
दिल्ली/रायपुर :छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में “नकटी कांड” सुर्ख़ियों में है| राज्य की बीजेपी सरकार और विस्थापित ग्रामीणों को भड़का कर,कांग्रेस के हाथों गैर ज़रूरी मुद्दा थमाने के पीछे आख़िर कौन-कौन किरदार भूमिका में है,अब उसका भी खुलासा हो गया है| रियल स्टेट कारोबारियों के एक ”WHATSAPP” ग्रुप की “लीक चैट” ने बीजेपी सरकार की छत्र-छाया में पल रहे आस्तीन के सांपों की करतूतों का बड़ा खुलासा किया है|

सूत्रों के मुताबिक,एक महत्त्वपूर्ण चैट,चर्चित बिल्डर के मोबाइल से एक अन्य ग्रुप में भेजी गई थी,जिसे भूलवश-गलती से करार देकर “DELETE” किया गया था | हालांकि,जब तक “पैग़ाम” डिलीट होता,तब तक ”WHATSAPP” ग्रुप के कुछ सदस्य उसे अन्य कारोबारी ग्रुप में साझा कर चुके थे| चूंकि, ”WHATSAPP CHAT” में दो IPS अधिकारियों और एक तहसीलदार से जुड़ी दास्तान दर्ज़ थी |लिहाज़ा, ”WHATSAPP’‘ ग्रुप के एडमिन ने फौरी तौर पर उसे “DELETE” करना ही मुनासिब समझा|

हालाँकि,इस ग्रुप एडमिन की नाकाम कोशिशों के बावजूद,नकटी का सच,राजनैतिक गलियारों में चर्चा में है| रियल स्टेट करोबारियों की जुबान में एक IPS अधिकारी के फार्महाउस में आयोजित गोपनीय बैठक और ”नकटी कांड” कनेक्शन पर बड़े सवाल सामने आए है | हालांकि,न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ इस वायरल “चैट” की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता| सोशल मीडिया में ये चैट अब ज़ोर-शोर से डिलीट कराए जाने की सूचनाएं भी प्राप्त हो रही है| इस चैट पर भरोसा करे,तो ग्राम नकटी में बुलडोजर कार्यवाही सुनिश्चित होने के एक दिन पहले आरंग ब्लॉक के अमेठी गांव में स्थित एक फार्म हॉउस में बाकायदा बुलडोज़र कार्यवाही का खांका खींच कर उसके राजनैतिक इस्तेमाल का सुनियोजित प्लान तैयार किया गया था |

इस चैट में दावा किया गया है, IPS अफसर शेख़ आरिफ़ के फार्म हाउस में खासतौर पर ऐसे रियल स्टेट कारोबारियों का जमावड़ा लगा था,जिनके बहुप्रतीक्षित लग्जरी बंगलों के ”ड्रीम प्रोजेक्ट” की कामयाबी छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के ”नकटी प्रोजेक्ट” के अस्तित्व में आने पर ही टिकी है | दावा किया जा रहा है,कि नकटी ग्राम के इर्द-गिर्द कई कांग्रेसी नेताओं,रियल स्टेट कारोबारियों और प्रभावशील कारोबारी अफसरों ने सैंकड़ों एकड़ जमीनों पर अपना कब्जा जमाया हुआ है| सरकारी-गैर सरकारी और मठ-मंदिरों के नाम दर्ज बेशकीमती जमीनें और गांव के छोटे बड़े चारागाह की सैंकड़ों एकड़ विवादित जमीनों पर इन दिनों प्राइवेट बिल्डरों के हॉउसिंग प्रोजेक्ट की बयार बह रही है |नकटी में कब्जा और हाउसिंग बोर्ड के प्रोजेक्ट के जरिए लाभ कमाना उनका मुख्य ध्येय बताया जाता है |

चैट बताती है,कि रायपुर जिला प्रशासन और ”NRDA” भरी बारिश के मौसम नकटी के ग्रामीणों के विस्थापन मामले से परहेज़ बरत रहा था| लेकिन,2 IPS अधिकारियों के साथ भू-माफियाओं की सांठ-गांठ ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया|ऐसे भू-माफिया के प्रोजेक्ट को रास्ता देने की साज़िश से जुड़कर अब नकटी कांड की नई परते सामने आ रही है|
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छत्तीसगढ़ कैडर के विवादित IPS शेख आरिफ़ के फार्म हाउस में बनी ‘नकटी कांड’ की पूरी पटकथा इस चैट में दर्ज़ बताई जाती है| सूत्रों से मिली एक ताज़ा जानकारी के मुताबिक,राजनैतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है,कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार को बदनाम करने की नीयत से “नकटी कांड” को अंजाम दिया गया था | इसके सूत्रधार और कोई नहीं बल्कि,पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के रणनीतिकार 2 IPS अधिकारी इस साज़िश के मुख्य कर्ता-धर्ता बताए जाते है|

यह भी बताया जाता है,कि शेख़ आरिफ़ के एक कृपापात्र तहसीलदार ने शासन-प्रशासन को गुमराह कर इस साज़िश में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी |राजनैतिक गलियारों में चर्चा है,कि आरंग ब्लॉक के अमेठी गांव में स्थित एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के कब्जे वाले ”फार्म हाउस” में नकटी गांव को भरी बारिश में ही उजाड़ने की रूप-रेखा तय की गई थी |

सूत्रों का दावा है,कि इस चैट पर यकीन करे तो,इस बैठक में लगभग आधा दर्ज़न बड़े बिल्डर और कथित भू-माफ़िया के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के 3 करीबी कारोबारी नेता शामिल थे| लेकिन,इस बैठक में क्रमशः 2005 बैच के IPS शेख़ आरिफ और 2001 बैच के आनंद छाबड़ा की भी मौज़ूदगी चौंकाने वाली बताई जाती है| नकटी गांव में ग्रामीणों के जबरिया कब्जे मामले में प्रशासन की वैधानिक कार्यवाही को कांग्रेस ने मुद्दा बनाकर आंदोलन शुरू कर दिया है| उसके कई नेता बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और साय सरकार पर हमलावर रुख अपना रहे है| चैट में सामने आई प्रतिक्रिया में कुछ एक सदस्यों ने यह भी दावा किया है,कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को बदनाम करने की कवायत में शेख आरिफ और आनंद छाबड़ा एक बार फिर ज़ोर-शोर से जुट गए है| उनके बुलावे पर ही,यह रणनीतिक बैठक आयोजित की गई थी| इसका मुख्य ”एजेंडा” कांग्रेस को सक्रिय करने से जुड़ा बताया जाता है |

यह भी बताया जाता है,कि विधान सभा के मानसून सत्र से ठीक पहले आयोजित यह बैठक पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की पुनर्लोंचिंग से जुड़ी बताई जाती है| उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाना इस बैठक का मुख्य हिस्सा बताया जाता है| सूत्रों के मुताबिक,चैट में उस तहसीलदार का हवाला भी दिया गया है,जिसे ”NRDA” और जिला प्रशासन में तैनात वरिष्ठ और जिम्मेदार अधिकारियों को गुमराह करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी| प्रस्तावित अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही भरी बारिश के मौसम में अंजाम देने के कारण भी गिनाए जा रहे है | नकटी कांड की जड़े नौकरशाही की नींव में जड़ी नज़र आने से मामले ने अब तूल पकड़ लिया है |

नई राजधानी नवा रायपुर से सटे आरंग में महानदी के किनारे बसे अमेठी गांव में स्थित लगभग 10 एकड़ ( 7 एकड़ कथित भूमि स्वामी + 3 एकड़ चारागाह) की जमीन में फ़ैला फार्म हाउस का मालिकाना हक शेख़ आरिफ़ का बताया जाता है| यह भी बताया जाता है,कि बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री साय से नाराज़ चल रहे ये दोनों ही IPS अधिकारी सहपत्निक अमेठी फार्म हॉउस बैठक में शामिल हुए थे| जानकारी के मुताबिक, IPS शेख़ आरिफ़ की पत्नी शम्मी आबिदी 2007 बैच की IAS,जबकि आनंद छाबड़ा की पत्नी शालिनी रैना 2001 बैच की IFS अधिकारी बताई जाती है|

यह भी बताते है,कि इन्हें राज्य सरकार ने मलाईदार प्रभार से हटा कर नई विभागीय पदस्थापना के आदेश हाल ही के महीनों में जारी किए थे| इसके बाद से पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के करीबी अफसरों का पारा चढ़ा गया है| जानकारी के मुताबिक,दोनों ही विवादित IPS अधिकारियों की कार्यप्रणाली गंभीर कदाचरण और बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ राजनैतिक साजिशों को अंजाम देने की क़वायतों से जोड़कर देखी जा रही है|

नवा रायपुर के आख़िरी हिस्से लेयर-3 पर बसे नकटी गांव की एक बस्ती को स्थानीय प्रशासन ने हालिया नेस्तनाबूत कर दिया था | इस कार्यवाही के बाद बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने है| जबकि,भरी बारिश ग्रामीणों का घरोंदा उजाड़ने के मामले को लेकर ”NRDA” और ज़िला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगली उठ रही है| हालांकि,खदेड़े गए ग्रामीणों की जमीनों और बसाहट को लेकर शासन ने अपना तर्क दिया है| उसकी दलील है,कि मात्र 85 लोगों ने 35 एकड़ से अधिक भूमि पर गैर कानूनी रूप से कब्जा कर बड़े पैमाने पर सरकारी जमींन पर निर्माण कार्य कराया था| उसकी मानें तो,सालभर पहले से प्रभावित ग्रामीणों को नोटिस जारी किए जा रहे थे| उसका दावा है,कि सरकारी ज़मीन को अतिक्रमण मुक्त करने से पूर्व प्रभावित ग्रामीणों को नए इलाके में बसाया गया है |

इस बीच विस्थापित परिवारों का कहना है कि जहां उन्हें सेक्टर-30 में फ्लैट दिए गए हैं,वहां न तो बिजली है,और ही दैनिक रोजगार की कोई व्यवस्था है|उनका दावा यह भी है,कि स्कूल खुलते ही कई बच्चे शिक्षा से वंचित हो गए,ऊपर से रोजी-रोटी छिन गई है|बताया जाता है,कि ज्यादातर विस्थापित श्रमिक-मज़दूर है,उनके कब्जे में सामान्य घरेलू उपयोग और रहवास के लिए आवश्यकतानुसार थोड़ी बहुत ( 1500-2000 SQUFT ) के बजाए एकड़ में ( 44000 हज़ार SQUFT ) ज़मीन पर काबिज़ थे|
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विस्थापितों का यह भी कहना है कि जिन फ्लैटों में उन्हें भेजा जा रहा है, वे उनके परिवार के हिसाब से बेहद छोटे हैं,परिवार में अधिक सदस्यों बुजुर्ग माता-पिता और सास-ससुर का वहां जीवन यापन कैसे होगा ? उनके मुताबिक,बगैर लिफ्ट वाले फ़्लैट की चौथी मंजिल पर रहने का बंदोबस्त उनके लिए नई परेशानी बन गई है| राजनैतिक गलियारों में “नकटी कांड” ने कांग्रेस के उन नेताओं की कलई खोल कर रख दी है,जिन्होंने नई राजधानी समेत आस-पास के गांव में गैर क़ानूनी रूप से सैंकड़ों एकड़ सरकारी ज़मीन पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है | इन इलाको में ग्राम नकटी से लेकर आरंग के दर्जनों गांव तक का बड़ा हिस्सा शामिल बताया जाता है |

सूत्रों का यह भी दावा है,कि ”NRDA” और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके की नज़ाकत को देखते हुए,बुलडोजर कार्यवाही से बचने के तमाम पहुलओं पर जोर दे रहे थे| वे बारिश के मौसम में ग्रामीणों की बस्ती उजाड़ने के पक्षधर भी नहीं थे | बावजूद इसके साधारण तौर पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही नकटी कांड के रूप में सामने आई है | इस पूरे मामले को राजनैतिक रंग देने की कवायत भी जोरों पर जारी बताई जाती है | दावा किया जा रहा है,कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के रणनीतिकार ”IPS लॉबी” ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है| चर्चा है,कि बीजेपी सरकार से नाराज़ चल रहे विवादित अफसर अब पर्दे के पीछे से नई पटकथा लिख रहे है,पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक राजनैतिक मुहिम को जमीनी धरातल में उतार रहे है |

बताते है,कि नकटी कांड में अब वो सब कुछ हो रहा है,जो अमेठी गांव के कथित फार्म हाउस में तय किया गया था| राज नेताओं और बिल्डरों से जुड़े एक सोशल नेटवर्क WHATSAPP ग्रुप में नकटी कांड के रहस्यों पर से हटा पर्दा बीजेपी सरकार को आगाह करने के मामले से जोड़कर देखा जा रहा है| सूत्र दावा करते है,कि बिल्डरों ने इस ग्रुप की चैट में शासन-प्रशासन को गुमराह करने की कवायत में चर्चित तहसीलदार की प्रशंसा भी की है|बताते यह भी है,कि कांग्रेस कार्यकाल में ACB-EOW की कमान शेख़ आरिफ़ के हाथों में दी गई थी| इस दौरान भ्रष्टाचार के एक मामले में लपेटे में आए,इस तहसीलदार को अब शेख़ आरिफ़ के पारिवारिक मित्रों में गिना जाने लगा है| कथित पुलिस अफसर के इस फार्म हाउस की देखभाल के अलावा विवादित
संपत्ति में निवेश की जवाबदारी भी इसी तहसीलदार के कंधों पर बताई जाती है |

छत्तीसगढ़ में कांगेस की तत्कालीन बघेल सरकार के कार्यकाल में महादेव एप्प सट्टा घोटाले समेत अन्य कई अपराधों में आनंद छाबड़ा और शेख़ आरिफ के खिलाफ कई सबूत सामने आए थे| उनके ठिकानों पर CBI ने छापेमारी भी की थी,लेकिन जाँच में क्या तथ्य सामने आए ? इसका खुलासा अब तक नहीं हो पाया है| पुलिस महकमे में विवादित कार्यप्रणाली के लिए कुख्यात दोनों ही IPS अधिकारियों के बारे में यह भी दावा किया जा रहा है,कि वे अपने कार्यालयीन समय में विभागीय कार्यों के बजाए महकमे में गतिरोध उत्पन्न करने और नौकरशाही के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री की राजनीति चमकाने के मामले में ज़्यादा जोर दे रहे है |

बीजेपी सरकार से उनकी नाराजगी के कई कारण भी बताए जा रहे है| वे मानते है,कि उनकी तर्ज़ पर,उनकी पत्नियों को भी विशेष मलाईदार विभाग से स्थानांतरित कर साय सरकार ने प्रभावहीन विभाग की बागडोर सौंप दी है ?उधर, नकटी कांड को राजनैतिक रंग में तब्दील करने का फ़ॉर्मूला अब बेअसर साबित होने लगा है,हकीकत सामने आने के बाद जहाँ बेजा कब्जाधारियों का आंदोलन कमजोर पड़ने लगा है,वही अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासनिक कार्यवाही से रियल स्टेट कारोबारियों में हड़कंप मच गया है|भू-माफियाओं को अब उनके कब्जे से सरकारी जमीन खिसकने का डर सताने लगा है| इधर,नकटी में राज्य सरकार ने वैधानिक कार्यवाही को जायज़ ठहराते हुए,नकटी इलाके के आस-पास नेताओं के बेजा कब्ज़े की जाँच भी शुरू कर दी है|

जबकि,पूर्व मुख्यमंत्री के बीजेपी के खिलाफ आंदोलन की भी हवा निकलने लगी है, हालांकि, इस प्रकरण ने दागी नौकरशाहों के रवैये और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए है| ‘नकटी कांड” में जारी प्रशासनिक कवायत के बीच राजनैतिक दमख़म दिखाने में व्यस्त दागी IPS अफसरों की फार्म हॉउस ”बैठक” सोशल मीडिया में ख़ूब सुर्खियां बटोर रही है|इसके साथ ही राजनैतिक रंग में रंगे ऐसे विवादित IPS अधिकारियों को ”कम्पल्सरी रिटायरमेंट” देने की मांग भी अब शुरू हो गई है| न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ ने अमेठी फार्म हाउस और यहाँ आयोजित बैठक को लेकर IPS शेख़ आरिफ और IPS आनंद छाबड़ा से संपर्क किया, लेकिन कोई प्रतिउत्तर नहीं मिला |







