
रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद उन्हें सशर्त जमानत दे दी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि टुटेजा फिलहाल छत्तीसगढ़ में प्रवेश नहीं करेंगे और मामले से जुड़े किसी भी गवाह या सबूत को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अनिल टुटेजा रिटायर हो चुके हैं और अन्य मामलों में पहले ही जमानत पा चुके हैं। वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने जमानत का विरोध करते हुए उन्हें कई मामलों का कथित “मुख्य साजिशकर्ता” बताया।सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामले में अभी करीब 85 गवाहों से पूछताछ बाकी है और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। इसी आधार पर लंबे समय से जेल में बंद होने को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें राहत दी। अनिल टुटेजा जनवरी 2024 से जेल में बंद हैं और डीएमएफ केस आखिरी मामला था, जिसमें उन्हें अब तक जमानत नहीं मिली थी।

इधर, EOW और ACB ने डीएमएफ घोटाले में विशेष अदालत में करीब 5 हजार पन्नों का दूसरा पूरक चालान भी पेश किया है। इसमें वित्तीय लेन-देन, गवाहों के बयान और कथित अनियमितताओं से जुड़े कई दस्तावेज शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब भी डीएमएफ फंड के इस्तेमाल और टेंडर प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही हैं।डीएमएफ यानी डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन फंड का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए किया जाता है। आरोप है कि कोरबा समेत कई जिलों में टेंडरों के जरिए भारी कमीशनखोरी और अवैध वसूली का खेल चला। जांच एजेंसियों के अनुसार, टेंडर राशि का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर कमीशन के रूप में अधिकारियों तक पहुंचाया गया।







