
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 105 वर्षीय हत्या के दोषी रसिक चंद्र मंडल को बड़ी राहत दी। अदालत ने उनकी अत्यधिक उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए उम्रकैद की बची हुई सजा माफ कर दी और 2024 में दी गई उनकी अंतरिम जमानत को अंतिम रूप दे दिया। इसके साथ ही अब उन्हें दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि उनकी मौजूदा उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
रसिक चंद्र मंडल का जन्म पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1920 में हुआ था। साल 1994 में उन्हें एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र करीब 68 वर्ष थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सजा को चुनौती दी। साल 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली।
99 साल की उम्र में मांगी थी रिहाई
उम्र के 99वें साल में रसिक चंद्र मंडल ने अपनी बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की मांग की। मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था। बाद में 29 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी। अब अपने ताजा आदेश में अदालत ने उस अंतरिम राहत को अंतिम रूप दे दिया है और उनकी उम्रकैद की शेष सजा माफ कर दी है। इस फैसले के बाद 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल जेल से बाहर रह सकेंगे और अपनी बाकी जिंदगी स्वतंत्र रूप से बिता सकेंगे।





