
केंद्र सरकार ने बताया है कि जून 2026 तक यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) प्लेटफॉर्म पर 55.49 करोड़ उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के माध्यम से 24,161.69 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 314.23 लाख करोड़ रुपए रहा। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पिछले पांच वर्षों में लगातार बढ़ा यूपीआई का उपयोग
सरकार के अनुसार, यूपीआई लेनदेन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2021-22 में जहां 4,595.61 करोड़ लेनदेन हुए थे, वहीं यह संख्या बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,161.69 करोड़ तक पहुंच गई। इसी अवधि में लेनदेन का मूल्य 84.16 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 314.23 लाख करोड़ रुपए हो गया।
सुरक्षित और पारदर्शी भुगतान पर सरकार का जोर
सरकार ने बताया कि यूपीआई आधारित लेनदेन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने कई कदम उठाए हैं। इनमें धोखाधड़ी रोकने के लिए जोखिम-आधारित लेनदेन सीमा, अनधिकृत मोबाइल नंबर परिवर्तन और एसएमएस आधारित प्रमाणीकरण के दुरुपयोग से सुरक्षा उपाय तथा यूपीआई एप्लीकेशनों के लिए उन्नत सुरक्षा मानक शामिल हैं।
सुरक्षा ढांचे को किया गया मजबूत
एनपीसीआई ने व्यापक यूपीआई सूचना सुरक्षा ढांचा (सीयूआईएसएफ) 2025 और मोबाइल एप्लीकेशन सुरक्षा ढांचा भी जारी किया है। सरकार के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य यूपीआई इकोसिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करना और डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाना है।
दुनिया के कई देशों तक पहुंचा यूपीआई
सरकार ने बताया कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) के माध्यम से यूपीआई का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी किया जा रहा है। वर्तमान में भूटान, सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, कतर, ग्रीस और कंबोडिया सहित कई देशों में यूपीआई आधारित भुगतान सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे भारतीय पर्यटकों और प्रवासी भारतीयों को सीमा पार भुगतान में सुविधा मिल रही है, जबकि साझेदार देशों को आधुनिक डिजिटल भुगतान ढांचा विकसित करने में भी सहयोग मिल रहा है।





