
रायपुर : छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य महकमा आम जनता के स्वास्थ्य के प्रति कितना सचेत है,और विभाग के आईएएस सचिव किस बेहतर तरीके से पीड़ितों का ख़्याल रख रहे है,इसका नायाब नमूना सामने आया है| प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव और 2004 बैच के होनहार आईएएस अमित कटारिया की कार्यप्रणाली और बौद्धिक क्षमता से अब स्वास्थ्य महकमें के साथ-साथ पूरा प्रदेश हैरत में है|

दरअसल,इन साहब ने विभाग में कार्यरत 12 वीं पास कार्यालय सहायकों को आदेश जारी कर फूड सेफ्टी ऑफिसर के पद पर नियुक्ति दे दी है | जबकि,इस पद के लिए निर्धारित न्यूनतम ”योग्यता-अहर्ता” MBBS के अलावा MBA,DAIRY TECHNOLOGY, FOOD TECHNOLOGY, BIOTECHNOLOGY में स्नातक ( GRADUATES ) की डिग्री अनिवार्य बताई जाती है | स्वास्थ्य सचिव पर भ्रष्टाचार के गंभीर दर्जनों आरोपों के बीच 12वीं पास कार्यालय सहायकों को आख़िर कैसे फूड सेफ्टी ऑफिसर बना दिया गया ? फैसले से बवाल मच गया है |

बताते है,कि बॉलीवुड फिल्म “हर दिल जो प्यार करेगा” का मशहूर गीत “ऐसा पहली बार होता है,17-18 सालों में,प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में गूंज रहा है|इस ‘‘गोलमाल खेल” के रहस्यों पर से भी अब पर्दा उठने लगा है |IAS का नया कारनामा MBBS-MBA समेत अन्य डिग्रीधारी योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों के सपनों पर पानी फेरने से जोड़कर देखा जा रहा है |योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर 12वीं पास बाबुओं को फूड सेफ्टी ऑफिसर बनाकर स्वास्थ्य सचिव आखिर जनता को कौन सा इंजेक्शन “ठोकना” चाहते है ? समझदारों के बीच ”समझ-बूझ” से बाहर का मसला बताया जा रहा है |

फूड सेफ्टी ऑफिसर बने “साहब” में से किसी के पास ”पीजी” बेसिक डिग्री नहीं –
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य महकमे में तैनात सचिव ने “प्रमोशन” का जो नया फार्मूला तय कर स्वघोषित नियम बनाया है,उससे विभाग में ही हड़कंप मच गया है|सूत्रों की माने तो,आदेश देखकर ही कई वरिष्ठ अफसरों का ”माथा ठनक” गया है|जानकारी के मुताबिक,बाबूओं के सहायक रहे 13 कर्मचारियों को फूड सेफ्टी ऑफिसर (एफएसओ ) के पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई है,इनमें से एक के पास भी ऐसी स्नातक व स्नातकोत्तर (पीजी) की डिग्री नहीं है,जो एफएसएसएआई द्वारा तय बेसिक विषय से सम्बद्ध हो| प्रशासनिक मामलों के विशेषज्ञों की स्पष्ट राय है, कि यदि कर्मचारी के पास मूल अहर्ता ही नहीं है, तो उसे किसी भी परिस्थिति में प्रमोशन नहीं दिया जा सकता। उनकी माने तो,नियमों में संशोधन कर अपात्रों को उपकृत करने का यह मामला प्रचलित कायदे-कानूनों के उल्लंघन और असंवैधानिक फैसलों से जुड़ा है।

इन कार्यालय सहायक को प्रमोशन देकर बनाया एफएसओ-
जानकारी के मुताबिक अंजली नायक : सरगुजा से कोरिया,सुमन अग्रवाल : रायगढ़ से सारंगढ़,निधि जायसवाल : कोरिया से मुंगेली,सुमन ठाकुर : बलौदा से कांकेर,वीणा साहू : सरगुजा से सूरजपुर,दिव्या सिंह राजपूत : दुर्ग से दुर्ग,अर्चना तिवारी : रायपुर से गरियाबंद,निधि यादव : रायपुर से महासमुंद,इन्द्रजीत सिंह : सरगुजा से सरगुजा,प्रमोद वर्मा : सूरजपुर से दंतेवाड़ा,सरिता मरावी : जांजगीर-चांपा से सक्ती,भूपेन्द्रनाथ सिंह : राजनांदगांव से मानपुर-मोहला और रुखमणी कंवर को पदोन्नत कर बलौदाबाजार से पेंड्रा-गौरेला स्थानांतरित कर दिया गया है | सरकार द्वारा तय नियम के अनुसार, एफएसओ पद पर नियुक्ति के लिए फूड टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, डेयरी टेक्नोलॉजी या एमबीए जैसी उच्च व तकनीकी डिग्रियां होना अनिवार्य है।

यह भी बताया जाता है,कि प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव व फूड सेफ्टी कमिश्नर अमित कटारिया के हस्ताक्षर से सप्ताह भर पहले जारी इस ”नमूना आदेश” के सामने आने के बाद विभाग में “बंदर के हाथ अस्तुरा लगने” जैसा हड़कंप मच गया है। जानकार यह भी तस्दीक करते है,कि पदोन्नति के लिए अनिवार्य बेसिक डिग्री होना बेहद जरूरी है,क्योंकि एफएसएसएआई के नियम अत्यंत सख्त हैं। इसके बिना सैपलिंग समेत सभी कार्यों में केंद्रीय निकाय की मान्यता ही नहीं मिल पाएगी | प्रदेश में आम जनता की सेहत से सीधा सरोकार रखने वाले खाद्य सुरक्षा विभाग में पहली बार नियुक्तियों में इस तरह की अनियमितता भी सामने आई है|

जानकारों के मुताबिक, प्रदेश गठन के बाद छत्तीसगढ़ व्यापमं के जरिए ही एफएसओ के पदों की सीधी भर्ती होती रही है। लेकिन,दावा किया जा रहा है,कि स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य संवैधानिक संस्थानों से विभागीय सचिव को सरोकार नहीं रखते | विभागीय सूत्र तस्दीक करते है,कि एफएसओ बनाए गए ये आमतौर पर ये बाबूनुमा सहायक,एफएसओ द्वारा लिए गए खाद्य नमूनों (सैंपल) पर केवल लेबल लगाकर दस्तावेजों को कोर्ट में प्रस्तुत करने का कार्य करते है | ऐसे नमूना सहायकों का मूल काम एफएसओ के साथ मौके पर जाकर सैंपलिंग करना है।

फ़िलहाल,सरकारी अस्पतालों में कभी दवाओं तो,कभी डॉक्टरों की कमी और सुविधाओं की मांग को लेकर कोहराम मचा है,विभागीय सप्लाई में भ्रष्टाचार आम बताया जाता है | इस कड़ी में योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर 12 वीं पास को फ़ूड सेफ्टी ऑफिसर बनाए जाने का मामला सरकार के सुशासन पर पलीता लगाने में कारगर आंका जा रहा है | स्वास्थ्य सचिव की कार्यप्रणाली समझदारों के बीच ”समझ-बूझ” से बाहर के बूते का मसला बन गया है |
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