
अमरनाथ यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद पवित्र गुफा से सामने आई तस्वीरों ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। हाल में सामने आए दृश्यों में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फीला शिवलिंग पहले की तुलना में काफी छोटा दिखाई दे रहा है। इसे देखकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जल्द से जल्द बाबा बर्फानी के दर्शन करने की इच्छा जता रहे हैं।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के लिए चार लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। यात्रा शुरू होने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर के विभिन्न बेस कैंपों और मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। श्रद्धालु समुद्र तल से लगभग 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा तक पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं।
बर्फ के तेजी से घटने की वजह क्या है?
गुफा के अंदर से सामने आई हालिया तस्वीरों के बाद कई श्रद्धालुओं ने चिंता व्यक्त की है कि यदि बर्फ का शिवलिंग इसी तरह तेजी से पिघलता रहा तो यात्रा के बाद के दिनों में आने वाले लोगों को इसके पूर्ण स्वरूप के दर्शन नहीं हो पाएंगे। हालांकि, इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी या श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि बर्फ के तेजी से घटने की वजह क्या है।
यात्रा के दौरान Security arrangements, भीड़ नियंत्रण और अन्य जरूरी इंतजामों की जिम्मेदारी संभाल रही एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, श्राइन बोर्ड पंजीकरण, यात्रा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े कार्यों का संचालन कर रहा है। इस घटनाक्रम के बाद हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और बदलते मौसम को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पर्यावरण और जलवायु से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान में बदलाव, असामान्य गर्म हवाएं, हवा की दिशा में परिवर्तन या स्थानीय मौसम की परिस्थितियां बर्फ से बनने वाली प्राकृतिक संरचनाओं को प्रभावित कर सकती हैं।
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विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि गुफा क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से मौसम और तापमान की नियमित निगरानी की जानी चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि बर्फीले शिवलिंग में आया बदलाव केवल मौसमी परिस्थितियों का असर है या फिर लंबे समय से बदल रहे जलवायु पैटर्न का परिणाम।
फिलहाल श्रद्धालुओं की आस्था पहले की तरह कायम है और बड़ी संख्या में लोग बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए लगातार अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ रहे हैं। सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति कैसी रहती है और प्राकृतिक बर्फीले शिवलिंग का स्वरूप कितना सुरक्षित रहता है।





