
दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सेक्स वर्कर्स के अधिकारों पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई वयस्क महिला अपनी इच्छा से सेक्स वर्क करती है, तो उसे अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि ऐसी महिलाओं के खिलाफ केवल उनके पेशे के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए और न ही उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जाए।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि अपनी मर्जी से इस पेशे में शामिल वयस्क महिलाओं को हिरासत में रखने या सुधार गृह भेजने का कोई औचित्य नहीं है।हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को धोखे, दबाव, लालच या मानव तस्करी के जरिए देह व्यापार में धकेला जाता है, तो ऐसे मामलों में इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट (ITPA) के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट?
भारत में देह व्यापार से जुड़ी अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए वर्ष 1956 में यह कानून लागू किया गया था। इस कानून में सहमति से किए जाने वाले यौन संबंधों को अपराध नहीं माना गया है, लेकिन वेश्यालय संचालित करने, देह व्यापार के लिए लोगों को मजबूर करने और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
कानून की प्रमुख धाराएं:
- धारा 3: देह व्यापार के लिए मकान या स्थान उपलब्ध कराने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान।
- धारा 4: किसी सेक्स वर्कर की आय पर निर्भर रहने या उसका आर्थिक लाभ उठाना अपराध है।
- धारा 5: किसी व्यक्ति को बहला-फुसलाकर, धमकाकर या मजबूर करके देह व्यापार में शामिल करना दंडनीय अपराध है।
- धारा 7: सार्वजनिक स्थानों या धार्मिक स्थलों के 200 मीटर के भीतर देह व्यापार करना प्रतिबंधित है।

सम्मानजनक जीवन का अधिकार
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ, जिसमें जस्टिस एल. नागेश्वर राव, जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस ए.एस. बोपन्ना शामिल थे, ने कहा था कि सेक्स वर्कर्स भी संविधान के तहत सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार रखती हैं।अदालत ने माना था कि सेक्स वर्कर्स भी देश की नागरिक हैं और उन्हें भी अन्य नागरिकों की तरह कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए। विभिन्न रिपोर्टों और लॉ कमीशन की टिप्पणियों में भी यह सामने आया है कि कई बार पुलिस का व्यवहार उनके प्रति उचित नहीं रहता, जिससे उनकी गरिमा प्रभावित होती है।सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि जब तक कोई व्यक्ति ITPA की अन्य धाराओं का उल्लंघन नहीं कर रहा है, तब तक केवल सेक्स वर्क करने के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।




