पवन खेड़ा की जमानत सुनवाई में हिमंत सरकार पर बरसे जज, अगली तारीख 28 मई…

गुवाहाटी : कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में मंगलवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने असम सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए तीखी टिप्पणी की। पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज एफआईआर के खिलाफ अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी।सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में कहा कि नोटिस जारी होने के बावजूद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक रूप से विवादित बयान दिए, जिससे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। सिंघवी ने ऐसे बयानों पर रोक लगाने की मांग भी की।

इस पर हाईकोर्ट ने असम सरकार को फटकार लगाई और कहा कि कम से कम जवाब दाखिल किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने राज्य के एजी (एडवोकेट जनरल) की गैरमौजूदगी पर भी नाराजगी जताई। बेंच ने साफ कहा कि इस तरह के मामले में जवाब दाखिल होना जरूरी था।अदालत ने राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 मई तय की है। पवन खेड़ा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट पहुंचे थे।

यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था जब पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिंकी भुइयां शर्मा पर कई पासपोर्ट रखने, दुबई में संपत्ति होने और विदेशी कंपनियों से संबंध होने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी थी। वहीं, गुवाहाटी की एक निचली अदालत ने असम पुलिस की गैर-जमानती वारंट की मांग को खारिज करते हुए कहा था कि पुलिस के तर्क केवल अनुमान और अटकलों पर आधारित हैं।

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