
रायपुर/बिलासपुर/रायगढ़ :छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल संकट से लोगों की सांसे फूली हुई है|कई जिलों के पंपों पर “NO FUEL” का बोर्ड भी झलकने लगा है|ये वो इलाके है,जो शहर के बाहरी छोर ( OUTER ) और घनी आबादी से दूर स्थित है| शहरों के भीतर स्थित डीजल-पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने की जद्दोजहद और लंबी कतारों से उपभोक्ता परेशान नज़र आ रहे है| जबकि,दूसरी ओर डीजल टैंकरों की अफरा-तफरी का मामला भी सुर्ख़ियों में है |

तस्दीक की जा रही है,कि कई औद्योगिक इकाईयों में बड़े पैमाने पर उपभोक्ता डीजल की सुनियोजित आपूर्ति की जा रही है | इसकी मुख्य वज़ह पंप संचालकों को एक ही झटके में मोटा मुनाफ़ा हासिल होना बताया जाता है | यह भी तस्दीक की जा रही है,कि राज्य में डीजल-पेट्रोल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होने के बावजूद कई फ्यूल स्टेशन में “NO DIESEL -PETROL” का बोर्ड चस्पा कर दिया गया है |

जानकार इस पर हैरानी जता रहे है | इसके साथ ही सूत्रों द्वारा उस खेल का भी चित्रण किया जा रहा है,जिसके जरिएउपभोक्ताओं के उपयोग में आने वाले ”डीजल” की खेप की खेप औद्योगिक इकाईयों को सौंपी जा रही है|सूत्रों की माने तो, छत्तीसगढ़ में ”डीजल” की कीमत वर्तमान में लगभग ₹93 से ₹98 प्रति लीटर के बीच है,जबकि कमर्शियल उपयोग में आने वाले डीजल की कीमत लगभग ₹96 से ₹97 से बढ़ कर 113 से 115 रुपए प्रति लीटर की दर पर स्थिर है।बताते है,कि बिचौलिए इसी 13 से 15 रुपए प्रति लीटर के मुनाफ़े के मद्देनजर उपभोक्ता डीजल की कालाबाज़ारी को बड़े पैमाने पर अंजाम दे रहे है |उन्हें प्रति टैंकर 25 हज़ार तक का मुनाफा हो रहा है। जानकारों के मुताबिक,शहर के आउटर और दूरस्थ अंचलों में स्थित कई फ्यूल स्टेशन में आधी रात 12 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक खासतौर पर उन डीजल टैंकरों को रिफ्यूल किया जाता है,जो इस कालाबाजारी में लिप्त बताए जाते है |

इस कालाबाज़ारी में कुछ एक तेल कंपनियों के कर्ता-धर्ता भी लिप्त बताए जाते है,जिनके कंधों पर टैंकरों में लगे GPS अर्थात “ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम” (Global Positioning System) पर नजर रखने की जवाबदारी टिकी है,मोटे मुनाफ़े में हिस्सेदारी के चलते ऐसे कर्मी अफरा-तफरी करने वालों के साथ सांठ-गांठ कर मौन रहना ज्यादा मुनासिब समझ रहे है | जानकारों के मुताबिक,फ्यूल स्टेशन पहुंचने के बाद मौका पाते ही GPS सिस्टम बंद कर दिया जाता है और फिर ऐसे टैंकरों को औद्योगिक इकाइयों के लिए रवाना कर दिया जाता है |

सूत्रों की माने तो,फ्यूल स्टेशन में “डीप रॉड” और “मीटर रीडिंग” जैसी प्रक्रिया अब सिर्फ औपचारिक बन कर रह गई है|यह भी बताया जाता है,कि आबादी वाले इलाकों की तुलना में आउटर और वीरानी वाले इलाको में स्थित फ्यूल स्टेशनों में डीज़ल की ख़पत कही ज़्यादा दर्शाया जा रहा है|जानकारों की मानें,तो लाइसेंसशुदा औद्योगिक इकाइयों को प्रति माह 24 सौ लीटर डीज़ल की आपूर्ति सीधे तेल कंपनियों द्वारा सुनिश्चित की जाती है|जबकि,डीज़ल स्टॉक रखने का लाइसेंस प्राप्त औद्योगिक इकाइयां हर माह इतना ही लीटर डीज़ल सीधे पेट्रोल पंपों से भी प्राप्त कर सकती है|

औद्योगिक उपयोग में आने वाले डीजल की बढ़ती मांग एवं पूर्ति और खपत के मद्देनजर बिचौलियों को नया कारोबार हाथ लग गया है|रोजाना वे सैंकड़ों टैंकरों की अफरा-तफरी कर रहे है| सूत्रों की माने तो,चुनिंदा पंप संचालकों को प्रति टैंकर 25 हज़ार तक का मुनाफ़ा हो रहा है| मोटे लाभ के मद्देनज़र कई पंप संचालक भी इस सुनियोजित ग़ैर-कानूनी कारोबार का हिस्सा बन गए है|

सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि रायपुर,दुर्ग, रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर,जांजगीर -चांपा और बलौदाबाजार में रोजाना सैंकड़ों संदेही डीजल टैंकरों की सुनियोजित आपूर्ति जारी है | इस कालाबाजारी की कमान सक्ति के कारोबारी “अग्रवाल आनंद” के हाथों में बताई जाती है|यह भी बताया जाता है,कि यह शख्स खुद पंप संचालक भी है |“अग्रवाल आनंद” का नेटवर्क पूरे प्रदेश में फ़ैला बताया जाता है |

उधर,राज्य में अचानक डीजल- पेट्रोल की सुचारूआपूर्ति में अवरोध सामने आने के बाद प्रशासन ने भी सख़्ती बरतना शुरू कर दिया है | रायपुर कलेक्टर डॉ.गौरव सिंह ने ऑयल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों की बैठक में साफ निर्देश दिए है,कि सभी पेट्रोल पंपों पर नियमित रूप से ईंधन उपलब्ध रहना चाहिए | उन्होंने दो टूक कहा है,कि आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए | इसके बावजूद भी रायपुर समेत कई जिलों में शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक उपभोक्ताओं की डीजल-पेट्रोल को लेकर मारामारी देखी जा रही है |

कई इलाकों में फ्यूल स्टेशनों में वाहनों की लंबी कतार लग रही है,जबकि कई ग्राहक बग़ैर डीजल-पेट्रोल डलवाएं बेरंग लौटते भी देखे जा रहे है| कई इलाकों में पंपों पर “NO FUEL” का बोर्ड भी चस्पा कर दिया गया है| जबकि,दर्जनों ऐसे फ्यूल पंप भी है,जहाँ आम ग्राहकों को उनकी मांग से (काफी कम) निश्चित मात्रा में डीजल- पेट्रोल मुहैया कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है | प्रदेश में अचानक डीजल- पेट्रोल की क़िल्लत हैरान करने वाली बताई जाती है| जबकि,तेल कंपनियों दावा कर रही है,कि शहरों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक ईंधन (फ्यूल) की पर्याप्त आपूर्ति की जा रही है|

फ़िलहाल,आम उपभोक्ताओं का डीजल उद्योगों में खपाने के आरोपों के बीच छत्तीसगढ़ में प्रशासन अलर्ट मोड पर है| फ्यूल सप्लाई में गड़बड़ी या मुनाफाखोरी की शिकायतों पर शासन-प्रशासन संजीदा नज़र आ रहा है |
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