New Delhi: Prime Minister Narendra Modi chairs a pre-Budget meeting with leading economists, in New Delhi on Tuesday, December 30, 2025. Union Finance Minister Nirmala Sitharaman, NITI Aayog Vice Chairman Suman Bery and other eminent economists are present. (Photo: IANS/PMO)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर विनम्रता और क्षमाशीलता को लेकर संस्कृत सुभाषित शेयर किया। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा कि विनम्रता, क्षमाशीलता और उत्तम आचरण ही व्यक्तित्व के सच्चे आभूषण हैं। इन गुणों के साथ ही आज देशवासी विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में निरंतर जुटे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत श्लोक लिखा,
‘तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता।
भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत।।’
श्लोक का अर्थ
इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि तेजस्विता, क्षमाशीलता, अदम्य धैर्य, आचरण की पवित्रता, राष्ट्र के प्रति निष्कपट भाव तथा अहंकाररहित व्यक्तित्व ये सभी गुण दैवी संपदा को प्राप्त व्यक्तित्व के लक्षण कहे गए हैं।
बता दें कि प्रधानमंत्री की ओर से गुरुवार को भी सुभाषित शेयर किया गया था। उन्होंने लिखा था कि महान क्रांतिकारी और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक वीर सावरकर जी को उनकी जयंती पर सादर नमन! वीरता और बौद्धिकता से भरा उनका व्यक्तित्व देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।
पीएम ने ‘अनन्तोद्भूतभूतौघसङ्कुले भूतलेऽखिले। शस्त्रे शास्त्रे त्रिचतुराश्चतुरा यदि मादृशाः।।’ श्लोक साझा किया था, जिसका हिंदी अर्थ है कि संसार में अनेक लोग केवल ज्ञान या केवल शक्ति के लिए प्रसिद्ध होते हैं, किंतु वास्तव में वे धीर गंभीर व्यक्तित्व अत्यंत विरले होते हैं जो ज्ञान और पराक्रम दोनों से युक्त हों।
प्रधानमंत्री ने बुधवार को शेयर किए गए सुभाषित में लिखा था कि निरंतर प्रयास, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज देशवासी इसी भावना से भारतवर्ष को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं।
उन्होंने ‘यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात्। अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्थान् निवर्तते।।’ जिसका हिंदी अर्थ होता है कि जो व्यक्ति जिस लक्ष्य की प्रार्थना या इच्छा करता है और उसे पाने के लिए निरंतर क्रमबद्ध प्रयास करता है, वह उस लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त कर लेता है, बशर्ते वह बीच में हार मानकर अपने मार्ग से पीछे न हटे।




