
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यों के बीच पानी से जुड़े विवादों को आपसी सहयोग और तेज प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए गठबंधन की अपील की। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा, ताकि लंबे समय तक समाधान सुनिश्चित किया जा सके। इससे पहले बुधवार को हुई 51वीं प्रगति (PRAGATI) बैठक में प्रधानमंत्री ने देशभर के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में अपनाने का सुझाव दिया। यह परियोजना जल संसाधन प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। में रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र से जुड़े लगभग 30,000 करोड़ रुपये की लागत वाले सात बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने इन परियोजनाओं की समय पर पूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि देरी होने से न केवल परियोजनाओं की लागत बढ़ती है, बल्कि आम जनता को आवश्यक सेवाएं भी समय पर नहीं मिल पातीं। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं की समयसीमा का सख्ती से पालन किया जाए और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर अड़चनें न आएं। उन्होंने कहा कि पब्लिक वर्क्स में पारदर्शिता और गति दोनों बेहद जरूरी हैं। बैठक में परियोजनाओं से जुड़ी प्रमुख बाधाओं, लंबित मंजूरियों और विभागीय समन्वय की कमी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे सभी अटकी हुई समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। केन-बेतवा परियोजना पर विशेष रूप से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों को नदी जोड़ो परियोजनाओं, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों जैसे उपायों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में जल सुरक्षा के लिए एक समग्र और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। चुनाव टालने को लेकर निगम पर साधा निशाना प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जल संसाधनों का सही और वैज्ञानिक प्रबंधन आने वाले समय में कृषि, उद्योग और जनजीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। इसलिए राज्यों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और केंद्र के साथ मिलकर योजनाओं को तेजी से लागू करना चाहिए। कुल मिलाकर, यह बैठक देश में बुनियादी ढांचे के विकास और जल संसाधन प्रबंधन को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें समय पर परियोजनाओं को पूरा करने और अंतरराज्यीय सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।




