बिलासपुर : - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे हैं। इस दौरान संघ के संगठनात्मक विस्तार, कार्यपद्धति और आगामी योजनाओं को लेकर बैठकों का दौर जारी है। खास बात यह रही कि मोहन भागवत गोंडवाना एक्सप्रेस के बजाय इंटरसिटी एक्सप्रेस से बिलासपुर पहुंचे। प्रवास के पहले दिन कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित बौद्धिक सत्र में उन्होंने संघ और स्वयंसेवकों के संबंधों को समझाते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। जिस तरह ऑक्सीजन और हाइड्रोजन मिलकर पानी बनाते हैं, उसी तरह संघ और स्वयंसेवक मिलकर समाज निर्माण का कार्य करते हैं। उन्होंने सामाजिक समरसता, राष्ट्रसेवा और समाज के प्रति स्वयंसेवकों के दायित्व पर जोर देते हुए कहा कि स्वयंसेवकों का उद्देश्य समाज से कुछ लेना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए योगदान देना है।
छत्तीसगढ़ में संघ के नए संगठनात्मक मॉडल पर चर्चा
मोहन भागवत के इस प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित करने और कामकाज को विकेंद्रीकृत करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो रही है। बैठकों में रायपुर, बिलासपुर सहित विभिन्न संभागों के प्रांतीय प्रचारकों, विभागीय पदाधिकारियों और आनुषंगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं। वनांचल क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने, संघ के वैचारिक कार्यों के विस्तार और आगामी अभियानों की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रस्तावित मॉडल के तहत राज्य में दो संभागीय इकाइयों के गठन और प्रत्येक इकाई में लगभग 22 पदाधिकारियों की कार्यकारिणी तैयार करने की योजना बताई जा रही है। इसमें संभाग संघचालक, कार्यवाह और बौद्धिक प्रमुख जैसे पद शामिल हो सकते हैं। पदाधिकारियों की नियुक्ति और औपचारिक घोषणा संघ की आगामी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में किए जाने की बात कही गई है, जो अगले वर्ष अप्रैल-मई के बीच प्रस्तावित है। हालांकि, संगठनात्मक बदलावों और नियुक्तियों को लेकर अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

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