
नई दिल्ली: – त्योहारों का मौसम करीब आते ही घरेलू रसोई का बजट बिगड़ने की चिंता बढ़ गई है। प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसके अलावा दाल, चावल, आटा और हरी सब्जियों के भाव में भी उतार-चढ़ाव जारी है। फिलहाल सबसे ज्यादा तेजी प्याज की कीमतों में देखने को मिली है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 24 अगस्त को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 59 फीसदी बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी समय यह 27.37 रुपये प्रति किलो थी। वहीं प्याज की औसत थोक कीमत भी करीब 68 फीसदी बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गई, जो एक साल पहले 21.23 रुपये प्रति किलो थी।

कीमतों पर लगाम के लिए सरकार ने बढ़ाई प्याज की सप्लाई: प्याज के बढ़ते दाम को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के नासिक से देश के बड़े खपत वाले शहरों तक प्याज भेजने की व्यवस्था तेज कर दी है। इसके लिए रेलवे के जरिए विशेष रैक, यानी ‘कांदा एक्सप्रेस’, का इस्तेमाल किया जा रहा है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक इन रैक में लादा गया प्याज बुधवार तक संबंधित बाजारों में पहुंचने की उम्मीद है। सोमवार को चेन्नई में प्याज 60 रुपये, दिल्ली में 65 रुपये और कोलकाता में 53 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिका। सरकार का कहना है कि प्याज की महंगाई के पीछे सिर्फ उत्पादन में कमी ही वजह नहीं है।

नासिक की मंडी कीमतों पर सरकार की नजर, मुनाफाखोरी का शक: उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने नासिक की मंडी कीमतों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नासिक में मंडी भाव दिल्ली से ज्यादा होना सामान्य स्थिति नहीं है और इससे मुनाफाखोरी या सट्टेबाजी की आशंका पैदा होती है। सरकार के पास इस साल करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है और इसे ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए अलग-अलग राज्यों के प्रमुख बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। साथ ही एनसीसीएफ और नेफेड के माध्यम से खुदरा बाजार में प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार का दावा है कि आने वाले महीनों में घरेलू मांग पूरी करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त बनी रहेगी।






