
दिल्ली / रायपुर : – छत्तीसगढ़ में भू-PAY गिरोह पर एजेंसियों ने बड़ा शिकंजा कसा है, इससे सियासत में हलचल तेज हो गई है, बेटे वैभव अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद लम्बे समय से फरार उनके पिता रामगोपाल अग्रवाल भी गिरफ्तार हो गए है। उनके 24 घंटे के भीतर हाजिर होने की मोहलत के ख़त्म होते ही गिरफ्तारी की खबर सामने आई है।

यह भी बताया जाता है कि बेटे की गिरफ्तारी के बाद फरार कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल ने कई बार नए – नए ठिकानों की ओर अपने कदम बढ़ाये थे। यह भी दावा किया जा रहा है कि ACB – EOW को जहाँ रामगोपाल की गिरफ़्तारी से बड़ी लीड मिली है, वही महादेव एप्प सट्टा घोटाले में ( ED ) प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई एक बार फिर सक्रीय हो गई है। रामगोपाल अग्रवाल का नाम नान घोटाले समेत कई बड़ी वसूली में सामने आया था। जबकि महादेव एप्प सट्टा घोटाले में मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर की इंडोनेशिया से गिरफ़्तारी के बाद अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ कैडर के उन आईपीएस अधिकारियो को भी एजेंसिया धर – दबोच सकती है, जिनके तार घोटालेबाजो से जुड़े हुए पाए गए थे।

रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई समेत राज्य के अन्य जिलों में महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा घोटाले को लेकर सीबीआई ने कुछ माह पूर्व छापेमारी भी की थी। गिरफ्तार सौरभ चंद्राकर के तार तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल समेत रायपुर के तत्कालीन एसएसपी, आई जी और एडीजी से जुड़े बताये जाते है। उसने ऑनलाइन वीडियो क्लिप जारी कर दावा किया था कि छत्तीसगढ़ में महादेव एप्प सट्टा चलाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल समेत अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियो को प्रतिमाह करोडो का भुगतान किया जाता था। उसने एक वीडियो बयान में पूर्व मुख्यमंत्री को लगभग 500 करोड़ की नगद धनराशि मुहैया कराये जाने का हवाला भी दिया था।

कांग्रेस के भीतर कोहराम मच गया है, लम्बे समय से फ़रार चल रहे पार्टी कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और उनके पुत्र वैभव अग्रवाल के ACB – EOW के हथ्थे चढ़ने की खबर मिलते ही कई नेताओं के होश फाख्ता बताये जाते है। अग्रवाल पिता – पुत्र की गिरफ़्तारी को लेकर लम्बे समय से अटकले लगाई जा रही थी। मामला 700 करोड़ के उस कोयला घोटाले से जुड़ा बताया जाता है, जो कांग्रेस की तत्कालीन भू – PAY सरकार के कार्यकाल में अंजाम दिया गया था। जबकि ( नान घोटाले ) नागरिक आपूर्ति निगम में भ्रष्टाचार समेत बल्कि अन्य बड़े घोटालों में वैभव और उनके पिता रामगोपाल अग्रवाल के संलिप्त होने संबंधी कई ठोस सबूत जाँच एजेंसियों के हाथ लगे है।

जानकारी के मुताबिक वैभव अग्रवाल से पिछले कुछ दिनों से पूछताछ जारी थी। यह भी बताया जाता है कि वैभव अग्रवाल की गिरफ़्तारी की खबर लगते ही फ़रार रामगोपाल अग्रवाल ने अपना ठिकाना भी अचानक बदल लिया था। लेकिन बुधवार शाम होते होते वे भी ACB – EOW के शिकंजे में कैद नजर आये। सूत्र तस्दीक करते है कि पिता – पुत्र दोनों एक – दूसरे के संपर्क में थे। रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ़्तारी की लम्बे समय से जारी क़वायतो के बीच यह भी खबर सामने आ रही थी कि पुत्र की गिरफ़्तारी के बाद गोपनीय ठिकाने में छिपे रामगोपाल भी जल्द प्रगट हो सकते है। सूत्रों के मुताबिक रामगोपाल को सरेंडर करने के लिए एजेंसी द्वारा 24 घंटे की मोहलत दी गई थी। पिता – पुत्र की गिरफ़्तारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बघेल गिरोह में हलचल तेज देखी जा रही है। रामगोपाल पिता – पुत्र की गिरफ़्तारी मामले को पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के खिलाफ संभावित बड़ी वैधानिक कार्यवाही से जोड़ कर भी देखा जा रहा है।

यह भी जानकारी सामने आई है कि महादेव एप्प सट्टा घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक सौरभ चंद्राकर की इंटरपोल की मदद से इंडोनेशिया में गिरफ्तारी ने पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की मुश्किलें बढ़ा दी है। इस घोटाले की दर्ज FIR में बघेल का नाम अव्वल नंबर पर बताया जाता है। सूत्र तस्दीक करते है कि सौरभ चंद्राकर और तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल के बीच सट्टा संचालन को लेकर ठोस करार था। इससे जुड़े बड़े लेन – देन के सबूत प्रवर्तन निर्देशालय ( ED ) की फाइलों में दर्ज बताये जाते है।

महादेव एप्प सट्टा घोटाले की करोड़ो की रक़म की घर – बंगला पहुंच सेवा प्रदान करने के मामले में जमानत पर रिहा निलंबित पुलिस अधिकारी चंद्रभूषण वर्मा ने तस्दीक की थी कि वो तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल, उनकी करीबी निलंबित डिप्टी कलेक्टर { उपसचिव } सौम्या चौरसिया, सलाहकार रहे विनोद वर्मा, 2001 और 2005 और 2007 बैच के आईपीएस क्रमशा : आनंद छाबड़ा, शैख़ आरिफ और प्रशांत अग्रवाल के अलावा अन्य ASP और DSP और थानेदार स्तर के पुलिस अधिकारियों को हर माह मोटी रक़म दी जाती थी।

उन्होंने अपने बयानों में यह भी तस्दीक की थी कि महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा संचालन और उसको सरंक्षण देने का नेटवर्क वरिष्ठ पुलिस अधिकारियो के माध्यम से संचालित होता था। इसमें आईपीएस आनंद छाबड़ा शैख़ आरिफ और प्रशांत अग्रवाल की मुख्य भूमिका थी। उनके ही निर्देश पर दुर्ग, भिलाई, रायपुर समेत प्रदेश के अन्य जिलों में महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा पैनल मुहैया कराये जाते थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार ने इस घोटाले की सीबीआई जाँच के निर्देश दिए थे। यही नहीं, मामले की उच्च स्तरीय जाँच के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर और सुप्रीम कोर्ट ने भी जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान ऑनलाइन सट्टा पर रोक लगाने के मामलों में केंद्र और राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे। छत्तीसगढ़ में कई अवैध कारोबार को पुलिस महकमें के भीतर ही अंजाम देने के मामलों में आईपीएस अधिकारियो की लम्बी फेहरिस्त बताई जाती है, विभिन्न ठिकानो से जाँच एजेंसियों ने कई सबूत भी इक्कठा किये थे।

छत्तीसगढ़ कैडर के तीनो विवादित आईपीएस अधिकारियो, पूर्व मुख्यमंत्री बघेल, समेत अन्य कारोबारियों के ठिकानो पर सीबीआई ने गतवर्ष छापेमारी भी की थी। पुलिस महकमे में चर्चा आम है कि अवैध कमाई के लिए चर्चित इन दागी आईपीएस अधिकारियो ने वर्दी की तमाम हदें पार कर दी थी। विभिन्न घोटालों में सहभागी बनने के बाद ऐसे आईपीएस अधिकारियो ने अपने नाते – रिश्तेदारों और कई परिजनों व परिचित लोगों के नाम पर छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बड़े पैमाने पर वैध – अवैध सम्पति अर्जित कर सरकार को जमकर चूना लगाया था।

सूत्र यह भी तस्दीक करते है कि आईपीएस शैख़ आरिफ की कार्यप्रणाली की तर्ज पर उनकी आईएएस पत्नी शम्मी आबिदी ने भी अपने प्रभार वाले विभागों में जमकर घोटालों को अंजाम दिया था। छत्तीसगढ़ हाऊसिंग बोर्ड समेत अन्य सरकारी महकमों में शासन की रकम के दुरुपयोग और घोटालों को लेकर उनका भी नाम सुर्खियों में है। शम्मी आबिदी के खिलाफ कई गंभीर शिकायतों की जाँच और वैधानिक कार्यवाही को कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल ने दरकिनार कर दिया था। हालांकि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में , समाज कल्याण विभाग में अंजाम दिए गए ”साड़ी घोटाले” में बतौर विभागीय “सचिव ” शम्मी आबिदी का नाम सामने आने के बाद हालिया उन्हें अन्य विभाग में स्थान्तरित कर दिया था।

जानकारी के मुताबिक तत्कालीन कांग्रेस सरकार के बैनर तले पूर्व मुख्यमंत्री भू – PAY के कार्यकाल में अंजाम दिए गए दर्जनों घोटालों में मनी – लॉन्ड्रिंग की ट्रेल की जाँच में जहाँ प्रवर्तन निदेशालय जुटा है, वही सीबीआई लगभग 15 हजार करोड़ के महादेव एप्प सट्टा घोटाले की एक के बाद एक परते उधेड़ रही है। एक जानकारी के मुताबिक केंद्रीय जाँच एजेंसियों ने आरोपी सौरभ चंद्राकर के भारत प्रत्यार्पण कर रायपुर की विशेष अदालत में पेश करने की कवायतें शुरू कर दी है। यह भी बताया जाता है कि एक दिन के भीतर पहले महादेव एप्प सट्टा संचालक सौरभ चंद्राकर और फिर वैभव अग्रवाल और उनके पिता राम गोपाल अग्रवाल की गिरफ़्तारी ने भू – PAY गिरोह की बेचैनी बढ़ा दी है। इस खेमे में अब गिरोह के मुखिया भू – PAY की भी गिरफ़्तारी की आशंका से इंकार नहीं किया जा रहा है। सूत्रों ने साफ़ किया है कि रामगोपाल पर जिस तर्ज पर पुलिस और एजेंसियों ने शिकंजा कसा था उसके सकारात्मक परिणाम जल्द सामने आ सकते है।

यह भी बताया जा रहा है कि वैभव अग्रवाल से पिछले 3 दिनों से जारी पूछताछ के दौरान आरोपी रामगोपाल अग्रवाल 4 से अधिक बार अपने ठिकाने बदल चूका था। वैभव अग्रवाल से जारी पूछताछ के बीच उनके पिता रामगोपाल अग्रवाल का शामिल होना एजेंसियों के गलियारों में किसी बड़ी कार्यवाही की ओर एजेंसियों के बढ़ते कदम के रूप में आँका जा रहा है। जबकि वैभव और रामगोपाल की गिरफ़्तारी को लेकर ACB – EOW की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फ़िलहाल, कांग्रेसी गलियारों में आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री बघेल पर भी कानून का डंडा चलने के “अंदेशे” मात्र ने पार्टी के कई समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की बांछे खिली नजर आ रही है।





