रायपुर : छत्तीसगढ़ की नौकरशाही में 'एक से भले दो पत्नी' का फॉर्मूला कई IAS,IPS और IFS अफसरों के सिर चढ़ कर बोल रहा है ? राज्य में खासतौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के लगभग सभी कैडरों में अंदरखाने "बहुपत्नी" का चलन आम हो गया है ? नौकरशाही में पति-पत्नी और ''वो" का साया इस कदर मंडरा रहा है,कि कई IAS-IPS और IFS अफसरों की निजी जिंदगी में मचे कोहराम से "जनहित" के कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे है | मंत्रालय हो या कलेक्टर साहब का दफ़्तर,पुलिस मुख्यालय हो या फिर घने जंगल में स्थित थाने और पुलिस चौंकियाँ,अफसरों की रंगीन मिज़ाजी से शासन-प्रशासन के कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हो रहे है,इसका सीधा खामियाज़ा ना केवल आम जनता को बल्कि,पीड़ित परिवारों को भी भोगना पड़ रहा है |

यह भी बताया जाता है,कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के विभिन्न संवर्गों के कई अफसरों में नियमानुसार "एक" विवाहिता पत्नी के होते हुए,देश-काल परिस्थितिनुसार बहुपत्नी का दामन थाम लिया है | प्रदेश में नौकरशाही के इस नए ‘फैमिली फॉर्मूलें' से कई घर-परिवारों में कोहराम मचा हुआ है | "डबल इंजन" या पति-पत्नी और ''वो" की राह पर चल पड़े ऐसे अफसरों ने सिविल सेवा कोड ऑफ कंडक्ट की हिदायतों को ना केवल रद्दी की टोकरी में डाल दिया है,बल्कि अदालती फरमानों को भी हवा में उड़ा दिया है | प्रशासनिक गलियारों में दावा किया जा रहा है,कि सुशासन की बेला में "फ़ील गुड" के लिए ‘साहब’ का डबल इंजन कनेक्शन तनाव दूर करने के लिए सिर्फ सहायक ही नहीं,बल्कि कारगर साबित हो रहा है | इस अवसर का लाभ उठा चुके कई तजुर्बेकार वरिष्ठ अफसरों की दलील है,कि नौकरी में पत्नी से एक मात्र रिश्ते कब डबल रोल में तब्दील हो जाते है,इसका पता तक नहीं लगता |

बताया जाता है,कि कई चर्चित IAS-IPS के बाद अब एक IFS साहब ‘एक से भले दो’ के फॉर्मूले पर बेनकाब हो गए है,मामला इतना तूल पकड़ा,कि अदालत को पीड़ित पत्नी के पालन-पोषण के लिए दिशा-निर्देश जारी करने पड़े है,लेकिन तस्दीक की जा रही है,कि कानूनी फरमानों को साहब ने "सिगरेट" के धुएं की तर्ज़ पर हवा में उड़ा दिया है | घरेलू हिंसा की शिकार पीड़ित पत्नी ने अपने IFS पति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है | उसने सोशल मीडिया में अपनी गुहार लगाते हुए, छत्तीसगढ़ शासन से वैधानिक कार्यवाही की मांग की है| पीड़ित पत्नी ने अदालत के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए,अपने पति के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज करने की मांग की है |


हालाँकि,चर्चा में आए एक IFS और उनकी पत्नी से जुड़ा विवाद पूर्णत: निजी और पारिवारिक बताया जा रहा है | लेकिन,सोशल मीडिया में अदिति सिंह की "गुहार" जिस तर्ज पर गूंज रही है,उसे लेकर यूजर्स की तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है,इसमें तस्दीक की जा रही है,कि सिर्फ वन महकमा ही नहीं, प्रदेश के पुलिस मुख्यालय का हाल तो,और बुरा है,यहां कई वरिष्ठ IPS अफसरों के ''डबल इंजन '' फॉर्मूले ( दो-दो के खेल ) पर यदि सिविल सर्विस कोड ऑफ़ कंडक्ट का चाबुक चले तो,आधे से ज्यादा आईपीएस अफसरों की कुर्सी ख़िसक जाएगी ? तस्दीक की जाती है,कि पुलिस मुख्यालय में रंगीन मिज़ाजी के बढ़ते प्रकोप के चलते ''अफसर'' एक ''कहानी'' दो,की दास्तान आम हो चली है,मंत्रालय में पदस्थ कई आईएएस अफसरों का भी "BIGAMY" प्लान,सुर्ख़ियों में है |

मामला,2014 बैच के आईएफएस पंकज राजपूत से जुड़ा बताया जा रहा है | यह भी बताया जा रहा है,कि लखनऊ की फैमिली कोर्ट से केस जीतने के बाद पीड़ित पत्नी ने अदालती फरमानों को क्रियान्वित करने के लिए कई मिन्नतें की,लेकिन जब बात नहीं बनी तो, उसने पारिवारिक दायित्वों को लेकर एक वीडियो सन्देश जारी कर राज्य सरकार का ध्यान अपनी समस्या की ओर दिलाया है | श्रीमती अदिति सिंह ने इस वीडियो सन्देश में आरोप लगाया,कि पंकज राजपूत, आई.एफ.एस. निरंतर अपमानजनक एवं अमर्यादित शब्दों से संबोधित करते हैं। उन्होंने अपने नाबालिग पुत्र के प्रति यही दृष्टिकोण अपनाया हुआ है | उनके मुताबिक,उन्हें सामाजिक और आर्थिक व्यवहार में भी प्रताड़ित किया जा रहा है |


अदिति सिंह ने बताया,कि वर्ष 2020 में न्यायालय का नोटिस प्राप्त होने के पश्चात उनके पति ने अपने पुत्र के लिए ₹8,000 की धनराशि देना प्रारंभ किया, तो उक्त राशि को बैंक लेन-देन/विवरण में निरंतर “खर्चा” (Expenses) के रूप में संबोधित किया गया। उन्होंने कहा,कि अपनी संतान के भरण-पोषण, शिक्षा एवं आवश्यकताओं के लिए दी जाने वाली राशि को IFS पिता द्वारा मात्र “खर्चा” समझना उसकी संतान के प्रति दृष्टि और उत्तरदायित्व-बोध को स्पष्ट करता है। पीड़ित पत्नी ने यह भी आरोप लगाया,कि उनके 5 वर्ष के पुत्र को भरण पोषण करने की राशि देने से भी इंकार किए जाने से वे अपने अफसर पति के रूख से हताश है |

अदिति सिंह ने अपनी पारिवारिक ज़िन्दगी को शेयर करते हुए कहा,कि उनके पति उन्हें अक्सर “बुरी” कहकर संबोधित करते थे। यहाँ तक,कि उनका नाम ही “बुरी रख दिया था और नियमित रूप से इसी संबोधन का प्रयोग करते थे। उनके मुताबिक,यह सिलसिला उनकी गर्भावस्था के दौरान भी जारी रहा | उन्होंने बताया,कि बिजनौर की एक अदालत ने हाल ही मे पंकज सिंह राजपूत द्वारा अपनी माता निर्मला देवी से उनके खिलाफ दायर एक झूठे मुकदमे को सुनवाई के बाद ख़ारिज कर दिया है | उन्होंने कहा,कि प्रदेश की नौकरशाही में ऐसी सोच पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक संरचना और नैतिकता को नकारात्मक दिशा की ओर ले जा रही है | उन्होंने ऐसी कार्यशैली वाले अफसरों को नौकरशाही में बढ़ावा देने की कवायतों को देखकर अंदेशा जाहिर किया,कि आने वाले दिनों कई अफसरों के घर परिवार में बिखराव का ग्राफ बढ़ेगा|

अदिति सिंह की आपबीती से सोशल मीडिया में हलचल तेज़ है,सवाल उठ रहा है,कि छत्तीसगढ़ में आख़िर बड़े अफसरों को "डबल इंजन'' की जरुरत क्यों पड़ रही है? क्या तनाव दूर करने के लिए "BIGAMY" की राह वक्त की जरूरत बन गई है ? दरअसल,नौकरशाही में ''बहुपत्नी'' के चलन ने सोशल मीडिया से लेकर सरकार के कई दफ्तरों तक कोहराम खड़ा कर दिया है,इस विधा में परांगत अफसरों की कार्यप्रणाली से सरकार की मंशा पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है ? जानकार इस फॉर्मूले को कभी "NEEDY" तो कभी ''GREEDY'' नमूने के तौर पर देख रहे है | फिलहाल,मामले को लेकर आईएफएस पंकज राजपूत की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है |