
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब आदिवासी समुदाय विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ जाएगा। राष्ट्रपति मुर्मु एकीकृत जनजातीय विकास अभिकरणों (ITDA) और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं (ITDP) के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।
राष्ट्रपति का मुख्य संदेश
इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा, “आदिवासी समाज सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध है, लेकिन योजनाओं की जानकारी और लाभ उन्हें समय पर नहीं मिल पाते। आदिवासी परिवार आत्मसम्मान के साथ जीवन जीते हैं, इसलिए योजनाओं को बार-बार उनके दरवाजे तक ले जाना आवश्यक है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि आईटीडीए और आईटीडीपी के अधिकारी जनजातीय समुदाय के कल्याण और विकास कार्यक्रमों को गांव और घर-घर तक पहुंचाएं। इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
प्रमुख बातें
– प्रधानमंत्री जन योजना के तहत 20,000 से अधिक आदिवासी गांवों तक विकास कार्यक्रम पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
– विशेष रूप से पीवीटीजी (Particularly Vulnerable Tribal Groups) समूहों को घर, जमीन और आजीविका उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
– प्रत्येक गर्भवती मां को पोषण, हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हर युवा को गरिमापूर्ण आजीविका उपलब्ध कराना एजेंसियों का दायित्व है।
– आदिवासी समाज के पारंपरिक ज्ञान, कौशल, बुनाई और हस्तकला को आधुनिक मूल्यवर्धन के साथ जोड़कर उनके आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आदिवासी युवाओं को आधुनिक शिक्षा, तकनीक और कौशल विकास से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे बदलते समय के साथ कदम मिला सकें। उन्होंने अधिकारियों से आदिवासी समाज की समस्याओं को सीधे सुनने और उनके समाधान के लिए प्रभावी योजनाएं बनाने की अपील की।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, राज्यमंत्री दुर्गादास उइके और मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी सम्मेलन में उपस्थित थे। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, उन्हें प्रभावी ढंग से लागू कर हर आदिवासी परिवार तक लाभ पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को आदिवासी क्षेत्रों में मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। यह सम्मेलन आदिवासी विकास में तेजी लाने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





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