
पटना : – बिहार में लगातार बढ़ रहे बाढ़ के असर से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। राज्य के 12 जिलों में करीब 22.42 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षित आवाजाही के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए गए हैं।

बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए 190 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं, जहां करीब 2.51 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा तीन राहत शिविरों में 1,631 लोगों के रहने, खाने और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। लोगों के आवागमन और रेस्क्यू के लिए 1,429 नावें मैदान में उतारी गई हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 171 मेडिकल कैंप सक्रिय हैं, जबकि राहत और बचाव अभियान के लिए NDRF की 10 और SDRF की 27 टीमें तैनात हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल के 70 प्रखंडों की 368 ग्राम पंचायतें बाढ़ से प्रभावित बताई गई हैं। वहीं, केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंडक के वाल्मीकिनगर और सोन के इंद्रपुरी बराज पर पानी के बहाव की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई गई है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन की चुनौती अभी बनी हुई है।






