
छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल शुरू करने और मान्यता लेने के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 7 सितंबर 2026 को नई गाइडलाइन जारी की है, जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी। नए नियमों के तहत स्कूल खोलने के लिए अब एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट और न्यूनतम कॉर्पस फंड जरूरी नहीं होगा। हालांकि स्कूल संचालकों को सेल्फ सर्टिफिकेशन देना होगा, जिसमें बिल्डिंग की सुरक्षा, लैब, लाइब्रेरी, खेल मैदान, योग्य शिक्षक और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। एक कक्षा में अधिकतम 45 विद्यार्थियों के बैठने की सीमा भी तय की गई है। नई व्यवस्था में मान्यता की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। बिना मंडल की मान्यता के निजी स्कूल कक्षा 9वीं से 12वीं तक संचालित नहीं कर सकेंगे। हिंदी और इंग्लिश मीडियम के लिए अलग जमीन, भवन, प्राचार्य और शिक्षण स्टाफ की शर्त रखी गई है। स्कूल की जमीन, बिल्डिंग मैप और सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज भी जरूरी होंगे। मल्टीस्टोरी भवन के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना होगा। वहीं लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर लैब और खेल मैदान जैसी सुविधाएं जरूरत पड़ने पर नजदीकी सरकारी संस्था या मान्यता प्राप्त स्कूल के साथ औपचारिक समझौते के जरिए साझा की जा सकेंगी।

नई गाइडलाइन में बच्चों की सुरक्षा और स्कूल स्टाफ को लेकर भी कई प्रावधान किए गए हैं। स्कूल में सुरक्षित पेयजल, अलग-अलग टॉयलेट, दिव्यांगों के लिए सुविधा, पर्याप्त फर्नीचर और सीसीटीवी जरूरी होंगे। स्कूल बसों का हर साल तकनीकी परीक्षण और ड्राइवर-कंडक्टर का स्वास्थ्य परीक्षण कराना होगा। हाईस्कूल में 13 पदों का स्टाफ सेटअप निर्धारित किया गया है, जबकि हायर सेकंडरी में संकाय के अनुसार स्टाफ रखना होगा। गलत जानकारी देने पर मान्यता निलंबित या रद्द होने के साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि ये सभी स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक हैं और नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों की अगले साल मान्यता पर विचार नहीं किया जाएगा।




