
रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ कांग्रेस के चर्चित कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल ने पूछताछ के दौरान अपना मुंह खोल दिया है।उससे एजेंसी की पूछताछ का पहला दौर ख़त्म होते ही,ख़बर आ रही है,कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के गिरेबान पर कभी भी कानून के हाथ पहुँच सकते है। यह भी बताया जा रहा है,कि राम गोपाल के बाद दिल्ली में विकास गर्ग के एजेंसियों के हत्थे चढ़ने से पूर्व मुख्यमंत्री की सांसे फूली हुई है।उनके होश-फ़ाख़्ता और चेहरे पर हवाईयां उड़ने से बघेल की ‘‘चिंता का अंदाज़ा” लगाया जाने लगा है।

जानकारों की माने तो,विकास गर्ग की गिरफ्तारी की ख़बर लगते ही,पूर्व मुख्यमंत्री बघेल अचानक बिलबिलाने लगे|वही जब यह भी पता पड़ा,कि राम गोपाल अग्रवाल की रिमांड अवधि 17 जुलाई के ख़त्म होने से पूर्व मुख्यमंत्री का “बघेल गिरोह” भी एजेंसियों के हत्थे चढ़ने की कगार पर है| ऐसे में इस ”गिरोह” के सरगना का बदलता चेहरा भी सुखियों में बताया जा रहा है |

पूर्व मुख्यमंत्री इस वक़्त दिल्ली में बताए जाते है|यह भी बताया जाता है,एजेंसियों की रुख़ को देखते ही वे जल्द से जल्द दिल्ली से रायपुर उड़ान की तैयारी में है| इस बीच,विधानसभा के गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों में अंदेशा जाहिर किया जा रहा है,कि पूर्व मुख्यमंत्री महादेव एप्प घोटालो में नप सकते है ? बघेल की दिल्ली उड़ान एजेंसियों की सक्रियता से जोड़कर देखी जा रही है |

महादेव एप्प सट्टा घोटाले को लेकर एजेंसियां सक्रिय नजर आ रही है| प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली से EbixCash के चेयरमैन विकास गर्ग को गिरफ्तार कर रायपुर लाया और अदालत में पेश कर 14 दिनों की रिमांड पर ले लिया है| छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री भू-PAY बघेल,उनके सलाहकार रहे विनोद वर्मा,2001,2005 और 2007 बैच के IPS क्रमशः आनंद छाबड़ा,शेख़ आरिफ और प्रशांत अग्रवाल समेत अन्य सट्टा कारोबारियों से विकास गर्ग के करीबी संबंध बताएं जाते है |

उधर,रायपुर में EOW के दफ़्तर में एक अन्य कुख़्यात आरोपी राम गोपाल अग्रवाल से पूछताछ जारी है| EOW की टीम विभिन्न घोटालों और नगद रकम की अफ़रा-तफ़री को लेकर राम गोपाल अग्रवाल से निर्णायक पूछताछ में जुटी है| सूत्र तस्दीक़ करते है,कि राम गोपाल अग्रवाल से पहले दौर की पूछताछ में ही कई ऐसे घोटालों की ”मय सबूत” तस्दीक़ हुई है,जिसके चलते एजेंसियों के हाथ पूर्व मुख्यमंत्री भू-PAY बघेल वल्द नंद कुमार बघेल के गिरेबान तक कभी भी पहुँच सकते है|

यह भी बताया जा रहा है,कि EbixCash के चेयरमैन विकास गर्ग और पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के बीच सौरभ चंद्राकर के माध्यम से बड़ी रकम का लेन-देन तय किया जाता था | यही नहीं,महादेव सट्टा कारोबार का रायपुर में देश का मुख्य ठिकाना बनाने के लिए लगभग आधा दर्जन IPS अधिकारियों को भी बिजनेस पार्टनर बनाया गया था| सट्टा कारोबार को संरक्षण देने के लिए बतौर “प्रोटेक्शन मनी” पुलिस के कई आला अधिकारियों को नगद रक़म देने की बागडोर ASI चंद्र भूषण वर्मा को सौंपी गई थी |
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जानकारी के मुताबिक,हर माह पुलिस अधिकारियों को मिलने वाली रकम का ब्यौरा भी ED के दस्तावेजों में दर्ज बताया जाता है | यह भी बताया जाता है,कि रायपुर और छत्तीसगढ़ के कई जिलों के अलावा दिल्ली,उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में दागी IPS अधिकारियों ने हज़ारों करोड़ की रकम रियल स्टेट कारोबार और जमीनों की ख़रीद-फ़रोख़्त में निवेश की है रायपुर,रायगढ़ और दुर्ग में भी इन अफसरों की बड़े पैमाने पर बेनामी निवेश से जुड़ी शिकायतें एजेंसियों के दफ़्तरों में लंबित बताई जाती है| जबकि,2007 बैच के IPS प्रशांत अग्रवाल के द्वारा वसूली गई रकम उनके नाते-रिश्तेदारों की औद्योगिक ईकाइयों में निवेश बताई जा रही है |

यह भी बताया जा रहा है,कि इन IPS अधिकारियों के अलावा ASP और CSP से लेकर कई स्थानीय थानेदारों का एक बड़ा दस्ता महादेव एप्प सट्टा कारोबार से “प्रोटेक्शन मनी” वसूल रहा था| ED की फाइलों में ASI चंद्र भूषण वर्मा का नाम उन मुख्य गवाहों की सूची में दर्ज बताया जाता है,जिन्होंने,सट्टा संचालन और “प्रोटेक्शन मनी” से जुड़ी रक़म पुलिस महकमें के जिम्मेदार अधिकारियों के ठिकानों तक पहुंचाई थी |

यह भी तस्दीक की जाती है,कि पुलिस अधिकारी चंद्र भूषण वर्मा के ED के हत्थे चढ़ते ही राज्य के तत्कालीन ख़ुफ़िया प्रमुख आंनद छाबड़ा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल के आवास पर लगे सभी CCTV फ़ुटेज और कंप्यूटर समेत अन्य डिजिटल डाटा नष्ट करवा दिया था| जबकि,IT-ED समेत अन्य जाँच एजेंसियों के अधिकारियों की जासूसी के लिए ख़ुफ़िया तंत्र का बेजा इस्तेमाल तत्कालीन IG रायपुर शेख़ आरिफ़ और ख़ुफ़िया प्रमुख आनंद छाबड़ा द्वारा किया जा रहा था | ED ने अपनी चार्जशीट में दागी अफसरों की भूमिका का भी हवाला दिया है | इसमें ख़ुफ़िया के अन्य निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों के नाम भी दर्ज बताए जाते है |
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सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अधिकारी चंद्र भूषण वर्मा के मुख्यमंत्री आवास में आवाजाही से जुड़े इस डिजिटल डाटा में ऐसे कई सबूत बताए जाते है,जो मोटी रक़म के ठिकाने लगाए जाने से सम्बन्धित है|महादेव ऐप सट्टा मामले में अब तक आधा सैंकड़ा से ज़्यादा आरोपी जेल की हवा खा चुके है| इसमें से लगभग सभी जमानत पर रिहा है|

इस मामले में जहाँ मुख्य आरोपियों में से एक पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की गिरफ़्तारी का मामला अब तक अधर में लटका नजर आ रहा है| वही, अदालत में दाखिल सीबीआई की नई चार्जशीट जितने गुनाहों के तथ्यों को उजागर कर रही है,उससे कहीं ज्यादा सवाल विवेचना को लेकर सुर्ख़ियों में है|

जानकारों के मुताबिक,मार्च 2025 में सीबीआई ने छत्तीसगढ़ समेत 60 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी। जांच में अवैध सट्टा नेटवर्क को संचालित करने के कुछ-एक पुलिस अधिकारियों को हर महीने बाकायदा ”प्रोटेक्शन मनी” मुहैया कराने का जो दस्तावेज सामने आया था, उसमें आईपीएस आरिफ शेख, आनंद छाबड़ा, अभिषेक पल्लव, पूर्व एएसपी संजय ध्रुव और पुलिस अधिकारी अभिषेक माहेश्वरी सहित कई अधिकारियों के ठिकानों पर भी तलाशी और छापेमारी का घटना क्रम सामने आया था |

माना जा रहा था, कि जांच अब सिस्टम की सबसे ऊंची जांच एजेंसी के टेबल तक पहुंच गया है | लेकिन,CBI ने इन अधिकारियों की भूमिका को लेकर अब तक अपना रुख़ साफ़ नहीं किया है| ED के दस्तावेज बताते है,कि दोहरे प्रभार वाले डॉ. आनंद छाबड़ा के लिए ₹20 लाख प्रतिमाह, शेख आरिफ हुसैन, प्रशांत अग्रवाल, और अभिषेक पल्लव के लिए ₹10-10 लाख प्रतिमाह, संजय ध्रुव के लिए ₹5 लाख तथा अभिषेक माहेश्वरी के लिए ₹35 लाख प्रतिमाह बतौर “प्रोटेक्शन मनी” नगद रक़म सौंपी जाती थी |

रायपुर से लेकर दिल्ली तक राजनैतिक गलियारों में CBI की कार्यप्रणाली की चर्चा जोरों पर है,दावा किया जा रहा है,कि कई गंभीर आरोपों और दस्तावेज़ों के आधार पर सीबीआई ने दागी पुलिस अधिकारियों के ठिकानों पर दबिश दी थी।लेकिन,अब जब सीबीआई की नई चार्जशीट सामने आई, तो जिन अधिकारियों के यहां दबिश दी गई, उनका उल्लेख चार्जशीट से नदारद है ? सवाल उठ रहा है,कि बघेल और उसकी टोली के खिलाफ अभियोजन योग्य साक्ष्य विवेचना के दौरान नहीं मिले ? यही नहीं,क्या जांच का यह हिस्सा अभी खुला हुआ है ? बघेल और उसके गिरोह की गिरफ़्तारी के बाद पूरक चार्जशीट की संभावना है ?

फ़िलहाल,महादेव एप्प सट्टा घोटाले में अब सौरभ चंद्राकर की राह देख रही एजेंसी का अगला कदम क्या होगा ? इस ओर लोगों की निगाहें लगी हुई है |
पूर्व सीएम के चेहरा देखने लायक,क्यो उड़ी हवाइयाँ ? ED-EOW और CBI की आहट से होश फ़ाख्ता..






