
नई दिल्ली: वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पेशल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है। जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने दोषियों की अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा यथावत रहेगी। अदालत ने राज्य सरकार को मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और घायलों को 1-1 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 70 मिनट के भीतर 21 जगहों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की जान गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हमला देश के सबसे भीषण आतंकी हमलों में गिना जाता है और इसकी जांच कई वर्षों तक चली।

इस मामले की सुनवाई करीब 12 साल तक चली और कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी अदालत में कार्यवाही जारी रही। ट्रायल के दौरान 1,100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए, 6,000 से ज्यादा दस्तावेज पेश किए गए और 547 चार्जशीट दाखिल की गईं। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े आरोपियों पर इस साजिश को अंजाम देने का आरोप था। पुलिस का दावा था कि इस हमले की साजिश 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों के प्रतिशोध की मंशा से रची गई थी।





