“राज दरबारी” ! पढ़िए,छत्तीसगढ़ के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों की खोज परख-खबर, व्यंग्यात्मक शैली में,लेखक और वरिष्ठ पत्रकार ‘‘राज’’ की कलम से, व्यंग-लेख का मकसद किसी की भी मानहानि नहीं बल्कि कार्यप्रणाली का इज़हार मात्र है…( इस कॉलम के लिए संपादक की सहमति आवश्यक नहीं, यह लेखक के निजी विचार भी हो सकते है | ) 

यह तो,बीजेपी को भी निगल लेगा ? अब ”ZEN-G” के सेनेटरी पैड हज़म करने की तैयारी,सुरसा के मुंह की तरह “गजेंद्र मुख” –

“हाथी के दांत,खाने के कुछ और दिखाने के कुछ”,पुरानी कहावत है,लेकिन अब इस कहावत का नया वर्जन आ गया है,राजनैतिक गलियारों में इसे चालू भाषा में  “गजेंद्र मुख” के नाम से जाने-पहचाने जाने लगा है | बताते है,कि “गजेंद्र मुख” सुरसा के मुंह की तरह लगातार बढ़ते जा रहा है,पेट के तो क्या कहने ? गज अर्थात हाथी की तरह पेट भी है,जो शिक्षा विभाग से जुड़ी कई योजनाओं को इन दिनों बड़ी आसानी से निगलने में जुटा है | इसके लिए जो फॉर्मूला तैयार किया गया है,वो प्रदेशभर के ”ZEN-G” को भड़काने के लिए पर्याप्त आंका जा रहा है |


यह भी बताया जाता है,कि इसी सोमवार सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूली छात्राओं के लिए “सेनेटरी पैड” आपूर्ति का 47 करोड़ का टेंडर बुलाया गया है | इस टेंडर में सुरक्षा निधि के नाम पर 50 लाख के DD (डिमांड ड्राफ़) की शर्त से भारत का ‘‘रिज़र्व बैंक” भी हैरत में है,DD की शर्त यह है,कि उसकी  वैलेडिटी पूरे 180 दिन अर्थात 6 माह की होनी चाहिए | जबकि,भारत की बैंकिंग व्यवस्था में चेक (CHEQUE) या DD (डिमांड ड्राफ़) की वैलेडिटी मात्र 90 दिन अर्थात 3 माह निर्धारित है | निविदा-टेंडर में  डिमांड ड्राफ़ की इस अनोखी शर्त के चलते कई प्रतियोगी कंपनियों ने मैदान छोड़ दिया है | बताते है,कि “गजेंद्र मुख” की सेवा शर्तों से एक मात्र “वही चुनिंदा” कंपनी बाज़ी मारने वाली है,जिसे लाभांवित करने के लिए ”स्वामी गजेंद्र” ने हामी भरी थी |

यह भी बताया जाता है,कि मुख्य सप्लायर (कंपनी मालिक) एक ही है,लेकिन रावण की तर्ज़ पर उसके “10 मुख” ही प्रतियोगिता में अव्वल नंबर पर नजर आ रहे है | मामला साफ़ है,कि ZEN-G की नैपनीक पर “गजेंद्र हस्त” साफ़ है | एक जानकारी के मुताबिक,स्कूलों में शिक्षकों के ट्रांसफर पोस्टिंग हो ? या फिर महकमे में शिक्षा सामग्री की सप्लाई ? “गजेंद्र योग” तय है,शिक्षकों के स्थानांतरण का दाम ढाई लाख ”फ़िक्स“,जबकि विभाग में निविदा-टेंडर-जैम के जरिए  सप्लाई के ग्राफ़ में पूरा 25 फीसदी कमीशन तय कर दिया गया है | कई पार्टी कार्यकर्ता,तस्दीक करते है,कि मसला शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का हो या फिर सामान्य कामकाज़ से जुड़ा,इस कवायत में अपनों को भी बख्शा  नहीं  जा रहा है | इसके लिए पार्टी  कार्यकर्ताओं को नाम मात्र की रियायत दी गई है,उनकी सिफारिश पर चाहे नाते-रिश्तेदार क्यों ना हो ? मात्र 50 हज़ार की छूट निर्धारित कर दी गई है,कम से कम उन्हें पूरे ”2” ढीले करने पड़ रहे है,दर्जनों ऐसे मामले सुर्ख़ियों में है,जिसमे बीजेपी कार्यकर्ता भी तस्दीक करते है,कि बग़ैर पेट पूजा के “गजेंद्र मुख” को जनसेवा का कोई स्वाद रास नहीं आता,क्या करें ? उन्हें भी अपनी जेब ढीली करने को विवश होना पड़ रहा है | 

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शांति नगर में कोलाहल ! अब नया दृयश्म,नकटी के बाद फिर दांव पर शासन-प्रशासन की नाक –

रायपुर से सटे नकटी ग्राम में इन दिनों ”शांति” छाई हुई है,ग्रामीण नए सिरे से अपना आशियाना तैयार करने में जुटे हुए है,बीजेपी सरकार के प्रति उनकी नफ़रत कम नहीं हो पाई है | इस बीच यह बस्ती एक बार फिर  पहले की तर्ज़ पर  बसने लगी है,लेकिन रायपुर कलेक्टर दफ़्तर से चंद फासले पर स्थित शांति नगर में कोलाहल है,यहाँ निवासरत लोगों की सांसे फूली हुई है,बेचैनी ऐसी,कि यहाँ नकटी जैसा नज़ारा तो,ना दिखाई देने लगे |

दरअसल,”भू-PAY” सरकार के कार्यकाल में इस बेशक़ीमती ज़मीन को PP मॉडल के तहत हथियाने की पुरज़ोर कोशिश की गई थी,लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई | अब शासन बीजेपी का है,लेकिन शांति नगर पर भू-माफिओं की नज़र “जस की तस” बरक़रार है | शांति नगर को हथियाने के लिए वो भी अब नए सिरे से जुट गए है | सत्ताधारी दल से जुड़े नए सहभागियों के साथ इस इलाके की लगभग 29 एकड़ ज़मीन की बन्दर बाँट से जुड़ी कवायत फिर शुरू हो गई है,इसके लिए यहाँ निवासरत लोगों को खदेड़ा जाने लगा है,उनके नल कनेक्शन काटे जा रहे है,बिजली गुल की जा रही है,सिंचाई कॉलोनी की साफ़-सफाई के मामले से नगर-निगम ने अपने हाथ पीछे खींच लिए है,लोगों के लिए रोजाना नई-नई मुसीबतें खड़ी की जा रही है,तस्दीक की जाती है,कि जब नकटी में बुलडोजर कार्यवाही की गई थी,उसी दिन से यहाँ भी भरी बारिश में लोगों को उनके रहवास से हटाने का उपक्रम शुरू कर दिया गया था |

अब तो,भू-माफ़िया प्रदत्त कृत्रिम समस्यों से यहाँ के निवासियों का जीना मुहाल है | जबकि,ज़मीन हथियाने की मुहिम में शामिल कुछ ”राजनेताओं” की चर्चित रियल स्टेट कारोबारियों के साथ बैठक भी सुर्खियां बटोर रही है | चर्चा है,कि नवा रायपुर में स्थित बेशकीमती जमीनों को NRDA के जरिए और पुराने रायपुर में स्थित शांति नगर को हाउसिंग बोर्ड के जरिए ठिकाने लगाने की परियोजना अंतिम व्यक्तियों के घर-द्वार में दस्तक़ देने लगी है | सरकारी जमीनों को ठिकाने लगाए जाने को लेकर कभी कांग्रेस सुर्ख़ियों में रही है,लेकिन विकास के नाम पर ऐसी जमीनों का ”वारा-न्यारा” करने में अब बीजेपी के चुनिंदा कर्ता-धर्ताओं का नाम लोगों की जुबान पर है | 

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मंत्री जी पर ग्रहण या  ”पाणिग्रहण”-

छत्तीसगढ़ के एक ”मंत्री जी” के सिर पर सवार ”पाणिग्रहण” के भूत ने महोदय की मुश्किलें बढ़ा दी है | उनके संवैधानिक अधिकारों की ”बोली” खुले बाजार में लगने लगी है|लंबे-चौड़े प्रभार वाले महकमे में ठेके हो या सप्लाई,चाबी ”पाणिग्रहण” के हाथों में बताई जाती है | यह भी बताया जाता है,कि ”बंदर के हाथों उस्तुरा” लग चुका है,जाहिर है,सत्ता और संगठन दोनों का लहूलुहान होना तय ? इसकी बानगी भी,साफ़-साफ़ नजर आने लगी है | खेती-किसानी से जुड़े महकमे में  इन दिनों ठेके और सप्लाई में महाभ्रष्टाचार का “ग्रहण” हटाए नहीं हट रहा है | उसकी कालिख़ से “महोदय” की साख ख़तरनाक मोड़ पर बताई जाती है| ”पाणिग्रहण” के महाभ्रष्टाचार के चलतेप्रदेश के कई किसान छले जा रहे है ?

कई  सरकारी योजनाएं  खेत-खलियानो में दम तोड़ रही है ? ”पाणिग्रहण’‘ ऐसा,कि कई जिम्मेदार अधिकारी भी अपनी सुध-बुध खो चुके है | ”40 फीसदी” कमीशन का नारा महकमे के गलियारों में गूंज रहा है,भुगतान पहले और फिर हाथों-हाथों “वर्क ऑर्डर” ? यही परंपरा अब अपना पैर पसार चुकी है,”हल्दी-चूना” लगाने वाली योजनाओं से,किसानों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है, ”पाणिग्रहण” का कुप्रभाव सत्ताधारी दल के लिए आग में घी का काम कर रहा है,दर्जनों योजनाओं पर पानी फिर गया है,फिर भी “महोदय” खामोश बताए जाते है |  सरकारी योजनाओं पर  विश्वास कर छले जाने वाले किसानों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है | उधर,महोदय  भ्रष्टाचार के खिलाफ शंखनाद का ”एलान” कर चुके है,उनके बयानों पर गौर करें तो अगले साल तक प्रदेश से भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा ? अब देखना गौरतलब होगा,कि आखिर कौन समाप्ति के द्वार पर खड़ा नजर आता है ?

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 दबी ज़ुबान से “नमो-नमो” कांग्रेसियों का गज़क परहेज़,हैरत में लोग –

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75 जन्मोत्सव पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया | लेकिन,कांग्रेसी ख़ेमे में इस दिन जबरदस्त गहमा-गहमी छाई रही | एक ओर गणेश उत्सव की घूम  के बीच”नमो-नमो” के कही मंत्र तो,कही नारे सुनाई दिए,तो दूसरी ओर मंत्र हो या नारे ? गूंजते स्वर से कई कांग्रेसी अपने ”कान बचाते” नज़र आए,सड़कों में PM मोदी के धुर विरोधियों का हाल-बेहाल दिखाई दिया | गांव-कस्बों से लेकर शहरों तक कभी मंत्रों तो कभी नारों से इलाके गूंजते रहे | इसे कई कांग्रेसी कभी नज़रअंदाज़ करते,तो कभी एक कान से सुनते तो,दूसरे कान से फौरन बाहर निकालते दिखाई दिए | इस कश्मकश में भगवान भोलेनाथ की आराधना से जुड़े “नमो-नमो” मंत्र को भी कांग्रेसियों ने सुनने तक से इंकार कर दिया |

बताते है,कि “नमो-नमो” सनातनी मंत्र के अर्थ को कांग्रेसी भगवान भोलेनाथ की आराधना से जोड़कर नहीं,बल्कि नरेंद्र मोदी के नाम से जोड़कर देखते है,इस राजनैतिक कवायत के बीच सनातनी मंत्र का अजीबो-गरीब विरोध सुर्ख़ियों में है | बताते है,कि  इस सनातनी मंत्र के सुनने मात्र से कांग्रेसियों के मन में अज़ीब सी बेचैनी होनी लगती है| यह भी बताते है,कि “नमो-नमो” मंत्र का जाप कई कांग्रेसियों के दादा-परदादा भी करते आए है,पीढ़ियां गुजर गई  “नमो-नमो” जपते,लेकिन अब PM विरोध में सड़कों पर उतरी कांग्रेस इस सनातनी मंत्र से भी नफ़रत पर उतर आई है| रायपुर में तो,जगह-जगह हज़ारों दीप जलाकर,PM मोदी का जन्मोत्सव धूम-धाम से मनाया गया | गणेश उत्सव की घूम के बीच,कही मंदिरों तो,कही पंडालों में  गूंजते  “नमो-नमो” के मंत्रों और भजनों को  कांग्रेसी संदेह की नज़र से देखते रहे | उन्हें,यहाँ “नमो-नमो” के  सनातनी मंत्र में भी ”नरेंद्र मोदी-नरेंद्र मोदी” के स्वर का आभास होते रहा | अब कौन समझाएं उन्हें,पार्टी विशेष का राजनैतिक विरोध करते-करते अनूठी सनातन परंपरा का विरोध कैसा ? 

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रायपुर कमिश्नरी में आयातित अपराध ? कारखाना यहाँ पर –

छत्तीसगढ़ में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद लगभग सभी महकमों में सुधार कार्य जारी है,उसके परिणाम भी सामने आने लगे है,जनता के साथ ताल-मेल बैठकर,सकारात्मक कार्यों के लिए सरकारी प्रयास भी किए गए है,ऐसे महकमों के प्रदर्शन से राज्य की बीजेपी सरकार की साख बढ़ी है,कई इलाकों में विष्णुदेव साय सरकार की जय-जयकार हो रही है | लेकिन,पुलिस महकमे की हालत वही ‘ढाक के तीन पात’ की तर्ज़ पर बताई जाती है | रायपुर में कमिश्नरी प्रणाली लागू तो कर दी गई,लेकिन ना तो पर्याप्त बल दिया गया और ना ही सामान्य संसाधन जुटाने में “पुलिस मुख्यालय” ने कोई खास रूचि दिखाई |

ये और बात है,कि “दिन दुगनी-रात चौगुनी” मेहनत कर राजधानी पुलिस ने अपराधों पर नियंत्रण के लिए जमकर अपना पसीना बहाना शुरू कर दिया है,मौज़-मस्ती के लिए देर रात तक खुले रहने वाले बार,नाईट क्लब, रेस्टोरेंट, होटल, ढाबों और ऐसे ही ठिकानों पर पुलिस की तिरछी नजरे है | ऐसे ठिकानों पर नियमानुसार पाबंदी कब तक कारगर होगी ? यह तो वक़्त ही बताएगा ? लेकिन,कमिश्नरी से सटे ग्रामीण इलाकों में अपराधों के नए कल कारखाने अस्तित्व में आ गए है |

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तस्दीक की जाती है,कि राजधानी पुलिस का दबाव बढ़ने से गैर कानूनी गतिविधियों के लिए रायपुर ग्रामीण,नया औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित हो गया है |बताते है,कि रात 11 बजे के बाद जो अवैधानिक गतिविधियां कमिश्नरी के इलाकों में मूर्त रूप नहीं ले पाती,वो रायपुर ग्रामीण की बस्तियों में 24×7 फल-फ़ूल रही है | कबाड़ियों,सटोरियों और चोर-उचको को मात्र 15 हज़ार मासिक की दर  पर नए ठिकाने सौंप दिए गए है,यही हाल मौज़-मस्ती के केंद्रों का है |

VIP रोड माना से लेकर नई राजधानी और  मंदिर हसौद तक कई ढाबे और होटले,रातभर गुलज़ार है,पीने-पिलाने के इन ठिकाने में हुक़्क़ा से लेकर कई नशीली पार्टियां आम है | नई राजधानी का थाना राखी हो या फिर अन्य कोई ? अपराधों के दर्जनों कल कारख़ाने पूरी रफ़्तार के साथ संचालित किए जा रहे है | बताते है,कि रायपुर ग्रामीण से आयातित आपराधिक तत्व  कमिशनरी में आ कर कोहराम मचाते है,अपराधों की इस नई शरणस्थली को लेकर राजधानी पुलिस की कमर टूट रही है | 

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