सुप्रीम कोर्ट ने भरत तिवारी एनकाउंटर केस में सुनवाई से किया इनकार, हाईकोर्ट जाने का निर्देश

पटना से बड़ी खबर सामने आई है। बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पहले पटना हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। याचिका में इस मामले की सीबीआई जांच कराने और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की गई थी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्होंने किस हैसियत से यह जनहित याचिका दाखिल की है और कहा कि अपनी बात पहले हाईकोर्ट के सामने रखें।

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच ने मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार किया था और याचिकाकर्ता को रजिस्ट्री के माध्यम से याचिका सूचीबद्ध कराने का निर्देश दिया था। जनहित याचिका में 17 जून को हुए कथित एनकाउंटर की एफआईआर दर्ज कराने, न्यायिक जांच कराने और सीबीआई से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि कथित फर्जी एनकाउंटर कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं और ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

याचिका में दावा किया गया है कि 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी ने फेसबुक लाइव के दौरान कुछ शर्तें पूरी होने पर सरेंडर करने की इच्छा जताई थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद एनकाउंटर में उनकी मौत हो गई। मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी का आरोप है कि उनके बेटे का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, उसके खिलाफ कोई एफआईआर या चार्जशीट भी दर्ज नहीं थी, और सरेंडर के बाद भी उसे गोली मार दी गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या न्यायिक जांच अभी नहीं हुई है।

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