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ग्लासगो की धरती पर भारतीय सेना के 20 खिलाड़ियों ने पांच अलग-अलग खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इन खिलाड़ियों ने 8 गोल्ड, 7 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज सहित कुल 16 पदक जीतकर भारत के कुल पदकों में 41% और कुल स्वर्ण पदकों में 62% का योगदान दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय सेना के इन खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से बातचीत की और उनके प्रदर्शन, अनुभवों तथा खेलों के प्रति समर्पण की सराहना की।
अनुशासन और मेहनत की सराहना
रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना के जवानों और खिलाड़ियों के अनुशासन, कड़ी मेहनत तथा देश के लिए गौरव हासिल करने के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना के जवान खेलों के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा और क्षमता के माध्यम से देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भारतीय सेना के साथ-साथ पूरे देश के लिए गौरव का विषय बताया।
बेटियां भी बन रही हैं चैंपियन
राजनाथ सिंह ने कहा, “मुझे यह देखकर भी बड़ी खुशी हुई कि हमारे जो चैंपियन हैं, उनमें ठीक-ठाक संख्या बेटियों की भी है। एक दिलचस्प चीज मुझे यह भी दिखी कि हमारी ज्यादातर बच्चियां बॉक्सिंग में पदक ला रही हैं।”
नारी शक्ति किसी से कम नहीं
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अपने आप में सुखद संकेत है कि भारत की नारी शक्ति किसी भी मामले में किसी से कम नहीं है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि ग्लासगो की ऐतिहासिक सफलता उनके लिए गौरव का विषय है, लेकिन इससे भी बड़ी चुनौतियां आगे उनका इंतजार कर रही हैं। एशियन गेम्स और ओलंपिक में अपेक्षाएं अधिक होंगी, दबाव ज्यादा होगा और चुनौतियां भी बड़ी होंगी।
आगे की चुनौतियों के लिए तैयार रहें
राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस अनुशासन, हिम्मत और अथक लगन ने खिलाड़ियों को ग्लासगो की ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, वही गुण उन्हें आने वाली हर ऊंचाई तक ले जाएंगे। उन्होंने खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए इसी जज्बे के साथ तैयारी जारी रखने का संदेश दिया।
गांव-कस्बों से निकल रहे चैंपियन
रक्षा मंत्री ने कहा कि वह दौर अब इतिहास की बात हो चुका है, जब खेल किसी विशेष वर्ग, क्षेत्र या सुविधा-संपन्न परिवारों तक सीमित हुआ करते थे। आज खेलों का जनतंत्रीकरण हो चुका है और खेल किसी एक वर्ग का विशेषाधिकार नहीं रह गया है। अब देश के कोने-कोने से चैंपियन सामने आ रहे हैं। दूरदराज के गांवों, छोटे कस्बों और आर्थिक रूप से वंचित परिवारों से आने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
खेल बना सफलता का नया मानक
उन्होंने कहा कि आज खेल ने अपना विस्तृत और भव्य रूप धारण कर लिया है। आनंद और मनोरंजन खेलों का हिस्सा तो आज भी हैं, लेकिन अब खेल समाज के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बन चुका है। खेल अपने आप में सफलता का एक मानक बन गया है और आज इसे सम्मानित क्षेत्र के तौर पर देखा जाता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेना के खिलाड़ी इस नए युग के अग्रदूत हैं।
सेना के खिलाड़ी हर मैदान में अजेय
राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों से कहा कि वे इसी तरह कठिन परिश्रम करते रहें, स्वयं को निरंतर चुनौती दें और हर प्रतियोगिता से कुछ न कुछ सीखते रहें। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी उस भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो युद्ध के मैदान में भी अजेय है और खेल के मैदान में भी। रक्षा मंत्री ने ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन करने वाले सभी खिलाड़ियों को एक बार फिर बधाई दी।




