
रायपुर : आर्थिक अपराधों के नए-नए तौर तरीकों के सामने आने के बाद विवेचना के दौरान ऐसे अपराधों से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है| राज्य पुलिस अकादमी में लगभग 300 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है| केंद्रीय जाँच एजेंसियों की तर्ज़ पर छत्तीसगढ़ पुलिस भी अपनी विवेचना को पेशेवर बनाएंगी| इसके लिए अभी से ठोस प्रयास शुरू कर दिए गए है | इसके तहत ऐसा प्रशिक्षण दिया जा रहा है,जिसमें आर्थिक अपराधों की गहन विवेचना के साथ-साथ कानूनी रूप से न्यायालय के अनुरूप दस्तावेजों और साक्ष्यों के प्रस्तुतिकरण की बारीकियों से जाँच अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है|महानगरों की तर्ज पर डिजिटल पेमेंट,नेट बैंकिंग से ठगी,विभिन्न बैंकों और संस्थाओं में रकम की अफ़रा-तफरी,आय से अधिक संपत्ति की विवेचना,कर चोरी,अनियमितता और घोटालों समेत अन्य आर्थिक अपराधों की पड़ताल और चालान प्रक्रिया के बिंदुओं से पुलिस को अवगत कराया जा रहा है|

साइबर और वित्तीय अपराधों के लगातार बदलते तरीकों से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने अपनी तकनीकी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी में ‘नवीन युग के वित्तीय अपराध एवं त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारी’ विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्घाटन पुलिस महानिदेशक जी.पी. सिंह ने किया। इसमें पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेशभर से करीब 300 पुलिस अधिकारी शामिल हुए।
कार्यशाला में साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड के नए तौर-तरीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। राष्ट्रीय स्तर के साइबर अपराध विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों, ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन की ट्रैकिंग और साइबर अपराध की जांच से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। निवेश और ट्रेडिंग घोटाले, डिजिटल लेंडिंग फ्रॉड, फर्जी KYC, UPI और QR कोड फ्रॉड, रिमोट एक्सेस एप्लीकेशन, दुर्भावनापूर्ण APK, बिजनेस ई-मेल कम्प्रोमाइज, क्रिप्टोकरेंसी अपराध और म्यूल अकाउंट नेटवर्क जैसे मामलों को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया।

DGP जी.पी. सिंह ने कहा कि साइबर अपराध में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। अपराधी कुछ ही मिनटों में रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं, जिससे पैसा वापस हासिल करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई जितनी जल्दी होगी, रकम को रोकने और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। उन्होंने साइबर-वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए REPORT → TRACE → FREEZE → PRESERVE → INVESTIGATE यानी रिपोर्ट, ट्रेस, फ्रीज, साक्ष्य सुरक्षित और जांच की प्रक्रिया को तेजी से और जहां संभव हो, समानांतर रूप से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।कार्यशाला में अधिकारियों को यह भी समझाया गया कि साइबर फ्रॉड की जांच सिर्फ यह पता लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि पैसा कहां गया, बल्कि जांच का लक्ष्य यह पता लगाना भी होना चाहिए कि इसके पीछे पूरा नेटवर्क कौन चला रहा है। एक फ्रॉड के पीछे कई मोबाइल, बैंक खाते, डिजिटल डिवाइस, म्यूल अकाउंट और अलग-अलग राज्यों या देशों में बैठे आरोपी हो सकते हैं। इसलिए पीड़ित से डिवाइस, डिवाइस से डिजिटल फुटप्रिंट और डिजिटल फुटप्रिंट से वित्तीय लेन-देन तक सभी कड़ियों को जोड़ना जरूरी है।

कार्यशाला में साइबर-वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए पुलिस के साथ बैंकों, पेमेंट नेटवर्क, फिनटेक कंपनियों, टेलीकॉम कंपनियों और जांच एवं नियामक एजेंसियों के बीच तेज और प्रभावी समन्वय की जरूरत बताई गई। कार्यक्रम में PHD Chamber of Commerce and Industry, Visa और Development Leaders Alliance का भी सहयोग रहा।DGP जी.पी. सिंह ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को सिर्फ नई तकनीक की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांचकर्ताओं को ‘डिजिटल सोच’ के साथ वित्तीय कोण से भी जांच करने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों से वास्तविक मामलों के अनुभव साझा करने और फील्ड में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करने का आग्रह किया। कार्यशाला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ पुलिस की Response Readiness को मजबूत करना, साइबर अपराधों की जांच को तेज करना और ठगी की रकम की रिकवरी की संभावनाओं को बढ़ाना है |



