ओडिशा के पुरी में आयोजित विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा इस बार आस्था के साथ-साथ विवादों के कारण भी सुर्खियों में है। भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक ‘पाहंडी’ यात्रा के दौरान उन्हें पुष्प मुकुट ‘ताहिया’ के बिना रथ तक ले जाने पर सियासी घमासान छिड़ गया है। बीजेडी और कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सदियों पुरानी परंपरा तोड़ने का आरोप लगाया है, जबकि मंदिर प्रशासन ने इसके पीछे खराब मौसम और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है।

दरअसल, भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पाहंडी यात्रा में ‘ताहिया’ विशेष धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। इस बार भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तो ताहिया के साथ रथ तक पहुंचे, लेकिन भगवान जगन्नाथ का ताहिया रास्ते में हटा दिया गया। मंदिर प्रशासन का कहना है कि तेज बारिश से ताहिया भारी हो गया था और सुरक्षा के लिहाज से उसे हटाना पड़ा। वहीं कुछ सेवायतों ने दावा किया कि ताहिया में लगी बांस की नुकीली छड़ियां यात्रा के दौरान परेशानी पैदा कर रही थीं, इसलिए यह फैसला लिया गया।

हालांकि, विपक्ष ने इस सफाई को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। बीजेडी और कांग्रेस का कहना है कि रथ यात्रा हर साल बारिश के मौसम में होती है, लेकिन पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी। विपक्ष ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए राज्य सरकार से माफी की मांग की है। वहीं सरकार का कहना है कि भारी बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद रथ यात्रा शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुई। अब यह मामला धार्मिक परंपरा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।




