
अमेरिका ने रविवार (स्थानीय समय) को ईरान पर एक बार फिर सैन्य कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, इन हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नागरिक जहाजों और वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था। सेंटकॉम ने कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश पर यह अभियान चलाया गया, ताकि हालिया घटनाओं के लिए ईरानी बलों को जवाबदेह ठहराया जा सके। हमलों के बाद दक्षिणी ईरान के जास्क, बंदर अब्बास और सीरिक समेत कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
अमेरिकी कार्रवाई पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि इससे पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि यदि किसी देश ने अपनी जमीन या सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए करने दिया, तो उसे आत्मरक्षा के तहत वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा। वहीं, अमेरिका की ओर से मस्कट वार्ता को लेकर किए गए दावों को भी ईरान ने पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें झूठा बताया और संयुक्त राष्ट्र से अमेरिकी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने की मांग की।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात पूर्ण युद्ध की ओर बढ़े तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है और हालिया सैन्य कार्रवाई के बावजूद समुद्री आवाजाही जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हो सके, जिसके बाद अमेरिका ने सैन्य दबाव बढ़ाने का फैसला लिया।







