
सक्ती/रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ में वेदांता पावर प्लांट हादसे में नया अपडेट सामने आया है,इस मामले में दर्ज़ FIR के बाद आरोपियों की धरपकड़ खासतौर पर उद्योगपति अनिल अग्रवाल की गिरफ़्तारी को लेकर छत्तीसगढ़ पुलिस पसोपेश में नजर आ रही है,मामले की जाँच को लेकर पुलिस की सक्रियता से माना जा रहा है,कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ़्तारी का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा | इस बीच सवाल यह भी उठ रहा है,कि क्या उद्योगपति अनिल अग्रवाल पुलिस के समक्ष “आत्मसमर्पण” करेंगे या उनकी गिरफ़्तारी होगी ? चर्चा यह भी है,कि वेदांता चेयरमैन कानूनी पक्ष रखने और स्वयं को निर्दोष साबित करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते है,इसके लिए अग्रिम ज़मानत की कवायतें भी इस मुहीम में शामिल बताई जाती है |

वेदांता थर्मल पावर प्लांट में हादसे की जाँच और FIR की जारी प्रक्रिया के बीच यह तथ्य भी सामने आया है,कि इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एंड सेफ्टी से जुड़ी थर्ड पार्टी के खिलाफ ना तो पुलिस अपनी जाँच शुरू कर पाई है,और ना ही घटना के लिए जिम्मेदारों में से एक “थर्ड पार्टी” को आरोपी बनाया गया है| जबकि,श्रम कानूनों को सुनिश्चित करते हुए वेदांता पावर प्लांट में ऑपरेशन से जुडी कई महत्त्वपूर्ण जवाबदारी का निर्वहन “थर्ड पार्टी” द्वारा भी किया जा रहा था| यह भी बताया जाता है,कि हादसे के लिए जवाबदेह “थर्ड पार्टी” को जाँच में शामिल नहीं करने से मामला सिर्फ खानापूर्ति साबित होगा|

सक्ति जिले के वेदांता पावर प्लांट में हादसे के बाद स्थानीय पुलिस ने डभरा थाना क्षेत्र में दर्ज FIR में कम्पनी में पदस्थ लगभग 10 आरोपियों के खिलाफ नामज़द FIR दर्ज की है | लेकिन,घटना के हफ्ते भर बाद भी आरोपियों की गिरफ़्तारी को लेकर संशय बना हुआ है| सूत्र तस्दीक करते है,कि मौजूदा परिस्थिति में उद्योगपति अनिल अग्रवाल की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए नाक का सवाल बन गई है| राजनैतिक और कारोबारी गलियारों में दावा किया जा रहा है,कि प्राथमिक जाँच पूरी हुए बगैर ही स्थानीय पुलिस ने कुछ खास कारणों से वेदांता समूह के चेयरमैन का नाम FIR में घसीटा है ?

छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर अडाणी समूह और वेदांता ग्रुप आमने-सामने है,दोनों के बीच प्रतिद्वंद्विता काफी पुरानी बताई जाती है | यह भी बताया जाता है,कि राज्य में ख़निज संसाधनों पर कॉर्पोरेट सेक्टर के बीच छिडे विवाद का रुख उद्योगपति अनिल अग्रवाल की ओर मोड़ दिया गया है| वेदांता चेयरमैन को आरोपी बनाए जाने के मामले को अदानी समूह के हितों से जोड़कर देखने वाले कारोबारी संगठनो और नामी-गिरामी उद्योगपति की प्रदेश में कोई कमी नहीं है | वे इसके पीछे खनिज संसाधनों पर कब्जे की राजनीति से भी इंकार नहीं कर रहे है |

सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि हादसे की जाँच में जुड़े उद्योग विभाग के वरिष्ठ अफसरों को भी काफी विलंब से पता पड़ा,कि वेदांता चेयरमैन का नाम बगैर ठोस आधार के FIR में शामिल किया गया है| जाँच में शामिल ऐसे कई अफसरों ने FIR को गोपनीय ( SENSITIVE ) करार दिए जाने पर हैरानी जताई| वे पूरे मामले को कही पर “निगाहें और कही पर निशाना” बताने से जुड़ी माथापच्ची से दो-चार होते देखें गए | हालाँकि,अफसर कैमरे पर कुछ भी बोलने से बचते रहे |

सूत्रों के द्वारा यह भी दावा किया जा रहा है,कि मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ कई वरिष्ठ अधिकारी इस तथ्य से बेख़बर थे,कि स्थानीय पुलिस ने FIR में उद्योगपति अनिल अग्रवाल का नाम भी दर्ज कर दिया है| जबकि,ऐसे किसी विशिष्ट व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज होने से पूर्व मुख्यमंत्री समेत सरकार की विशेष सेवा में जुटे अफसरों को वैधानिक कार्यवाही के बारे में पुलिस द्वारा समुचित जानकारी दी जाती है | सवाल यह भी उठ रहा है,कि आखिर किस अधिकारी के निर्देश पर FIR में वेदांता चेयरमैन का नाम शामिल किया गया था | क्या उस अधिकारी के पास उद्योगपति अनिल अग्रवाल को आरोपी बनाने योग्य पर्याप्त तथ्य और सबूत उपलब्ध थे ? दरअसल,कई बड़े निवेशकर्ता और उद्योगपति बाकायदा X पोस्ट पर तस्दीक कर रहे है,कि प्राथमिक जांच पूरी हुए बगैर ही अनिल अग्रवाल का नाम बतौर आरोपी FIR में शामिल कर दिया गया |

यह भी बताया जाता है,कि साय सरकार की”सुशासन-प्रशासन” की “नैया” में सवार कई वरिष्ठ अफसरों को वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ भी FIR दर्ज होने की जानकारी कई घंटो बाद उस वक्त पता पड़ी जब मामले ने कारोबारी जगत में तूल पकड़ लिया था | ऐसे में FIR की वजह के पीछे कई समीकरणों का दावा भी औद्योगिक घरानों में चर्चा का विषय बना हुआ है| आपदा में अवसर तलाशने वाले उस रहस्यमय और प्रभावशील अफसर के फरमानों की चर्चा प्रशासनिक गलियारों में जोरों पर है,जिनके “करकमलों” से उद्योगपति अनिल अग्रवाल पर शिकंजा कसने का पैतरा आजमाया गया था ?

छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले में स्थित वेदांता थर्मल पावर प्लांट में इसी माह 14 अप्रैल 2026 को हादसे की घटना सामने आई थी | इस घटना में लगभग दो दर्ज़न कामगारों की मौत और कई श्रमिकों के घायल होने के बाद उद्योगपति अनिल अग्रवाल को छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली से दो-चार होना पड़ रहा है | उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का आरोप मढ़ दिया गया है| जबकि,सितंबर 2009 में कोरबा जिले में बालको (BALCO) पावर प्लांट में एक निर्माणाधीन 275 मीटर ऊँची चिमनी ढहने से 40 से अधिक मजदूरों की मौत हो गई थी। यह एक बड़ी औद्योगिक दुर्घटना थी, जिसमें चीनी कंपनी सेपको (SEPCO) निर्माण कार्य कर रही थी। लेकिन,इस मामले में पुलिस और तत्कालीन बीजेपी सरकार ने लापरवाही के कारण हादसे में कई लोगों की मौत के बावजूद बालको के तत्कालीन मुख्य कर्ता-धर्ता व चेयरमैन उद्योगपति अनिल अग्रवाल के खिलाफ ना तो कोई जाँच की थी और ना ही उनका नाम FIR में शामिल किया गया था | इस चिमनी हादसे की जांच में कई सुरक्षा खामियां पाई गई थीं।

जानकारों के मुताबिक,इस मामले में पुलिस ने कुल 17 आरोपी बनाए थे, जिसमें 12 आरोपियों को ही गिरफ्तार किया जा सका,शेष 5 आरोपी अभी भी फरार बताए जाते हैं| ऐसे में चेयरमैन की भूमिका और आरोपियों को चिन्हित करने के मामले में पुलिस की थ्योरी और समीकरण गौरतलब बताए जाते है| इधर,वेदांता प्रबंधन ने पीड़ित परिवारों को मुआवजे का वितरण शुरू कर दिया है| बताया जाता है,कि हादसे में जान गंवाने वाले 24 मजदूरों में से 21 मजदूरों के परिजनों को मुआवजे का भुगतान किया जा चुका है. वहीं घायल 11 मजदूरों को भी मुआवजा राशि जल्द मुहैया कराने का दावा किया गया है|

अनिल अग्रवाल को आरोपी बनाए जाने का मामला जिस तर्ज पर प्रदेश में गरमाया हुआ है, उसने भविष्य में होने वाले निवेश के मामलों को सतह में ला दिया है| कारोबारी अंदेशा जाहिर कर रहे है,कि घटना के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे |उन्हें अंदेशा इस बात का भी है,कि “अहमदाबाद” से जारी फरमान के बाद वेदांता चेयरमैन को भी लपेटे में लिया गया,जबकि सूत्र यह भी तस्दीक करते है ,कि मुख्य सचिव और डीजीपी ने अनिल अग्रवाल को आरोपी बनाए जाने को लेकर हरी झंडी नहीं दिखाई थी ? ऐसे में किसके निर्देश पर उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई ? मामला गंभीर प्रशासनिक क्रियाकलापों की ओर इशारा कर रहा है|

गौरतलब है,कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश में निवेश का बेहतर वातावरण तैयार करने के लिए “जी-तोड़” कोशिश कर रहे है| उन्होंने,राज्य में निवेश बढ़ाने को लेकर हाल ही के महीनों में विदेश यात्राएं भी की थी| यही नहीं,दिल्ली में कई बड़े उद्योगपतियों से चर्चा कर निवेश के लिए छत्तीसगढ़ पधारने का न्योता भी दिया था| मुख्यमंत्री के रचनात्मक क़दमों के आगे बढ़ते ही,निवेश के राह पकड़ते ही उद्योगपति अनिल अग्रवाल पर निशाना साधे जाने के मामले ने उद्योग जगत को आश्चर्य में डाल दिया है| यह भी दावा किया जा रहा है,कि वेदांता के प्रतिद्वंदी कॉर्पोरेट कंपनी के एक राष्ट्रीय और प्रादेशिक चैनल पर वेदांता पावर प्लांट की घटना को बढ़-चढ़ कर पेश किया जा रहा है| नाम ना जाहिर करने की शर्त पर कई उद्योगपति इसे कॉर्पोरेट संग्राम की संज्ञा दे रहे है|

फ़िलहाल,हादसा पीड़ितों को न्याय कब मिलेगा यह तो भगवान भरोसे है ? लेकिन, उद्योगपति अनिल अग्रवाल को FIR से नाम हटाने के लिए क्या कीमत चुकानी पड़ेगी ? आम जनता और उद्योगपतियों की निगाहे इस ओर लगी हुई है |
वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर FIR से उद्योग जगत में सनसनी, किसके इशारे पर हुई कार्रवाई ?






