
कानपुर। आर्यनगर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है, जगह-जगह गंदगी के अंबार लगे हैं और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों की हालत इतनी खराब है कि वे खुद कूड़ा बन चुकी हैं, जबकि जनता नारकीय हालात में जीने को मजबूर है। अगर तुरंत सुधार नहीं हुआ तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा और अधिकारियों को जगाया जाएगा। यह बातें शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के विधायक अमिताभ बाजपेयी ने कहीं।
विधानसभा क्षेत्र आर्यनगर में नगर-निगम की लापरवाही के खिलाफ आज वार्ड पटकापुर, तलाक महल, दलेलपुरवा और हरबंस मोहाल क्षेत्र में जाकर स्थिति का जायजा लिया गया। क्षेत्र में कई स्थानों पर गंदगी के ढेर लगे मिले, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दी।
विधायक ने कहा, सफाई कार्य में लगी कूड़ा गाड़ियों की हालत बेहद दयनीय पाई गई। कई गाड़ियां जर्जर स्थिति में खड़ी थीं, जबकि कुछ ही किसी तरह चल रही थीं। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि जिस वार्ड में लगभग सत्तर कूड़ा गाड़ियों की आवश्यकता है, वहां केवल दस से बारह गाड़ियां ही उपलब्ध हैं, जिनमें से भी कई खराब स्थिति में हैं। इससे नियमित सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
जनता की आवाज को मजबूती देने के लिए विरोध का अनोखा तरीका अपनाया गया। नाट्य रूपांतरण के जरिए जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान वे टूटी-फूटी गाड़ियों में कूड़ा उठाते हुए नजर आए, जिससे जमीनी हकीकत को प्रतीकात्मक रूप में सामने रखा गया।
प्रदर्शन के दौरान दो प्रमुख मांगें रखी गईं—पहली, सफाई कर्मचारियों की तत्काल भर्ती की जाए और दूसरी, कर्मचारियों के अनुपात में पर्याप्त कूड़ा गाड़ियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों को उनकी कुंभकर्णी नींद से जगाया जाएगा।
इस मौके पर चंकी गुप्ता, विकास गुप्ता, मो. अली, पार्षद मो. सारिया, दुर्गेश चक, शुभम जायसवाल, आकाश यादव सहित कई लोग मौजूद रहे।
तीन दिन पहले भी विधायक अमिताभ बाजपेयी ने अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया था। सूखे पड़े तरणताल में उतरकर उन्होंने ड्राई स्विमिंग कर व्यवस्था की लापरवाही को उजागर किया था और जिम्मेदारों को जगाने की कोशिश की थी। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी उन्होंने “अधिकारी जी सो रहे हैं – पार्ट 2” के माध्यम से विरोध जताया। “कूड़ा गाड़ी या गाड़ी ही कूड़ा” शीर्षक के जरिए उन्होंने सफाई व्यवस्था की बदहाली को प्रतीकात्मक रूप से सामने रखा और यह संदेश दिया कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अब भी गहरी नींद में हैं।







