
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को भुवनेश्वर स्थित राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइसर) के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वैज्ञानिक क्षमता कोई विकल्प नहीं, बल्कि उसकी बुनियाद है। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों से विज्ञान और नवाचार को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करने तथा सत्यनिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
विज्ञान को नीति-निर्माण का मार्गदर्शक बनाने पर जोर
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, उभरती बीमारियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत सामग्रियों जैसी चुनौतियों और अवसरों के दौर में विज्ञान की भूमिका केवल ज्ञान सृजन तक सीमित नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि विज्ञान को नीति-निर्माण का मार्गदर्शन करना चाहिए और दीर्घकालिक एवं टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना चाहिए।
‘विकसित भारत’ के लिए वैज्ञानिक क्षमता जरूरी
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत जैसी विशाल जनसंख्या और विकास की आकांक्षाओं वाले देश के लिए वैज्ञानिक क्षमता विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासा, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ विज्ञान को समाज के हित में उपयोग करने का आग्रह किया।
नाइसर की उपलब्धियों की सराहना
उपराष्ट्रपति ने नाइसर को विज्ञान, नवाचार और बौद्धिक नेतृत्व का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह संस्थान ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रगति के लिए उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक तैयार कर रहा है। उन्होंने नाइसर के पूर्व छात्रों की भी सराहना की, जो देश और विदेश में अनुसंधान एवं शिक्षा के क्षेत्र में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
भारत विज्ञान और नवाचार में तेजी से आगे बढ़ रहा
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अभियानों, वैक्सीन विकास, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों ने देश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने स्नातकों से महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने तथा अपने अनुसंधान को समाज के व्यापक हित से जोड़ने का आग्रह किया।
होमी भाभा को किया याद
उपराष्ट्रपति ने भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका निधन देश के परमाणु अनुसंधान के लिए बड़ा झटका था। उन्होंने अपने बचपन की स्मृति साझा करते हुए कहा कि उन्हें वह दिन आज भी याद है जब उनके पिता ने उन्हें डॉ. भाभा के निधन की जानकारी दी थी।
परमाणु अनुसंधान में भारत की वैश्विक पहचान
राधाकृष्णन ने कहा कि उस कठिन दौर के बावजूद भारत ने दृढ़ता से आगे बढ़ते हुए परमाणु अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नाइसर से स्नातक होने वाले अनेक विद्यार्थी भविष्य के डॉ. होमी भाभा बनकर देश की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
गणमान्य अतिथियों की रही मौजूदगी
समारोह में ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव एवं नाइसर के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती, नाइसर के निदेशक प्रो. एच.एन. घोष सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षक, छात्र और अभिभावक उपस्थित रहे।





