
रायपुर में जर्जर भवनों का मुद्दा एक बार फिर सामने आ गया है। सदर बाजार में करीब 100 साल पुराने भवन का हिस्सा अचानक सड़क पर गिरने से हड़कंप मच गया। राहत की बात रही कि हादसे के वक्त वहां कोई इसकी चपेट में नहीं आया। घटना के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर भवन के खतरनाक हिस्से को हटाया। इस घटना ने शहर में पहले से चिन्हित 100 से ज्यादा जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फूल चौक, हलवाई लाइन और शदाणी चौक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी पुराने भवन अब चिंता का कारण बने हुए हैं।

नगर निगम की ओर से जर्जर भवनों की पहचान कर भवन मालिकों को नोटिस जारी किए जाते हैं। कई इमारतों को खाली कराने या उन्हें गिराने के निर्देश भी दिए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई में देरी होने से खतरा लंबे समय तक बना रहता है। बारिश के दौरान नमी के कारण कमजोर दीवार, छज्जे और छत के हिस्से गिरने की आशंका और बढ़ जाती है। खासकर उन भवनों के आसपास जोखिम ज्यादा है, जहां नीचे दुकानें संचालित होती हैं और दिनभर लोगों की आवाजाही रहती है। सदर बाजार की घटना ने साफ कर दिया है कि ऐसे भवनों पर समय रहते ठोस कार्रवाई जरूरी है। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक जोन-6 भाठागांव में सबसे ज्यादा 36 जर्जर भवन चिन्हित हैं। इसके बाद जोन-4 मोतिबाग और जोन-8 महोबा बाजार में 24-24, जोन-7 समता कॉलोनी में 14, जोन-5 ईदगाहभाठा में 12, जोन-1 खमतराई में 10, जोन-3 शंकरनगर में 9 और जोन-2 फाफाडीह में 8 भवन शामिल हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चिन्हित भवनों में से कितनों को तत्काल खाली कराया जाएगा और कितनों को गिराने या मरम्मत की जरूरत है। हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय उससे पहले खतरा खत्म करना ही निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।





