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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग को दोनों देशों की आर्थिक प्रगति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताते हुए कहा है कि हिंद महासागर में शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए दोनों देश सबसे करीबी साझेदार के रूप में काम करने की बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका के बंदरगाह साझा आर्थिक विकास के इंजन बन सकते हैं, जबकि समुद्री उद्योग दोनों देशों के साथ-साथ पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की भविष्य की समृद्धि का वाहक बन सकता है।
श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा पर हैं राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह इन दिनों श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा पर हैं। कोलंबो में ‘हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-श्रीलंका समुद्री सुरक्षा व सहयोग’ से जुड़े कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आपसी समृद्धि को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर गहरे रणनीतिक और आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में भारत और श्रीलंका को अपने प्रयासों में तालमेल बढ़ाने और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी सामूहिक क्षमताओं का इस्तेमाल करने की जरूरत है।
मछुआरों के विवाद का समाधान जरूरी
रक्षा मंत्री ने भारत और श्रीलंका के मछुआरों से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के मछुआरों के सामने आने वाली चुनौतियों से वह अवगत हैं और इनका समाधान पारस्परिक रूप से लाभकारी तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मछली पकड़ने से जुड़े विवादों को संबंधित कानूनों और भौगोलिक अधिकार क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए सुलझाने के लिए दोनों देशों को मिलकर काम करना होगा।
आजीविका का विषय है मछुआरों का मुद्दा
राजनाथ सिंह ने कहा कि मछली पकड़ने से जुड़े विवादों को रोकने के लिए दोनों देशों को अपनी व्यवस्थाओं को और मजबूत करना चाहिए। इन विवादों से पूरी सावधानी और संवेदनशीलता के साथ निपटने की जरूरत है, क्योंकि यह लोगों की आजीविका से जुड़ा विषय है। साथ ही समुद्री कानूनों का प्रभावी पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
भारतीय शांति सेना स्मारक पर दी श्रद्धांजलि
कोलंबो में कार्यक्रम से पहले राजनाथ सिंह ने भारतीय शांति सेना स्मारक का दौरा किया और अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश उनके सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। उनके बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
समुद्री सुरक्षा और समृद्धि एक ही सिक्के के दो पहलू
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का श्रीलंका के प्रति दृष्टिकोण एक सच्चे विश्व-मित्र का है, जो साझा पड़ोस में रचनात्मक और भरोसेमंद भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका के लिए व्यापक समुद्री सुरक्षा और आपसी समृद्धि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इन्हें सहयोग, विश्वास और साझा प्रतिबद्धता के जरिए ही हासिल किया जा सकता है।
विकास परियोजनाओं में लोगों की जरूरतों पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अपने अनुभव श्रीलंका के साथ साझा करने और क्षेत्र की निरंतर वृद्धि तथा समृद्धि के लिए उसके साथ मिलकर काम करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में भारत की विकास परियोजनाएं हमेशा वहां के लोगों की जरूरतों और श्रीलंका सरकार की प्राथमिकताओं पर केंद्रित रही हैं।
बंदरगाह बन सकते हैं आर्थिक विकास का आधार
राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों की भौगोलिक निकटता परस्पर निर्भरता पैदा करती है और यही निर्भरता साझा विकास के लिए बड़े अवसर पैदा करती है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बंदरगाह साझा आर्थिक विकास के इंजन बन सकते हैं। वहीं, समुद्री उद्योग भारत और श्रीलंका के लोगों के साथ पूरे क्षेत्र की भविष्य की समृद्धि को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आपदा के समय संयुक्त राहत व्यवस्था का प्रस्ताव
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और श्रीलंका प्राकृतिक तथा मानव निर्मित आपदाओं के समय तेजी से सहायता पहुंचाने के लिए संयुक्त समुद्री मानवीय सहायता एवं आपदा राहत व्यवस्था स्थापित कर सकते हैं। इसमें संबंधित एजेंसियों, आपदा प्रबंधन संस्थाओं और वैज्ञानिक संगठनों को शामिल किया जा सकता है। ऐसी व्यवस्था दोनों देशों की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने के साथ क्षेत्रीय सहयोग को भी बढ़ावा देगी।
हिंद महासागर सिर्फ जलमार्ग नहीं
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज हिंद महासागर केवल एक जलमार्ग नहीं है, बल्कि यह वह मंच है जहां क्षेत्र का आर्थिक और रणनीतिक भविष्य तय होगा। हिंद महासागर से जुड़े भारत और श्रीलंका जैसे समुद्री देशों के लिए यह कोई सैद्धांतिक विषय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की वास्तविकता है। इसका सीधा असर दोनों देशों के व्यापार, सुरक्षा और भविष्य पर पड़ता है।
क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देने पर जोर
रक्षा मंत्री के मुताबिक, बदलते रणनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। दोनों देशों की साझा समुद्री विरासत और भौगोलिक निकटता उन्हें सुरक्षा, व्यापार, आपदा राहत और आर्थिक विकास के क्षेत्रों में साथ काम करने के व्यापक अवसर देती है। उन्होंने भारत-श्रीलंका संबंधों को विश्वास, सहयोग और साझा विकास की भावना के आधार पर आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।







