जगदलपुर : - विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरे में इस बार घटनाओं - दुर्घटनाओं और हंगामे की झड़ी लगी हुई है, कई मौंको पर विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकारी पक्ष और ग्रामीणों के बीच तना -तनी की स्थिति निर्मित होती रही। इस कड़ी में बीती रात विजयदशमी पर्व पर निभाई जाने वाली ''भीतर रैनी'' रस्म के दौरान रथ खींचते समय हुए हादसे में एक ग्रामीण की मौंके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे शख़्स का पैर कट गया। उसे उपचार के लिए महारानी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीती रात भीतर रैनी रस्म के दौरान पारंपरिक रूप से जब रथ खींचा जा रहा था। इसी कशमकश के बीच न दो ग्रामीण हादसे की चपेट में आ गए। इनमे से एक ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया है। यहाँ सिविल सर्जन डा संजय प्रसाद ने पीड़ित का पैर कटने की पुष्टि की है। 

गौरतलब है कि देश में सर्वाधिक ''लगभग 45'' दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरे में आदिवासी संस्कृति की झलक नजर आती है। यहाँ रावण का वध नहीं होता बल्कि आदिवासी समुदाय की प्राचीन परम्पराओं का जीता -जागता अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, आदिवासी समुदाय अपने देवी -देवताओं की पूजा - अनुष्ठान से जुडी कई रहस्यमय रीति -रिवाजों का पालन करते है, रात्रि में देवी - देवता शहर भ्रमण कर अपने भक्तों को दर्शन देते है, इस दौरान लाखों लोग सड़को पर उतर कर अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए रतजगा कर आशीर्वाद प्राप्त करते है। लोक -परम्पराओं और लोक वाद्यों की ध्वनि के बीच आदिवासी समुदाय के लोग अपने कुलदेवी और देवताओं के साथ नृत्य कर सदियों पुरानी अनूठी परम्पराओं का निर्वहन करते है। यही कारण है कि इस दशहरे को लेकर उमड़ने वाले जनसैलाब के बीच हादसे और अप्रिय घटनाएं आम हो चली है। बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, आस्था और सामूहिक सहभागिता के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। इस पारंपरिक रस्म के दौरान हुए हादसे से दशहरा में शामिल लोगों के बीच शोक का माहौल है।