
दिल्ली सरकार ने राजधानी को स्वच्छ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने के लिए नई दिल्ली ईवी पॉलिसी-2026 लागू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह नीति केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ष 2030 तक पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में बदलने का व्यापक रोडमैप है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, यह नीति 1 जुलाई से प्रभावी हो गई है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक व निजी परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाकर प्रदूषण कम करना है।
सिर्फ इंसेंटिव नहीं, अब पूरी व्यवस्था बदलेगी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2020 में लागू की गई ईवी पॉलिसी ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की शुरुआत जरूर की थी, लेकिन वह मुख्य रूप से खरीद पर मिलने वाले प्रोत्साहन (इंसेंटिव) तक सीमित थी। अब नई नीति के जरिए सरकार पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम में संरचनात्मक बदलाव लाने जा रही है। नई ईवी पॉलिसी में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करना और अलग-अलग वाहन श्रेणियों का चरणबद्ध इलेक्ट्रिफिकेशन शामिल है।
कब से कौन-सी गाड़ी सिर्फ इलेक्ट्रिक होगी?
नई नीति के तहत पहली बार अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए समयसीमा तय की गई है।
- 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में पंजीकृत होने वाले सभी नए एल-5 कैटेगरी ऑटो-रिक्शा केवल इलेक्ट्रिक होंगे।
- 1 अप्रैल 2028 से राजधानी में बिकने और रजिस्टर होने वाले सभी नए दोपहिया वाहन केवल इलेक्ट्रिक होंगे।
- एन-1 कैटेगरी के छोटे कमर्शियल ट्रकों को भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर मिलेगा बड़ा फायदा
नई नीति के तहत खरीद प्रोत्साहन (Purchase Incentives) को भी पहले से अधिक आकर्षक बनाया गया है।इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने पर 30,000 रुपये तक का इंसेंटिव मिलेगा। यदि पुराना वाहन स्क्रैप कराया जाता है तो 10,000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे।
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर खरीदने पर 50,000 रुपये तक की सहायता मिलेगी। पुराना ऑटो स्क्रैप कराने पर 25,000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे।
एन-1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर 1 लाख रुपये तक का इंसेंटिव मिलेगा, जबकि पुराने वाहन को स्क्रैप कराने पर 50,000 रुपये अतिरिक्त की सहायता दी जाएगी।
चार्जिंग स्टेशन का बड़ा नेटवर्क होगा तैयार
सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर भी विशेष जोर दे रही है। दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (DTL) को इस परियोजना की नोडल एजेंसी बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत सिंगल विंडो क्लियरेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्रिड प्लानिंग और बड़े पैमाने पर नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे ताकि लोगों को चार्जिंग संबंधी किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बैटरी मैनेजमेंट और स्कूल बसों पर भी फोकस
नई ईवी पॉलिसी में पहली बार बैटरी मैनेजमेंट को भी व्यापक रूप से शामिल किया गया है। बैटरी निर्माण से लेकर उसके संग्रह, डिजिटल ट्रैकिंग, रीसाइक्लिंग और ईपीआर (Extended Producer Responsibility) नियमों के पालन तक पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाएगा।
इसके अलावा सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक दिल्ली की 30 प्रतिशत स्कूल बसें इलेक्ट्रिक हो जाएं।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नई व्यवस्था
सरकार ने इस बार नीति लागू करने के लिए मजबूत संस्थागत ढांचा भी तैयार किया है। परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में दिल्ली ईवी एपेक्स कमेटी, मुख्य सचिव की अगुवाई में हाई पावर कमेटी और एक समर्पित ईवी सेल का गठन किया गया है, ताकि सभी विभाग तय समयसीमा के भीतर अपने लक्ष्य पूरे कर सकें।
क्या बोलीं मुख्यमंत्री?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणा नहीं करती, बल्कि उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रभावी और व्यावहारिक तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, दिल्ली ईवी पॉलिसी-2026 राजधानी को स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।






