
बालोद/रायपुर : 45 करोड़ की फर्जी करेंसी का खेल या ठगी का जाल ? छत्तीसगढ़ पुलिस की कहानी ने राज्य में नकली नोट चलाने का मंसूबा रखने वाले निवेशकर्ता कारोबारियों की राह आसान कर दी है|नकली करेंसी की डील फेल होने और निवेशकर्ता कारोबारी को करोड़ों का चूना लगने के बाद पुलिस की थ्योरी जनता के गले नहीं उतर रही है| अंदेशा जाहिर किया जा रहा है,कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने ऐसे और भी निवेशकर्ताओं को धर दबोचने के बजाए “पीड़ित” बता कर न्याय का रास्ता सुलभ कर दिया,तो आने वाले दिनों इस प्रदेश में नकली नोट का चलन ना केवल आम हो जायेगा ? बल्कि,फेक करेंसी की इंड्रस्टी भी यहाँ कुटीर उद्योग की शक्ल ले सकती है ?

दरअसल,छत्तीसगढ़ पुलिस का अजीबों-गरीब रवैया सुर्ख़ियों में है| 45 करोड़ के नकली नोटों का सपना दिखाकर 1 करोड़ 13 लाख की ठगी के एक मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए,इस गैर-कानूनी कारोबार का ना केवल पर्दाफ़ाश किया,बल्कि गिरोह में शामिल,दो महिलाओं को नागपुर से गिरफ्तार कर रायपुर भी ले आई|पुलिस की इस त्वरित कार्यवाही की जहाँ प्रशंसा हो रही है,वही ठगी की वारदात की FIR दर्ज कराने वाले कथित संदेही को ”आरोपी” नहीं बनाने को लेकर जनता हैरान भी है ! पुलिस ने मामले की शिकायत के बाद नियमानुसार FIR दर्ज कर आरोपियों को तो धर दबोचा लेकिन,बाज़ार में नकली नोट चलाने का मंसूबा रखने वाले निवेशकर्ता कारोबारी को ”पीड़ित-फरियादी” बना दिया|

यह भी बताया जाता है,कि ठगी करने वाले आरोपी लगभग 6 महीने तक नए-नए बहाने बनाकर रक़म की उगाही करते रहे जबकि, निवेशकर्ता कारोबारी करोड़ों के नकली नोट बाजार में उतारने का मंसूबा पाले रहा| उसके अरमानों पर,उस समय पानी फिर गया,जब यह गिरोह वादे के मुताबिक,नकली नोटों की ख़ेप की तय समय पर डिलेवरी करने में नाकाम रहा|उसे ठगी का एहसास उस वक्त हुआ,जब 45 करोड़ की ”नकली करेंसी” तिजोरी में जमा होने के बजाए जेब से 1 करोड़ 13 लाख के असली नोटों का चूना लग गया|

ठगी के शिकार कारोबारी की दास्तान,आरोपियों की दलीले और पुलिस की थ्योरी सुर्ख़ियों में है,इस बीच पुलिस विवेचना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है ? आरोपियों की धरपकड़ के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने अपराध को लेकर जो दलीले पेश की है,उसने छत्तीसगढ़ पुलिस की मंशा और कार्यप्रणाली पर भी सवालियां निशान लगा दिया है ?

छत्तीसगढ़ में 45 करोड़ के नकली नोटों की खेप के बाज़ार में उतरने से पहले ही पुलिस ने सौंदेबाज़ी नेटवर्क को नेस्तनाबूत कर दिया है,जिसके तहत 1 करोड़ 13 लाख के असली नोटों की निवेशकर्ता द्वारा अदायगी कर दी गई थी| मामला भले ही,ठगी का निकला हो,लेकिन नकली नोट के चलन को बाजार में उतारने की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर पुलिस ने आरोपियों के अरमानों पर पानी फेर दिया है | इसके साथ ही,मामले की विवेचना के दौरन पुलिस की थ्योरी पर बड़े सवाल खड़े हो गए है |

यह भी बताया जाता है,कि ठगों ने अमेरिकी केमिकल के जरिए ”नकली नोट” बनाने की प्रक्रिया से कारोबारी निवेशकर्ता कथित फ़रियादी को रूबरू भी कराया था | इस कारोबारी ने ‘काले कागज’ से करोड़ों के नकली नोट बनाने के खेल में ना केवल खुद की भी हिस्सेदारी तय की थी|बल्कि,उसने रातों-रात करोड़पति बनने के चक्कर में फर्जी फंड और विदेशी तकनीक को अपनाने में भी दिलचस्पी दिखाई थी | हालांकि,शिकायतकर्ता ठगों के बिछाएं जाल में आसानी से फंस गया था |

राज्य में नकली नोट के कारोबार की नींव मजबूत करने में जुटे कथित फरियादी की थ्योरी में रंगी छत्तीसगढ़ पुलिस की विवेचना जोरों पर जारी बताई जाती है|रायपुर में बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाने में भी कोई देरी नहीं की|पुलिस के मुताबिक, नागपुर और मुंबई से दो महिलाओं समेत तीन आरोपियों को हिरासत में लिया गया है|यह भी बताया जाता है,कि नकली नोटों के खेल में भाग्य आज़माने वाले कथित कारोबारी ने “बिजनेस मीट” के लिए मुंबई और चेन्नई तक की उड़ान भी भरी थी|पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार,निवेशकर्ता कारोबारी को पीड़ित करार देना,नकली नोटों के कारोबार को जायज़ ठहराने जैसा प्रतीत हो रहा है।

जानकारों के मुताबिक,गैर-कानूनी कारोबार और सौंदों के लिए जारी इस गिरोह की कवायतें गंभीर अपराध के दायरे में है,जिस तर्ज पर “रिश्वत देना या लेना और दहेज़ देना-लेना दोनों अपराध के दायरे में है,ऐसे में नकली नोटों का कारोबार भी गंभीर देशद्रोह के आपराधिक दायरे में बताया जाता है|

कानून के जानकारों के मुताबिक,जाली या नकली नोटों का लेन-देन एक गंभीर गैर-जमानतीय अपराध है,भारतीय न्याय संहिता की धारा 179 के तहत जाली नोट खरीदना, बेचना या चलाने पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। इसे चलन में लाने के लिए अपने कब्ज़े में रखने का आरोप सिद्ध होने पर 7 साल की सजा हो सकती है। आरबीआई के नियमों के तहत सिर्फ अधिकृत बैंक से नोटों (चलनशील मुद्रा) का एक्सचेंज किया जा सकता हैं। यही नहीं,नकली नोटों का अवैध व्यापार मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आता है।

आर्थिक आपराधिक मामलों के विशेषज्ञ,वरिष्ठ पत्रकार विष्णु सरकार के मुताबिक, केवल पुराने दुर्लभ ऐतिहासिक नोटों का कानूनन संग्रह ही मान्य है। लिहाज़ा,बालोद जिले से सामने आए कथित कारोबारी को पीड़ित बताए जाने का मामला नकली नोट के कारोबार को “पुलिस की प्रोत्साहन योजना” से जोड़कर देखा जा रहा है|हालांकि,अपराध की प्रकृति और गिरफ्तार आरोपियों को लेकर पुलिस की अपनी दलीले है| अब देखना गौरतलब होगा,कि नकली नोट के बढ़ते प्रचलन को हतोत्साहित करने के लिए पुलिस क्या रुख़ इख़्तियार करती है |




