
रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन वेदांता पावर प्लांट हादसा सदन में प्रमुख मुद्दा बन गया। प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने औद्योगिक सुरक्षा और हादसे में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि जब वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम एफआईआर में शामिल है, तो उनकी गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है ? विपक्ष ने यह भी पूछा कि क्या यह कार्रवाई वास्तव में दोषियों के खिलाफ है या केवल दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई है। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि क्या भविष्य में हर औद्योगिक दुर्घटना में कंपनी के निदेशकों पर इसी तरह कार्रवाई की जाएगी।

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने जवाब देते हुए बताया कि खतरनाक रसायनों के निर्माण, भंडारण और उपयोग से जुड़े नियमों के तहत अधिकृत एजेंसियों से सुरक्षा ऑडिट कराया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 32 कारखानों में सेफ्टी ऑडिट कराया जा चुका है और जहां ऑडिट नहीं हुआ है, वहां नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है।सक्ती स्थित वेदांता पावर प्लांट हादसे का उल्लेख करते हुए विपक्ष ने कहा कि अब तक केवल कुछ लोगों को ही आरोपी बनाया गया है। इस पर मंत्री ने बताया कि अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रम विभाग ने श्रम न्यायालय में मामला दायर किया है और पुलिस फैक्ट्री एक्ट सहित अन्य प्रावधानों के तहत जांच कर रही है।

विधायक रामकुमार यादव ने पीड़ित परिवारों को घोषित आर्थिक सहायता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई आश्रितों को अब तक पूरी राशि नहीं मिली है। इस पर मंत्री ने बताया कि कंपनी ने मृतकों के आश्रितों को 35-35 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार 5 लाख रुपये तथा केंद्र सरकार की ओर से 2 लाख रुपये की सहायता देने की प्रक्रिया भी जारी है।बहस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि यदि अनिल अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, तो क्या सरकार वास्तव में उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी या यह केवल औपचारिक कदम है। इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने अंततः सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।



