
रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। कांग्रेस ने इस मामले पर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक सदन के गर्भगृह में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नियमों के तहत सभी विपक्षी विधायक स्वमेव निलंबित हो गए।

शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि नकटी गांव में जिन 85 मकानों को हटाया गया, उनमें कई प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घर भी शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित परिवारों को जो वैकल्पिक आवास दिए जा रहे हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं और पुनर्वास की व्यवस्था पहले सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर गरीब परिवारों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि यदि विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए गरीबों के मकान तोड़े गए हैं, तो यह उचित नहीं है। इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यदि विधायक कॉलोनी निर्माण से जुड़े कोई दस्तावेज हैं, तो उन्हें सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए।

सरकार की ओर से जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि नकटी में की गई कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप थी। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण की शिकायत मिलने के बाद अतिरिक्त तहसीलदार ने जांच की थी। जांच में अवैध कब्जे की पुष्टि होने पर वर्ष 2025 में बेदखली का आदेश जारी किया गया और 28 जून को नियमानुसार कार्रवाई की गई।

मंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को पहले ही नोटिस देकर अपना सामान हटाने का समय दिया गया था। साथ ही सेक्टर-30, नवा रायपुर में पुनर्वास के लिए फ्लैट उपलब्ध कराए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई के दौरान किसी के घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया और यह दावा भी सही नहीं है कि तोड़फोड़ के समय बारिश के कारण लोगों को अतिरिक्त परेशानी हुई।राजस्व मंत्री के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इससे नाराज कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। सदन की कार्यवाही बाधित होने पर विधानसभा के नियमों के अनुसार सभी विपक्षी विधायक स्वतः निलंबित हो गए।






