
जम्मू/कश्मीर : भारत के अहम जोजिला सुरंग प्रोजेक्ट में आज मंगलवार (9 जून) को एक बड़ा पड़ाव आया। जोजिला दर्रे के ठीक नीचे स्थित निर्माणाधीन इस सुरंग में अहम ब्रेकथ्रू हासिल किया गया। केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में कारगिल की तरफ खुलने वाले इस सुरंग के हिस्से पर ब्लास्टिंग (धमाकों) का आखिर राउंड पूरा कर लिया गया। यानी सुरंग से आखिरी ब्लॉक हटने के बाद अब जोजिला सुरंग का निर्माण और तेज होते हुए अपने अंतिम चरण तक पहुंच गया है।

जोजिला दर्रे पर बन रही इस अहम सुरंग के निर्माण का इतिहास करीब एक दशक पुराना है। यूं तो इसका अधिकतर काम मोदी सरकार में ही हुआ है, लेकिन इसकी योजना को आधिकारिक तौर पर मंजूरी 2013 में ही मिल गई थी। मेघा इंजीनियरिंग ने 1 अक्तूबर 2020 से परियोजना पर काम शुरू किया और 14 अक्टूबर 2020 को पहली ब्लास्टिंग (विस्फोट) की गई। हिमालय के बेहद नाजुक भूविज्ञान, भूस्खलन के खतरे और जमा देने वाले तापमान (शून्य से 35 डिग्री नीचे तक) जैसी विषम परिस्थितियों से जूझते हुए इंजीनियरों ने काम जारी रखा। आखिरकार अब इस सुरंग का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

सुरंग कहां से कहां तक स्थित है?
जोजिला सुरंग जम्मू और कश्मीर में सोनमर्ग के पास बालटाल से लेकर लद्दाख में द्रास के पास मीनमर्ग तक स्थित है। यह सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग-1 (एनएच-1) पर जोजिला दर्रे के ठीक नीचे बनाई जा रही है। 13.15 किलोमीटर लंबी यह महत्वपूर्ण सुरंग सीधे तौर पर कश्मीर घाटी को लद्दाख क्षेत्र से जोड़ती है। यह राजमार्ग लद्दाख, सियाचिन ग्लेशियर और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात भारतीय सैनिकों के लिए प्राथमिक आपूर्ति मार्ग है। सुरंग के बन जाने से सेना और सैन्य साजो-सामान की आवाजाही बिना किसी मौसमी रुकावट के पूरे साल हो सकेगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम पड़ाव होगा।

मौजूदा समय में सोनमर्ग और मीनमर्ग (या बालटाल से मीनमर्ग) के बीच के पहाड़ी दर्रे को पार करने में कई घंटे लगते हैं। सुरंग के पूरी तरह चालू होने के बाद यह 13.15 किलोमीटर लंबी यात्रा केवल 15 से 40 मिनट के भीतर पूरी की जा सकेगी। मौजूदा पहाड़ी मार्ग बेहद दुर्गम और खतरनाक है, जहां भूस्खलन और खराब मौसम के कारण अकसर जानलेवा दुर्घटनाएं होती हैं। आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों से लैस इस सुरंग के बनने से यात्रा बहुत अधिक सुरक्षित हो जाएगी और दुर्घटनाओं की संभावना न के बराबर रह जाएगी। साल भर कनेक्टिविटी रहने से इस क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे और कठोर सर्दियों के दौरान होने वाले पलायन को रोका जा सकेगा।







