ वे करीब 17 लोग थे। अचानक करीब 150 मीटर दूर तेज आवाज के साथ भारी भूस्खलन हुआ और मलबा, पानी व पत्थर तेज गति से टनल के अंदर घुस आए। इसके धक्के से कई लोग दूर जा गिरे, जबकि कुछ लोग मलबे में दब गए। हम मलबे के धक्के से टनल के बाहर की ओर आ गए। मजदूर बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे। टनल में कई जगह से मलबा आने से ऑक्सीजन लेवल बेहद कम हो गया था। कुछ लोग दम घुटने के कारण मलबे में आगे चल नहीं पा रहे थे। शुक्र है समय पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान करीब 16-17 लोग एक जगह पर थे। जबकि बिजली ऑपरेटर, प्लंबर के साथ ही कुछ अन्य लोग भी वहां मौजूद थे। एक घायल ने बताया कि वे कीचड़ में आधा हिस्से तक फंस गए थे, जैसे-तैसे जान बची।

चमोली के विकास में टीएचडीसी की टनल बेहद महत्वपूर्ण बताई जाती है, इस टनल से बचकर बाहर आए घायल मजदूरों ने खौफनाक मंजर का सामना किया। टीएचडीसी की टीआर टनल से बचकर बाहर आए घायल मजदूर सदमे में हैं। टनल में अचानक ऑक्सीजन लेवल कम होने से मजदूरों की सांस फूल रही थी। कांपते शब्दों में उन्होंने बताया कि जिस जगह पर भूस्खलन हुआ, वहां बुधवार को मिट्टी खिसक गई थी। इसके धंसने की आशंका थी। यह टनल दुर्गापुुर से सियासैंण तक करीब तीन किलोमीटर तक निर्मित हो रही है। उनके मुताबिक हादसा करीब डेढ़ किमी पर हुआ है।





