
दिग्गज नेता,राहुल गांधी,अखिलेश यादव,ममता
बनर्जी,केजरीवाल समेत कई कतार में…?
दिल्ली : कॉकरोच पार्टी के संस्थापक के दिल्ली आगमन को लेकर सरगर्मियां तेज़ है| खबर है,कि इस मौके पर जंतर-मंतर में सभा आयोजित करने की कवायतें भी जोरों पर है| कांग्रेस नेता राहुल गांधी,सपा के अखिलेश यादव,TMC के ममता बनर्जी गुट और आम आदमी पार्टी के कई चर्चित नेता “कॉकरोच” के भीतर अपना भविष्य तलाश रहे है|”कॉकरोच पार्टी” के सुर्ख़ियों में आने के बाद इन नेताओं की दिलचस्पी के किस्से भी राजनैतिक गलियारों में चर्चा में है|

एक जानकारी के मुताबिक़,मोदी और बीजेपी के घोर विरोधी दलों समेत विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं ने कॉकरोच में सवार होने के लिए अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है|उन्हें सिर्फ आमंत्रण का इंतज़ार है,यह भी बताया जा रहा है,कि आप पार्टी के ज्यादातर नेताओं ने कॉकरोच के विरोध प्रदर्शन को हवा देने के लिए जमीनी प्रयास भी शुरू कर दिए है |

जानकारी के मुताबिक,कॉकरोच के संस्थापक सदस्यों का आप पार्टी से करीब का नाता रहा है| लिहाज़ा,अभिजीत दीपके को लेकर आप नेताओं की बांछे खिली हुई है | “केजरीवाल एंड पार्टी” को उसकी खोई हुई ज़मीन की पुनर्वापसी की उम्मीद कॉकरोच के जरिए ही संभव नजर आ है | कॉकरोच पार्टी की लोकप्रियता के ग्राफ का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है,कि उसके प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देखते ही देखते 80 लाख लोगों ने अपना समर्थन दिया है | इसमें ज्यादातर तादाद नौजवानो की बताई जाती है |

उधर,मुख्य सत्ताधारी बीजेपी भी कॉकरोच के इरादों से वाकिफ बताई जाती है| पार्टी के कई नेता दलील दे रहे है,कि PM मोदी का सामना करने में नाकाम विपक्ष अब कॉकरोच की खाल में घुसने की तैयारी में है | उनकी माने तो,देश में अराजकता फैलाने के लिए केंद्र सरकार के सामने आए दिन विपक्ष चुनौती पेश करता है| यह कॉकरोच आंदोलन भी युवाओं को भड़काने का एक नमूना है| सूत्र तस्दीक करते है,कि कॉकरोच पार्टी की राजनैतिक उठा-पटक में राहुल गाँधी भी अपनी भूमिका मजबूत करने में जुटे है| वो,इससे जुड़े आंदोलनों को हवा देने की कोशिशों में व्यस्त बताएं जाते है| जबकि,ममता से जुड़े TMC के सांसदों ने भी कॉकरोच में दिलचस्पी दिखाई है| दिल्ली में डटे ये सांसद कॉकरोच के आंदोलन और कार्यक्रमों की पूछ-परख भी करते देखे गए|

फिलहाल, कॉकरोच पार्टी और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। समर्थक इसे युवाओं की आवाज बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल और राजनीतिक विश्लेषक इसके पीछे अलग-अलग संभावनाएं तलाश रहे हैं। दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन और उससे जुड़ी गतिविधियों पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सोशल मीडिया से निकला यह आंदोलन केवल चर्चा तक सीमित रहता है या फिर राजनीति के मैदान में भी अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब होता है। बहरहाल,कॉकरोच को लेकर मचा सियासी शोर थमता नजर नहीं आ रहा है।






