
सागर: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भले ही साल 2000 में अलग-अलग राज्यों के रूप में अस्तित्व में आए हों, लेकिन अब दोनों के बीच सड़क कनेक्टिविटी और मजबूत होने जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार भोपाल से रायपुर तक सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस बड़ी परियोजना के पूरा होने के बाद भोपाल से रायपुर का सफर, जो फिलहाल करीब 14 से 15 घंटे का है, घटकर लगभग 7 से 8 घंटे रह सकता है। इस परियोजना से बुंदेलखंड और महाकौशल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कई प्रमुख शहरों को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

बुंदेलखंड से जबलपुर और फिर रायपुर तक कनेक्टिविटी: इस मेगा प्रोजेक्ट को मुख्य रूप से दो हिस्सों में विकसित करने की योजना है। पहला हिस्सा भोपाल से सागर और दमोह होते हुए जबलपुर तक सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का होगा। इसके बाद दूसरा हिस्सा जबलपुर से मंडला होते हुए छत्तीसगढ़ की सीमा और चिल्फी घाट के रास्ते रायपुर तक कनेक्टिविटी देगा। बताया जा रहा है कि जबलपुर से छत्तीसगढ़ बॉर्डर तक सड़क चौड़ीकरण और निर्माण पर करीब 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं। परियोजना पूरी होने के बाद भोपाल से जबलपुर और आगे रायपुर तक यात्रा पहले के मुकाबले कहीं तेज और सुगम हो जाएगी। वहीं जबलपुर से रायपुर का सफर भी करीब 7-8 घंटे से घटकर लगभग 3-4 घंटे तक आने की उम्मीद है।

120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफर, दोनों राज्यों को बड़ा फायदा: प्रस्तावित एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखने की योजना है। भोपाल से जबलपुर की मौजूदा करीब 320 किलोमीटर दूरी भी नई ग्रीनफील्ड सड़क बनने के बाद लगभग 255 किलोमीटर तक सिमट सकती है। इससे भोपाल-जबलपुर यात्रा का समय करीब 6-7 घंटे से घटकर 3-4 घंटे रह सकता है। इस परियोजना से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच व्यापार, उद्योग और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। महाकौशल और बुंदेलखंड के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, वहीं भिलाई, रायपुर, कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के साथ कनेक्टिविटी बेहतर होगी। एक्सप्रेसवे के आसपास लॉजिस्टिक हब, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विकसित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल सकता है।





