‘माथे पर चंदन,मंगलवार का दिन…’, भगवा गमछा डालकर मछली खाते अनुराग ठाकुर, पश्चिम बंगाल से आया वीडियो तो देश में क्यों मच गया बवाल ?

नई दिल्ली : देश की राजनीति में कब कौन सा मुद्दा बड़ा बन जाए, कहना मुश्किल है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है. जहां आमतौर पर चुनाव विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर लड़े जाते हैं, वहीं इस बार ‘माछ-भात’ यानी मछली-चावल चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा बन गया है. इसी बीच मंगलवार को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के मछली खाते हुए वीडियो के सामने आ जाने से मामले ने और तूल पकड़ लिया है. पहली नजर में यह एक सामान्य बात लग सकती है, लेकिन माथे पर चंदन का तिलक, कंधे पर भगवा गमछा और दिन मंगलवार होने की वजह से यह वीडियो चर्चा का विषय बन गया. विपक्ष ने इसे तुरंत मुद्दा बना लिया और बीजेपी पर निशाना साधा. वहीं बीजेपी का कहना है कि यह बंगाल की संस्कृति का सम्मान है. देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और अब यह सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति और पहचान की राजनीति का हिस्सा बन चुका है. समझते हैं पूरी बात.

कैसे शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला एक वीडियो से शुरू हुआ, जो चुनाव प्रचार के दौरान सामने आया. इसमें अनुराग ठाकुर और कुछ अन्य नेता माछ-भात खाते नजर आए. शुरुआत में यह एक सामान्य चुनावी गतिविधि लगी, लेकिन जैसे ही लोगों ने ध्यान दिया कि मंगलवार का दिन है और ठाकुर ने तिलक व भगवा गमछा पहना है, विवाद शुरू हो गया. सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे अलग-अलग नजरिए से देखना शुरू कर दिया. कुछ ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ दिया, तो कुछ ने इसे राजनीतिक स्टंट कहा. देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया और देशभर में बहस का मुद्दा बन गया.

पश्चिम बंगाल में मछली क्यों बनी मुद्दा

पश्चिम बंगाल में मछली सिर्फ खाना नहीं, बल्कि लोगों की पहचान का हिस्सा है. ममता बनर्जी  पहले ही यह आरोप लगा चुकी हैं कि बीजेपी सत्ता में आई तो मछली और मांस पर रोक लग सकती है. इस बयान ने लोगों के बीच चिंता पैदा की थी. इसी को काउंटर करने के लिए बीजेपी नेताओं ने मछली खाते हुए वीडियो और तस्वीरें साझा कीं है और चुनाव प्रचार के पहले दिन से इस नैरेटिव को कम करने के लिए जमकर मछली का प्रचार कर रहे हैं. अनुराग ठाकुर का वीडियो भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे यह संदेश दिया जाए कि बीजेपी पार्टी खाने-पीने की आजादी के खिलाफ नहीं है. लेकिन बीजेपी के इस कदम से विपक्ष ने जोरदार हमला बोला है. कई नेता तंज कस रहे हैं कि जो लोग दूसरे राज्यों में मांस और मछली की दुकानों को बंद कराते हैं, वही बंगाल में आकर मछली खा रहे हैं. 

वीडियो सामने आते ही विपक्ष ने बीजेपी पर हमला तेज कर दिया. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अनुराग ठाकुर के वीडियो पर तंज कसते हुए कहा कि यह तस्वीरें सच्चाई दिखा रही हैं. उन्होंने लिखा कि “तस्वीरें अक्सर सच सामने ले आती हैं और लोगों का असली चेहरा दिखा देती हैं. कथनी और करनी के बीच का फर्क साफ नजर आ रहा है.” उनका इशारा बीजेपी के नेताओं के व्यवहार और उनके दावों के बीच अंतर की ओर था.

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “मंगलवार के दिन माथे पर तिलक लगाकर मांसाहारी भोजन करना… क्या वोट के लिए लोग भगवान हनुमान का भी अपमान करने को तैयार हैं?” उन्होंने इसे बीजेपी का दोहरा रवैया बताया और सवाल उठाया कि क्या यह सिर्फ चुनावी फायदे के लिए किया जा रहा है.

दिल्ली के पूर्व विधायक विनय मिश्रा ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “गले में भगवा गमछा, माथे पर तिलक और मंगलवार का दिन… इसी दिन मछली खाना कई लोगों को गलत लग सकता है. मैं खुद शाकाहारी हूं और मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या खाता है, लेकिन समस्या तब होती है जब कुछ लोग दूसरों को खाने से रोकते हैं और खुद अलग व्यवहार करते हैं.” उन्होंने इसे ‘डबल स्टैंडर्ड’ बताया.पूर्व विधायक ने आगे लिखा, ”मैं खुद शाकाहारी हूं. मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई क्या खाता है. यह उनकी मर्जी है, लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब यही लोग दूसरों को खाने से रोकते हैं, पीटते हैं, गाली-गलौज और धमकियां देते हैं, और खुद भगवा गमछा और माथे पर चंदन का तिलक लगाकर मंगलवार को मांस खाते हैं. यह शर्मनाक है.”

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस पर चुटकी ली. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “आपको बंगाल में मछली खाते देख अच्छा लगा. चिंता मत कीजिए, यहां ऐसा नहीं है कि आपको मछली खाने पर कोई रोकेगा. आप आराम से हुगली नदी पर घूमिए और मछली का आनंद लीजिए.” उनका इशारा बीजेपी के आरोपों और बंगाल की आजादी वाली छवि की तरफ था. यानी अब इस मामले में  सोशल मीडिया से लेकर देश की राजनीति में अब इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त बहस चल रही है. कोई इसे खाने की आजादी से जोड़ रहा है, तो कोई इसे धर्म और संस्कृति के नजरिए से देख रहा है.

सोशल मीडिया पर जंग

इस विवाद को सबसे ज्यादा हवा सोशल मीडिया से मिली. वीडियो वायरल होते ही ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बहस छिड़ गई. #FishPolitics जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे. कुछ लोगों ने इसे मजाक में लिया और मीम्स बनाए, जबकि कुछ ने इसे गंभीर मुद्दा बताया. सोशल मीडिया पर दो साफ धड़े बन गए हैं. एक पक्ष बीजेपी के साथ और दूसरा विपक्ष के साथ है. इससे यह मुद्दा और ज्यादा बड़ा हो गया और राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन गया.

चुनाव पर असर कितना

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं. बंगाल में खान-पान और संस्कृति का मुद्दा बेहद संवेदनशील है. ऐसे में मछली को लेकर उठी बहस मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है. ममता बनर्जी की पार्टी इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी इसे अपने बचाव में इस्तेमाल कर रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा जोर पकड़ सकता है.

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