सकारात्मक पत्रकारिता का अर्थ कठिन सच छुपाना नहीं, बल्कि संतुलित चित्र पेश करना है। स्थानीय नायक और सामुदायिक प्रयास प्रेरणा देते हैं।
पाठक जब आशा देखते हैं तो बदलाव में भागीदार बनते हैं। संपादकीय नीति में विविध आवाज़ें जगह पाएँ तो लोकतंत्र मजबूत होता है।
बोधवृक्ष इसी दिशा में निरंतर प्रयास करता रहेगा।
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