
आलेख – रंजना राज
रायपुर : सोशल मीडिया से लेकर टेलीविजन के पर्दे तक आज भी ब्रेकिंग न्यूज़ अर्थात सबसे पहले खबरे प्रकाशित-प्रसारित करने की होड़ मची है|कौन सा चैनल सबसे पहले खबरे ब्रेकिंग न्यूज़ प्रसारित करेगा? TRP की लिस्ट में रीजनल और नेशनल में टॉप पोजीशन किस चैनल की रहेगी ? यही हाल सोशल मीडिया में खबरों की रेटिंग का है,व्यूज,लाइक,डिस-लाइक और सब्सक्राइबर्स खबरों की दशा और दिशा तय कर रहे है,उसके ही आधार पर खबरें परोसी जा रही है| बाज़ार का फंडा है,कि जो दिखता है,वही बिकता है ? टीवी हो या मोबाइल स्क्रिन,नंबर-1 पर नजर आने के लिए कई एंगलों से ख़बरीलाल खुद-बा-ख़ुद अपनी पीठ थपथपाने में भी इन दिनों पीछे नहीं है|

देश में जैसे-जैसे सोशल मीडिया का दायरा बढ़ते जा रहा है,वैसे वैसे खबरों की सत्यता और निष्पक्षता पर सवाल भी खड़े हो रहे है | दरअसल,आज के डिजिटल युग में आपकी उँगलियों के एक क्लिक पर देश-विदेश से लेकर कई सारी जानकारियां कुछ ही सेकेण्ड में मिल जाती है| लेकिन ज़रा ठहरिए,आप यह भी सोचिये,आप जो खबर अपने मोबाइल या टीवी स्कीन पर देख रहे है,क्या वह सत्य या नहीं ? आज के तकनीकीकरण ने जनसंचार माध्यम को जितना आसान बना दिया है,उतना ही बौद्धिक विकास की क्षमता पर भी गहरा प्रभाव डाला है | हाल ही में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक प्लेन क्रैश की खबर आग की तरह पूरी सोशल मीडिया में फ़ैल गई | व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी हो या फिर इंस्टाग्राम के फीड,इस खबर को लेकर तरह-तरह से तथ्य सामने आए |

जशपुर के आरा पहाड़ से टक्कर एक विमान हादसा हुआ है,जिसमे में दो लोगो की जान चली गई| अब इस खबर को सुनकर है कोई हैरान था,लोगों के मन में कई सवाल थे,फिर भी इस खबर को धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा था| विमान हादसे की कोई आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई और बड़े-बड़े मीडिया संस्था ने इस खबर को ब्रेकिंग रूप में प्रसारित किया था| जिसके बाद जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, जहां प्लेन क्रैश होने के कोई साक्ष्य नहीं मिले। मतलब विमान क्रैश की खबर महज एक अफवाह ही निकली|प्रशासन ने विमान हादसा को लेकर यह स्पष्ट किया, कि जंगल में सूखे पत्तों पर लगी आग की वजह से धुआं उठ रहा था। खनिज सर्वे के काम में लगे हेलीकाप्टर को नजदीक से उड़ते देख लोगों ने इसे हेलीकाप्टर या फिर कोई विमान क्रैश से जोड़कर देखने लगे|

यह कोई पहला मामला नहीं,इससे पहले दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की निधन की अफवाह की खबर सामने आई थी,जबकि उस समय वह जीवत थे,ऑपरेशन सिंदूर के दौरान टीवी चैनलों में तेज़ हूंटर बजा कर लोगो को भारत-पाकिस्तान युद्ध की खबरे परोसी गई थी| ऐसी खबरों से लोगो में इस युद्ध को लेकर खौफ देखा गया था| युद्ध को लेकर सोशल मीडिया में कई झूठे तस्वीरें-वीडियो अभी भी वायरल है,इसमें AI तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है| हालाँकि,ऑपरेशन सिंदूर की मुहीम के बीच पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा, झूठे तथ्यों और अफ़वाहो पर विराम लगाने के लिए रक्षा मंत्रालय को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोगो को हकीकत से वाकिफ कराया गया था| ताकि अफ़वाहो पर रोक लग सके| यही नहीं इस दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कई मीडिया संस्थानों से मिथ्या खबर ना फ़ैलाने के लिए कड़े कदम उठाने के लिए निर्देशित भी किया गया था| इसके लिए घटना किसी भी घटना की आधिकारिक पुष्टि पर जोर देने के लिए कहा भी गया था |

अब सबसे बड़ा सवाल यह है,कि खबर चाहे जशपुर की हो या फिर देश के अन्य भू-भाग की,इनमे सच्चाई कितनी रहती है ? इस पर गौर फरमाना होगा| ऐसी खबरों को प्रसारित करने से पहले इसकी जांच-पड़ताल जरुरी है| इसकी जिम्मेदारी पत्रकार और उनसे जुड़े संस्था की होती है,ब्रेकिंग न्यूज़ के चक्कर में कई कलमकार घटना की बिना आधिकारिक पुष्टि के खबरों को सोशल मीडिया के डिब्बे में डाल रहे है | इसमें “बिग ब्रेकिंग” की पैकिंग कर आकर्षक रूप से खबर को प्रचारित किया जाता है| जबकि,कई मौकों पर ऐसी खबरे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा करती है|

दर्शक हो या पाठक घटना के तथ्यों और आधिकारिक पुष्टि को लेकर अपनी मोबाइल स्क्रिन स्क्रॉल करते नजर आते है| खबरों के प्रकाशन-प्रसारण को लेकर स्थानीय पत्रकार हो या फिर न्यूज़ रूम, प्रामाणिकता और विश्वसनीयता को देख परखने के बाद ही ख़बर को ऑन एयर करना चाहिए| जबकि,जनता को भी ऐसी खबरों को लेकर अपनी ओर से जिम्मदारी दिखानी चाहिए| उन्हें आधिकारिक पुष्टि वाले समाचारों को ही सोशल मीडिया में एक-दूसरे को वाकिफ कराना चाहिए| दरअसल,कई मौकों पर इंटरनेट पर लगाईं जाने वाली रोक के पीछे मकसद यही होता है,कि कोई भी अनाधिकृत खबरें वायरल ना हो| ऐसी खबरें जब आपकी नजरों से हो कर गुजरे,तो सबसे पहले स्वविवेक का परिचय देते हुए देखे और समझे की घटना को स्थापित करने के लिए AI तकनीक या डीप फेंक तथ्य तो नहीं ?

पत्रकारिता के क्षेत्र में सोशल मीडिया ने नई क्रांति ला दी है| इसे एक व्यवसाय के रूप में अपना लिया गया है| रातों-रात नेम-फेम और धन कमाने के लिए कई गैर पेशेवर लोगों ने पत्रकारिता का दामन थाम लिया है| आज जरूरत एक ऐसे विश्वसनीय मीडिया की है,जो जनता को हकीकत से वाकिफ़ कराने के लिए आधिकारिक तथ्यों पर जोर दे ? ना की कौवे ने कान ले गया जैसी कहावत को ‘चरितार्थ’ करते हुए झूठ के पैर पर फ़ोकस करने में अपनी ताकत झोंक दे,क्योंकि सच ही कहा है,किसी ने झूठ के पांव नहीं होते |
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