
रायपुर : वित्तीय वर्ष 2025-26 के ख़त्म होने में अब बामुश्किल 10 दिन ही शेष बचे है,ऐसे में कई मलाईदार विभागों में सरकारी धन लूटने की होड़ मची है,ऐसे विभागों में तैनात जिम्मेदार नौकरशाहों ने कमीशनखोरी का पैमाना 70 फीसदी तक सेट कर दिया है|ये अफसर “जेम पोर्टल” की निर्धारित दरों से कई गुना अधिक दाम पर घटिया सामग्री की आपूर्ति छत्तीसगढ़ शासन को कर रहे है| कमीशनखोरी के बड़े ग्राफ के चलते अफसरों का ध्यान सिर्फ मोटी रकम अपनी जेब में डालने तक ही सीमित हो गया है|

ताज़ा मामले में हॉर्टिकल्चर विभाग में 2 हज़ार रुपए प्रति नग वाला वर्मी कम्पोस्ट बेड की खरीदी 16,500 रुपये में शुरू हो गई है| शासन की तिजोरी पर चूना लगाने के लिए प्रदेश के एक-दो जिलों को छोड़ शेष सभी जिलों में उस दागी कंपनी को एक तरफ़ा वर्क ऑर्डर थमा दिया गया है,जो पिछले 5 सालों से देश की सबसे ऊंची दरों पर घटिया सामग्री की आपूर्ति कर रही है | यह भी बताया जाता है,कि इस कंपनी ने लगभग 80 करोड़ रुपए पर हाथ साफ़ करने के लिए खुले बाजार के अलावा “जेम पोर्टल” में दर्ज़ कीमत से परे एल-1 ( L-1) अर्थात प्रतियोगिता में अन्य कंपनियों की तुलना में सबसे कम “दर” दर्ज़ कर अपनी ही अघोषित प्रतियोगी कंपनियों को पछाड़ दिया है |

सूत्र तस्दीक करते है,कि “जेम” की दरो में धांधली और आपूर्तिकर्ता कंपनी से मोटा कमीशन हासिल करने के लिए हॉर्टिकल्चर विभाग में तैनात एक IAS अधिकारी ने कायदे-कानूनों को ताक में रख कर खुली लूट का फरमान जारी कर दिया है|हैरानी वाली बात यह है,कि मलाईदार विभागों में “जेम पोर्टल” में सेंधमारी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क ने अपना सिक्का जमा लिया है| इस गिरोह में शामिल कम्पनियाँ एल-1, एल-2,एल-3 का तमगा हासिल करने के लिए आपसी तौर पर तालमेल कर गैर कानूनी रूप से वर्क ऑर्डर हासिल कर रही है|

एआर एंटरप्राइजेज,आर्मी इंफोटेक,विश कंप्यूटर्स नामक तीनों कंपनियों की गैर कानूनी गतिविधियों को लेकर हॉर्टिकल्चर विभाग में गहमा-गहमी मची है|शराब और कोल खनन घोटाले में सुर्ख़ियों में आए ED और EOW के आरोपी जिग्नेश पटेल का इन तीनों ही कंपनियां में कब्ज़ा बताया जाता है|यह भी बताया जाता है,कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में इन तीनों ही कंपनियों को आगे कर मात्र 8 लाख की सामग्री 80 करोड़ में खरीदी जा रही है|

यह भी बताया जाता है,कि कांग्रेस की तत्कालीन भू-पे सरकार के कार्यकाल के आख़िरी वित्तीय वर्ष 2022-23 में वर्मी कम्पोस्ट बेड की आपूर्ति इसी जिग्नेश पटेल की कम्पनी ने 7 हज़ार रूपये प्रति बेड की दरों पर की थी|लेकिन,बीजेपी के सत्ता में आने के बाद पुरानी दरों में कमीशनखोरी का ग्राफ़ 70 गुना से ज्यादा का आंकड़ा पार कर चुका है| सूत्र तस्दीक करते है,कि जिग्नेश पटेल के कब्जे वाली बिडर कंपनियों का गुजरात की किसी “हैकर कंपनी” के साथ करीब का नाता है| “जेम पोर्टल” में छेड़छाड़ को लेकर भी जिग्नेश पटेल का नाम सूत्र जाहिर कर रहे है| उनके मुताबिक,ACB-EOW हो या फिर ED,इन एजेंसियों में तैनात अफसरों से करीबी संबंध का हवाला देकर भी देश की सबसे ऊंची दरों पर,प्रदेश के तमाम जिलों से ये कंपनियां वर्क आर्डर हासिल कर रही है|

जानकारी के मुताबिक,केंद्र सरकार की FRA योजना के तहत हॉर्टिकल्चर विभाग में उद्यानिकी योजनाओं के लिए सालाना सैंकड़ो-करोड़ की विभिन्न सामग्री की आपूर्ति की जाती है| इसकी खरीदी “जेम पोर्टल” के माध्यम से होने के चलते प्रथम दृष्टया पारदर्शिता और प्रतियोगिता के तहत “मूल्य निर्धारण” का अंदेशा होता है| लेकिन,हकीकत इसके ठीक विपरीत है,”जेम पोर्टल” अब भ्रष्टाचार का बड़ा डिजिटल केंद्र साबित हो रहा है| यह भी बताया जाता है,कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जिग्नेश पटेल से जुड़ी ऐसी ही कई कंपनियों ने सरकारी तिजोरी पर करीब डेढ़ हज़ार करोड़ की चपत लगाई थी|

सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि 40 हज़ार भारतीय मुद्रा में आने चाइना मेड “पावर बिडर मशीन” को “मेड इन इंडिया” बता कर जिग्नेश पटेल ने हॉर्टिकल्चर विभाग को करीब 500 करोड़ का चूना लगाया था|इस मामले की कई शिकायतों के बावजूद अभी तक विभाग ने FIR तक दर्ज़ नहीं कराई है,जबकि विधानसभा में मामले के गरमाने और वैधानिक कार्यवाही के आश्वासन के बाद भी “किसान एग्रो” नामक कंपनी के करोड़ो के बिलों का भुगतान पिछले वित्तीय वर्ष में कर दिया गया था|

बीजेपी के सत्ता में आने के बाद “किसान एग्रो” नामक कंपनी अब नए नाम और नई पहचान के साथ राज्य सरकार को चूना लगा रही है|एक शिकायत में हॉर्टिकल्चर विभाग के आईएएस डायरेक्टर का काला चिट्टा पेश कर वैधानिक कार्यवाही की मांग की गई है|फ़िलहाल,शिकायतकर्ताओं ने विभागीय मंत्री रामविचार नेताम से फौरी कार्यवाही कर धांधली रोकने की मांग की है |
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