
पश्चिम बंगाल : 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार का शोर अब थम गया है। इसके साथ ही दोनों राज्यों में पहले चरण के मतदान से पहले सियासी हलचल अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है । प्रचार के आखिरी दिन सभी प्रमुख दलों ने पूरी ताकत झोंक दी। पश्चिम बंगाल में भाजपा, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस ने रैलियों, रोड शो और जनसभाओं के जरिए मतदाताओं को साधने की कोशिश की।

भाजपा की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, सांसद हेमा मालिनी और कई वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा संभाला। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यभर में लगातार जनसभाएं कर तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। कांग्रेस की ओर से राहुल गाँधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कई सभाओं को संबोधित किया।

कुल्टी की सभा में अमित शाह ने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल के युवाओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बंगाल का मुख्यमंत्री केवल बंगाल में जन्मा और बंगाली भाषी व्यक्ति ही बनेगा। तमिलनाडु में भी चुनाव प्रचार अंतिम दिन तेज़ रहा। चेन्नई, कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली और तिरुवरूर समेत कई इलाकों में डीएमके, एआईएडीएमके, भाजपा और टीवीके के नेताओं ने आखिरी दौर का प्रचार किया। केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने भाजपा और एनडीए के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की, जबकि एआईएडीएमके नेता इदाप्पदी K. पलानिस्वामी ने डीएमके सरकार पर कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर हमला बोला।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धमाकेदार चुनाव प्रचार ने पूरे राज्य के चुनावी माहौल को भाजपा के पक्ष में मोड़ दिया है. उनकी आक्रामक शैली, कानून-व्यवस्था पर जोर और हिंदू असुरक्षा के मुद्दे ने हिंदू वोटरों में नई ऊर्जा भर दी है.

अब दोनों राज्यों में 23 अप्रैल को मतदान होगा। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होगा। सभी प्रमुख दलों के नेता राज्य भर में रैलियां कर रहे हैं, चुनाव आयोग ने 48 घंटे की शांतिपूर्ण अवधि और ड्राई डे सहित सख्त नियम लागू किए हैं। अब तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में 3 करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 मतदाता मतदान के पात्र हैं।पात्र मतदाताओं की अंतिम सूची न्यायाधिकरणों द्वारा प्रस्तुत किए जाने के बाद इन आंकड़ों में संशोधन किया जाएगा। इस बीच, चुनाव आयोग ने मतदान से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

पहले चरण के लिए 8,000 से अधिक बूथों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है।तमिलनाडु की 234 सीटों पर भी 23 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। यहां केंद्रीय बलों, निगरानी टीमों और त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयों की तैनाती बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि इनका उद्देश्य का उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है। सीमावर्ती क्षेत्रों में कड़ी निगरानी के आदेश दिए गए हैं और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कुछ क्षेत्रों को सील कर दिया गया है।



