रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार अपने उच्चतम सूचकांक में है,''ACB-EOW'' इसकी जड़ों पर लगातार ''मठ्ठा'' डाल रहा है | सुखद पहलू यह है,कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच ''ACB-EOW'' जहाँ  ख़ुद "भ्रष्टाचार का केंद्र" बन गया था,तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल के संरक्षण में 'ACB-EOW' भ्रष्ट अफसरों का गढ़ साबित हो रहा था,वही 2023 से लेकर 2026 के वर्षों में एजेंसी ने अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा पुनः प्राप्त करने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया है |

ताज़ा आंकड़े तस्दीक करते है,कि मुख्यमंत्री साय सरकार ने भ्रष्ट अफसरों को ठिकाने लगाने के लिए प्रभावी कार्यवाही शुरू कर दी है | प्रशासिक जड़ों में कलेक्टर का दफ़्तर सरकारी कामकाज के बदले रिश्वत मांगने के मामले में सबसे आगे पाया गया है | हालाँकि,राजस्व विभाग के स्थानीय मुखिया "कलेक्टर" को छोड़ ACB-EOW ने 193 अफसरों-कर्मचारियों को धर-दबोचने में देरी नहीं की |राज्य के ''ACB-EOW'' ने अपने कामकाज़ के जो आंकड़े पेश किए है,उसमे राजस्व विभाग भ्रष्टाचार के मामले में अव्वल नंबर पर है।

राज्य में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ ''जीरो टॉलरेंस (शून्य सहिष्णुता) नीति सुनिश्चित की गई है,बावजूद इसके किसी भी ''कलेक्टर'' को नामज़द आरोपी नहीं बनाया गया है,प्रकरण पटवारी-तहसीलदार,SDM,ADM और अन्य राजस्व अधिकारियों पर थोप दिए गए है | ऐसा नहीं है,कि "कलेक्टर महोदय" दूध के धुले हुए है | लेकिन,बड़े पैमाने पर काले कारनामों में लिप्त होने के बावजूद वैधानिक कार्यवाही सिर्फ राजस्व अमले के चुनिंदा छोटे अधिकारियों तक सीमित कर दी गई है |

दावा किया जाता है,कि "भ्रष्टाचार" के मामलों में उच्चाधिकारी स्तर पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए,जबकि एजेंसी राजस्व अमले की जड़ों से दूरियां बनाते हुए,सिर्फ गड़बड़ी और रिश्वतख़ोरी के मामलों में अपनी कार्यवाही "रंगे हाथ धरे गए" आरोपियों तक ही,सिमट कर रह गई है | तस्दीक की जाती है,किज़्यादातर जिलों में ''सिटीजन चार्टर" में दर्ज़ सुविधाओं को समय पर जरूरतमंद के हाथों में पहुँचाने के कार्यों को भी "अवैध कमाई" का जरिया बना लिया गया है| यही नहीं,ज़मीनों की ख़रीद-फ़रोख़्त,नामांतरण,सीमांकन और छोटे-मोटे कार्यों तक के लिए कई जरूरतमंदों को अपनी जेबें ढीली करनी पड़ रही है |

दिलचस्प बात यह है,कि छत्तीसगढ़ में ACB-EOW की कमान,''चीफ़ सेक्रेटरी" के हाथों में है,ऐसे में सवाल उठ रहा है,कि "प्रशासनिक मुखिया" के अधीन "राजस्व महकमे" में ही,आखिर कैसे भ्रष्टाचार की फ़सल लह-लहा रही है | भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के दस्तावेजों में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 28 मई 2026 तक प्रदेश में रिश्वतखोरी के रंगे हाथों धरे गए 154 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए थे। इन मामलों में 193 शासकीय सेवकों और लोक सेवकों को रिश्वत लेते धरा गया था। जबकि,इन तमाम प्रकरणों में रिश्वत की कुल राशि 51 लाख 67 हजार 540 रुपये जप्त की गई | यह भी जानकारी सामने आई है,कि दर्ज़ प्रकरणों एवं आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में मात्र छह मामलों में ही आरोपियों के ख़िलाफ़ दंडनीय कार्यवाही सुनिश्चित हो पाई | विभागवार आंकड़ों पर गौर करें,तो राजस्व विभाग में सबसे अधिक 56 ट्रैप प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 67 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ़्तार किए गए।

राजस्व अमले के बाद रिश्वतख़ोरी के मामलों में स्कूल शिक्षा विभाग दूसरे पायदान पर है,इस अमले में दर्ज़ 20 प्रकरणों में 25 आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही की गई | जबकि,पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 14 प्रकरणों में 15 और गृह (पुलिस) विभाग में 10 प्रकरणों में 13 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ़्तार किए गए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में सात प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 10 लोकसेवक धरे गए।जानकारी के मुताबिक,मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य की बीजेपी सरकार ने भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्यवाही करते हुए वर्ष 2025 में तेज़ी दिखाते हुए,सबसे ज्यादा मामले दर्ज़ किए | इस वर्ष 60 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए और 71 अधिकारी-कर्मचारियों के ख़िलाफ़ वैधानिक कार्यवाही की गई। 

''ACB'' ने वर्ष 2024 में 44 प्रकरणों में 57 लोगों को रिश्वत लेते पकड़ा। वर्ष 2021 और 2022 में मात्र 13-13 प्रकरण दर्ज किए गए।आंकड़े बताते है,कि वर्ष 2021 में 14 और 2022 में 18 अधिकारी-कर्मचारियों के ख़िलाफ़ प्रकरण दर्ज़ किए गए। जबकि,इस दौर में तत्कालीन मुख्यमंत्री "भू-PAY" बघेल और उनकी कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2023 में भ्रष्टाचार को शिष्टाचार में तब्दील कर रिश्वतखोरों के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की |

तस्दीक की जाती है,कि इस वर्षों में बघेल गिरोह के पुलिस सरगना और वर्ष 2005 बैच के आईपीएस शेख़ आरिफ को ''ACB-EOW'' की कमान सौंप दी गई थी | उनकी कार्यप्रणाली के चलते तमाम सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार की जड़े इस कदर जमी की एक से बढ़कर एक कई घोटालों को अंजाम दिया गया था | यही नहीं,''ACB-EOW'' ने पूर्व में दर्ज प्रकरणों में शामिल कई आरोपियों को "रिश्वत" लेकर ही छोड़ दिया | सूत्रों के मुताबिक,इन वर्षों में "वर्क्स डिपार्टमेंट'' में भ्रष्टाचार करने वाले कई "इंजीनियर",प्रमुख अभियंताओं और अन्य अफसरों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों का ही "खत्मा" सुनिश्चित कर दिया था |

तस्दीक की जाती है,कि इन वर्षों में ''ACB-EOW'' को शेख़ आरिफ और उसके गिरोह ने अपने मोटी कमाई का मुख्य स्रोत बना लिया था | हालाँकि,महादेव सट्टा ऑनलाइन एप्प कारोबार में शेख़ आरिफ के अलावा तत्कालीन इंटेलिजेंस चीफ़ 2001 बैच के आईपीएस आनंद छाबड़ा और 2007 बैच के आईपीएस प्रशांत अग्रवाल के ठिकानों में सीबीआई की छापेमारी हुई | जानकारी के मुताबिक,प्रदेश में  ''ACB-EOW'' ने अब भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी मुहिम छेड़ दी है | आंकड़ों में साफ़ किया गया है,कि 28 मई 2026 तक 24 प्रकरणों में 33 लोगों को पकड़ा जा चुका है।

एसीबी के आंकड़ों में रिश्वत मांगने के कारणों में निर्माण कार्यों के भुगतान से जुड़े मामले सबसे अधिक हैं। निर्माण कार्य का भुगतान कराने के एवज में रिश्वत मांगने के 14 प्रकरण दर्ज किए गए। जमीन का सीमांकन, नामांतरण और राजस्व रिकार्ड दुरुस्त कराने के लिए रिश्वत मांगने के आठ-आठ मामले सामने आए। जबकि,मुआवजा राशि दिलाने के लिए छह और पेंशन या ग्रेच्युटी जारी कराने के लिए पांच प्रकरण दर्ज किए गए।

जिलावार आंकड़ों में सूरजपुर 16 प्रकरणों के साथ पहले स्थान पर है। रायपुर में 13, सरगुजा में 12 और रायगढ़ में 11 मामले दर्ज किए गए। मुंगेली और बिलासपुर में 8-8 , जबकि दुर्ग, बलरामपुर और जांजगीर-चांपा में 7-7 प्रकरण दर्ज हुए।''ACB-EOW'' चीफ अमरेश मिश्रा ने एक प्रतिक्रिया में कहा,कि एजेंसी को मिलने वाली शिकायतों की जांच और कार्यवाही के लिए ठोस कदम उठाएं जा रहे है | इसके लिए समय पर त्वरित रिस्पांस ट्रैप टीम गठित की गई है। उन्होंने कहा,कि भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत मिलने पर प्रभावी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी |