रायपुर/दिल्ली : 'प्रोहिबिटेड बोर' (Prohibited Bore) AK-47 से हर्ष फायरिंग (हवाई फायरिंग) करना पूरी तरह से गैरकानूनी है। AK-47 एक श्रेणी का स्वचालित हथियार है,इसका उपयोग केवल विशिष्ट सुरक्षा बलों और पुलिस द्वारा आधिकारिक ड्यूटी या आपात स्थिति में ही किया जा सकता है, उत्सव या प्रदर्शन में इसका इस्तेमाल कानूनन अपराध है।लेकिन,छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से विजय दशमी के दिन स्थानीय पुलिस की शस्त्र पूजा के दौरान सामने आई तस्वीरें और वीडियो ने देशभर में नई बहस को जन्म दे दिया है |

दरअसल,शस्त्र पूजा के दौरान जिले की SP (पुलिस अधीक्षक ) अंकिता शर्मा का एक वीडियो वायरल हो रहा है | इसमें वर्ष 2018 बैच की IPS अंकिता शर्मा बगैर यूनिफार्म सिविल ड्रेस में AK-47 राइफल से धुआंधार फायरिंग करती नज़र आ रही है | उनके हाथ आज़माने के बाद अन्य पुलिस अधिकारी भी बगैर सुरक्षा कवच  AK-47 राइफल से हर्ष फायरिंग करते नज़र आ रहे है |

वीडियो देखे : शस्त्र पूजा में IPS अंकिता शर्मा का दमदार अंदाज, AK 47 से की धड़ाधड़ फायरिंग..

इस वायरल वीडियो ने रायपुर से लेकर दिल्ली तक खलबली मचा दी है | प्रदेश के कमज़ोर कार्यप्रणाली के धनी और अयोग्य DGP अरुणदेव गौतम परंपरागत रूप से इस मामले में जहाँ चुप्पी साधे हुए है,वही सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने भी वीडियो पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधीक्षक के AK-47 राइफल वाले वीडियो को लेकर पुलिस महकमे के भीतर भी अच्छी-खासी बहस छिड़ गई है | दरअसल,प्रदेश के अधिकांश जिलों में विजय दशमी के मौके पर पुलिस ने परंपरानुसार शस्त्र पूजा तो की,लेकिन हर्ष फायरिंग जैसा नज़ारा पूजा-पाठ के दौरान नहीं अपनाया गया | राजनांदगांव जिले से सामने आए इस वाकये के बाद एक बार फिर छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए है |

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के DGP को ''अयोग्य'' करार करते हुए कस्टोडियल डेथ से जुड़े एक प्रकरण में सीबीआई जाँच के निर्देश दिए थे | इस घटनाक्रम के बीते लगभग 6 माह गुजर चुके है,बावजूद इसके राज्य सरकार ने ना तो,DGP को हटाया और ना ही पुलिस की कार्यप्रणाली सुधारने हेतु,कोई ठोस कदम उठाए | बताया जाता है,कि नौकरशाही का एक धड़ा सुप्रीम कोर्ट की टिपण्णी को नज़रअंदाज़ करते हुए,DGP की योग्यता का लोहा मान रहा है,नतीजतन प्रदेश की कानून व्यवस्था काफी बुरे दौर से गुजर रही है |हर्ष फायरिंग पर प्रतिबंध के बावजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा सार्वजनिक परिसर में AK-47 जैसे स्वचालित हथियार से "हर्ष फायरिंग" करने का मामला "प्रदेश के निष्क्रिय" DGP की कार्यप्रणाली से भी जोड़कर देखा जा रहा है | 

छत्तीसगढ़ में वर्दी में अनुशासन ''दूर की कौड़ी'' साबित हो रहा है | कई इलाकों में पुलिस अफसरों के अपराधिकरण से वर्दी में दाग आम हो चले है | महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा घोटाले में लगभग आधा दर्जन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है,उनके ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी के बावजूद इस कारोबार पर अभी तक रोक नहीं लग पाई | तस्दीक की जाती है,कि ऐसे दागी आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करने में पुलिस मुख्यालय फिसड्डी साबित हुआ | यही नहीं,वर्दी में यौन अपराधों में कई आईपीएस अधिकारियों की करतूतों से पुलिस की छवि तार-तार हो रही है | जबकि,मैदानी इलाकों में आए दिन कानून व्यवस्था की उड़ती धज्जियां से मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को बैठे-बिठाएं बीजेपी के खिलाफ एक से बढ़ कर एक मुद्दे हाथ लग रहे है | जानकारों के मुताबिक,पुलिस मुख्यालय की लचर कार्यवाही से आम जनता के साथ साथ पुलिस महकमा भी दो-चार हो रहा है | नतीज़तन,इसका विपरीत असर कानून व्यवस्था पर भी पड़ रहा है |  

जानकारों के मुताबिक,भारत में किसी भी हथियार से सार्वजनिक रूप से खुशी में फायरिंग करना गैरकानूनी अपराध की श्रेणी में है| इस पर रोक लगाने हेतु नियम और कानूनी प्रावधान बनाए गए है| पुलिस या सुरक्षा बलों के जवानों को भी यह हथियार केवल स्पेशल ऑपरेशन, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई या विशेष परिस्थितियों में ही दिए जाते हैं। आर्म्स एंड एम्युनिशन (Arms and Ammunition) मामलों की ख़बर करने में विशिष्ट योग्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार विष्णु सरकार के मुताबिक,प्रोहिबिटेड बोर हथियार AK-47 को आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत 'प्रोहिबिटेड बोर' माना गया है, जिसे आम नागरिक न तो रख सकते हैं और न ही इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। उनके मुताबिक, यदि कोई पुलिसकर्मी या अधिकारी भी अनधिकृत रूप से या उत्सव/हर्ष फायरिंग में ऐसे हथियार का इस्तेमाल करता है, तो उसे तुरंत निलंबित किया जा सकता है और उसके खिलाफ विभागीय या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

उधर,राजनांदगांव जिले से सामने आए वीडियो पर सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ‘टाइनी’ ढिल्लों ने भी कड़ी आपत्ति जाहिर की है,ढिल्लों  भारतीय सेना की श्रीनगर स्थित 15वीं कोर के पूर्व कमांडर और रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के महानिदेशक रह चुके हैं | चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के अधीन इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के उप प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल चुके | सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल  ने अपनी पोस्ट में इस वीडियो में देखने के बाद गंभीर सवाल उठाए है,उनके मुताबिक,हथियार संभालने के तरीके,उसकी दिशा और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर उनकी आपत्ति से छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।उनकी आपत्तियों में साफ़ किया गया है,कि बगैर कोई ठोस सुरक्षा प्रक्रिया का पालन किए "पुलिस के पूजा स्थल" पर हर्ष फायरिंग की गई थी |  

ढिल्लों ने अपनी पोस्ट में कहा है,कि फायरिंग ट्रेनिंग हो या निर्धारित फायरिंग रेंज पर अभ्यास, हथियार चलाने से पहले सुरक्षा क्षेत्र को नियंत्रित करना, चेतावनी संकेत लगाना और यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि अनधिकृत व्यक्ति या जानवर उस क्षेत्र में प्रवेश न करें। निर्धारित परिस्थितियों में लाल झंडों और चेतावनी संकेतों के जरिए भी लोगों को खतरे से आगाह किया जाता है। लेकिन,राजनांदगांव में शस्त्र पूजा में कप्तान साहिबा के द्वारा नियमों की सरासर धज्जियां उड़ाई गईं। सार्वजनिक स्थान पर हथियार के इस्तेमाल के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।उनकी माने तो,वीडियो सामने आने के बाद हथियार संचालन के सुरक्षा मानकों से लेकर पुलिस महकमे की जवाबदेही तक पर सवाल उठ रहे हैं। अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ कैडर की 2018 बैच की छत्तीसगढ़ कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं.रायपुर से सटे भाटापारा में बतौर परीक्षण काल (Probation Period) पहली पोस्टिंग के साथ उन्होंने पुलिस महकमे की कामान संभाली थी | वे रायपुर के आजाद चौक थाने की सीएसपी भी रह चुकी है,उन्हें  मई 2022 में खैरागढ़ का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया था,इस दौरान अंकिता शर्मा को खैरागढ़ की पहली महिला एसपी बनने का गौरव प्राप्त हुआ. उन्होंने नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी ऑपरेशन की कमान भी सफलतापूर्वक संभाली | नक्सल प्रभावित जिलों में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने अपराधियों और नक्सलियों के खिलाफ कई कड़े ऑपरेशन चलाए.जनता के बीच बेहतरीन संवाद कायम किया | पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण से जुड़े प्रकरणों में सख्त प्रशासनिक फैसलों के कारण लेडी सिंघम के नाम से भी उन्हें जाना जाता है|

पुलिसिंग को लेकर अंकिता शर्मा सोशल मीडिया पर सक्रिय और अक्सर चर्चा में रहती हैं.बताया जाता है,कि विजय दशमी के मौके पर आयोजित पूजा अनुष्ठान के दौरान अंकिता शर्मा ने AK-47 राइफ़ल से हर्ष फायरिंग की थी,इस दौरान वे पुलिस वर्दी के बजाए नीली साड़ी पहने नज़र आ रही थी | यह भी बताया जाता है,कि SP साहिबा की हर्ष फायरिंग के तुरंत बाद कई पुलिस अफसरों ने भी उनका अनुसरण करते हुए AK-47 से ख़ूब धांये-धांये किया था | फ़िलहाल, पुलिस अधीक्षक की हर्ष फायरिंग का मुद्दा गरमाया हुआ है,हालाँकि,मामले को लेकर अभी ना तो,पुलिस मुख्यालय और ना ही राज्य के गृह विभाग की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है |