
रायपुर : छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित एक से बढ़कर एक कई घोटालो के आरोपी रामगोपाल अग्रवाल को ACB और EOW की विशेष अदालत ने 17 जुलाई तक रिमांड पर भेज दिया है, लगभग 3 साल पहले बीजेपी सरकार के सत्ता में आने से पूर्व ही रामगोपाल अग्रवाल अचानक प्रदेश छोड़कर लगभग 3 साल पहले नदारद हो गए थे। उनका इतने अरसे बाद ACB – EOW के दफ्तर में ”दस्तक” देना आम लोगों को किसी रहस्यमय घटनाक्रम से कम नजर नहीं आ रहा है, लम्बे अरसे से फ़रार रामगोपाल अग्रवाल का रहस्मय सरेंडर सुर्ख़ियों में है, इससे ज्यादा दिलचस्प जानकारी सामने आई है कि लापता राम गोपाल अग्रवाल, एक मंदिर में पूजा – पाठ करने के बाद रायपुर दाखिल हुए थे। यही नहीं, उन्होंने रायपुर के एक मंदिर से सीधे ACB – EOW की राह नापी।

यह भी बताया जाता है कि एक ड्राइवर ने मंदिर में ”सेठ जी” को भगवान का भजन करते हुए पाया था। इसके बाद ”सेठ जी” के हुक्म पर ड्राइवर ने सीधे मैरीन ड्राइव इलाक़े में स्थित ACB – EOW के दफ्तर का रुख किया था। सूत्रों की माने तो, एजेंसी के दफ्तर में सेठ जी के पुत्र वैभव अग्रवाल का ”स्वागत सत्कार” परम्परागत ढंग से किया गया था। इसके बाद पुत्र मोह में अपने ड्राइवर के साथ ”सेठ जी” अचानक ACB -EOW के दफ्तर में नजर आये।

कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के ”सरेंडर” का घटनाक्रम काफी दिलचस्प बताया जाता है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार देर शाम तक एजेंसी के दफ्तर में पूछताछ के बाद वैभव अग्रवाल वापस अपने घर लौट गए थे। उनकी गिरफ़्तारी की खबर सिर्फ अटकलों तक सीमित रही, जबकि पुत्र वैभव अग्रवाल की घर वापसी सुनिश्चित हो पाती, इससे पूर्व ही रामगोपाल अग्रवाल खुद बा खुद ACB – EOW की चौखट पर नजर आने लगे थे। उनके ”सरेंडर” की खबर जंगल में आग के फैलने की तर्ज पर सुनाई देने लगी थी। सूत्रों द्वारा रामगोपाल अग्रवाल के रहस्यमय सरेंडर का मामला काफी संवेदनशील बताया जा रहा है। पिता रामगोपाल के ”ACB – EOW – IN” और पुत्र वैभव अग्रवाल के ”OUT FOR HOUSE” ( घर वापसी ) अभियान से जुड़ा बताया जा रहा है।

सूत्र यह भी बताते है कि ACB – EOW के अधिकारियों ने उस ड्राइवर से भी पूछताछ की है, जिसने आरोपी रामगोपाल अग्रवाल को एजेंसी के दफ्तर तक पहुंचाने में मदद की थी। सूत्रों की माने तो रामगोपाल अग्रवाल के ड्राइवर ने तस्दीक की है कि सेठ जी ने फ़रमान जारी कर रायपुर के एक मंदिर में उसे बुलाया था। इसके बाद सेठ जी के निर्देश पर वो मंदिर से सीधे दफ्तर पंहुचा है। हालांकि ACB – EOW की ओर से रामगोपाल अग्रवाल के सरेंडर अथवा गिरफ़्तारी और उनके पुत्र वैभव अग्रवाल की ”घर वापसी” को लेकर अभी आधिकारिक रूप से कोई तथ्य न तो साझा किये गए है और न ही एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब,कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटाले समेत अवैध वसूली के अन्य मामलो में कांग्रेस कोषाध्यक्ष आरोपी रामगोपाल अग्रवाल की एजेंसियों को लम्बे अरसे से तलाश थी। राजनैतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि रामगोपाल अग्रवाल का ”सरेंडर” का प्लान काफी पहले से ही तय कर लिया गया था। यह भी बताया जाता है कि ”रामगोपाल प्रगट उत्सव” के लिए ACB – EOW की टीम ने जिस तर्ज पर हवन – पूजन कार्यक्रम की तैयारी कर रखी थी, वो पूरी तरह से कामयाब रही। अब, इस रहस्यमय सरेंडर की परतें खुलने लगी है, रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ़्तारी के बाद एक बार फिर अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि उनके संगी – साथियो और लाभार्थियों पर भी कानून की गाज गिर सकती है।

जानकारी के मुताबिक आज गुरुवार को EOW ने मेडिकल जांच के बाद आरोपी रामगोपाल अग्रवाल को रायपुर कोर्ट में पेश किया था। इस दौरान कोर्ट में रामगोपाल की अगुवाई और हौसला अफजाई के लिए कई कांग्रेसी कार्यकर्ता भी अदालत परिसर पहुंचे थे। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के पुत्र समेत उनके अन्य समर्थक नजर आये। जानकारी के मुताबिक विशेष अदालत ने प्रकरण की सुनवाई के बाद आरोपी को 17 जुलाई तक EOW की कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया है। ईओडब्ल्यू की टीम ने क़ानूनी कार्यवाही कर आरोपी से पूछताछ का ब्यौरा भी तैयार किया है, आरोपी से एजेंसी के दफ्तर में ही पूछताछ के आसार जाहिर किये जा रहे है। जानकारी के मुताबिक EOW ने कोर्ट से आरोपी की 14 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 9 दिन की कस्टोडियल रिमांड स्वीकृत की है। रामगोपाल अग्रवाल के सरेंडर की पठकथा किस ओर रुख करेगी यह तो वक्त ही बताएगा? फ़िलहाल इस मामले ने पूर्व मुख्यमंत्री बघेल समेत पार्टी के कई नेताओं की नींद उड़ा दी है।







